कीट चेतावनी: हरियाणा के हिसार-सिरसा में कपास पर गुलाबी सुंडी का प्रकोप, आर्थिक नुकसान का स्तर पार
27 अक्टूबर 2026, सिरसा, हरियाणा: कीट चेतावनी: हरियाणा के हिसार-सिरसा में कपास पर गुलाबी सुंडी का प्रकोप, आर्थिक नुकसान का स्तर पार – हरियाणा के हिसार और सिरसा जिलों में कपास की फसल पर गुलाबी सुंडी का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर से ऊपर पहुंच गया है। केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान, नागपुर की हाल की साप्ताहिक एडवाइजरी के मुताबिक सिरसा में इस कीट ने करीब 40 से 50 प्रतिशत हरे डोडों को नुकसान पहुंचाया है, जिससे किसानों की उपज और आमदनी दोनों पर असर पड़ने का खतरा है।
संस्थान की यह एडवाइजरी 15 से 21 अक्टूबर के सप्ताह के लिए जारी की गई है। इसमें हरियाणा के साथ-साथ राजस्थान के श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ और बांसवाड़ा सहित दक्षिणी राजस्थान के इलाकों में भी गुलाबी सुंडी और अन्य कीटों के असर का जिक्र है। मध्य प्रदेश के खंडवा क्षेत्र में भी निगरानी की जा रही है, हालांकि वहां से गुलाबी सुंडी की कोई सूचना नहीं मिली है।
गुलाबी सुंडी के अलावा सिरसा में जड़ सड़न व मुरझान की समस्या और डस्की कॉटन बग का असर भी देखा गया है। बांसवाड़ा क्षेत्र में सफेद मक्खी, जैसिड और थ्रिप्स जैसे रस चूसने वाले कीटों का प्रकोप है, जहां जैसिड का स्तर आर्थिक क्षति सीमा से ऊपर पहुंच चुका है। वैज्ञानिकों का कहना है कि एक साथ कई कीटों का हमला होने पर किसानों के लिए सही पहचान और सही दवा का चुनाव करना ज्यादा जरूरी हो जाता है।
किसान कैसे करें छिड़काव
वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि जब नुकसान पांच प्रतिशत से ज्यादा हो, तभी कीटनाशक का छिड़काव करें, ताकि बिना जरूरत के दवाओं का इस्तेमाल न हो और फायदेमंद कीट भी सुरक्षित रहें। सिरसा में प्रति एकड़ के हिसाब से इमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी 100 ग्राम, प्रोफेनोफॉस 50 ईसी 500 मिलीलीटर या क्विनालफॉस 20 एएफ 400 मिलीलीटर में से कोई एक दवा 150 से 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़की जा सकती है। इसके 10 से 12 दिन बाद जरूरत पड़ने पर किसी दूसरी दवा से दोबारा छिड़काव किया जा सकता है, ताकि कीट में एक ही दवा के प्रति प्रतिरोधक क्षमता न बने।
श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ क्षेत्र में प्रति लीटर पानी के हिसाब से प्रोफेनोफॉस 50 प्रतिशत ईसी 2.5 मिलीलीटर, इमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी 0.50 ग्राम या इंडोक्साकार्ब 14.5 एससी एक मिलीलीटर के घोल का इस्तेमाल बताया गया है। कीट की निगरानी के लिए सिरसा में प्रति एकड़ दो और राजस्थान में प्रति हेक्टेयर पांच फेरोमोन ट्रैप लगाने की सलाह दी गई है, जिससे कीटों की मौजूदगी और संख्या का समय रहते पता चल सके।
जड़ सड़न की समस्या में कार्बेंडाजिम 50 प्रतिशत डब्लूपी का 1.2 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल से खेत में ड्रेंचिंग करने को कहा गया है, जबकि राजस्थान में पत्ती धब्बा रोग के लिए कार्बेंडाजिम 12 प्रतिशत और मैनकोजेब 63 प्रतिशत डब्लूपी के मिश्रण का 30 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी के घोल में छिड़काव सुझाया गया है। वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट किया कि कीटनाशक का इस्तेमाल सिर्फ फसल की स्थिति और नुकसान का स्तर देखकर ही किया जाए, और तुड़ाई के समय छिड़काव से बचा जाए ताकि चुने गए कपास की गुणवत्ता प्रभावित न हो।
किसानों के लिए आगे की सावधानी
गुलाबी सुंडी कपास की फसल के लिए सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाले कीटों में शामिल है, क्योंकि यह डोडे के भीतर घुसकर रुई और बीज को नुकसान पहुंचाती है, जिससे नुकसान बाहर से तुरंत दिखाई नहीं देता। वैज्ञानिकों का कहना है कि खेतों में फेरोमोन ट्रैप लगाना और नियमित रूप से डोडों को तोड़कर जांचना ही इस कीट के शुरुआती प्रकोप का पता लगाने का सबसे भरोसेमंद तरीका है।
एडवाइजरी में यह भी सुझाव दिया गया है कि कीटनाशकों के साथ-साथ खेत के आसपास से कपास के पुराने ठूंठ और गिरे हुए डोडों को हटाते रहें, क्योंकि इनमें सुंडी अगले सीजन तक छिपी रह सकती है। समय पर यह सफाई न होने पर आने वाले सीजन में भी गुलाबी सुंडी का खतरा बना रह सकता है।
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