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राज्य कृषि समाचार (State News)

कीट चेतावनी: नागालैंड में सोयाबीन की पत्तियों पर सुंडी का हमला, वैज्ञानिकों ने बताया उपाय

27 अक्टूबर 2026, कोहिमा, नागालैंड: कीट चेतावनी: नागालैंड में सोयाबीन की पत्तियों पर सुंडी का हमला, वैज्ञानिकों ने बताया उपाय – राज्य में सोयाबीन की फसल पर पत्ती खाने वाली सुंडी का प्रकोप देखा जा रहा है, जिसे लेकर कृषि वैज्ञानिकों ने अक्टूबर माह की मौसम-आधारित एकीकृत कृषि एडवाइजरी में किसानों को सतर्क किया है। वैज्ञानिकों ने बताया कि अगर सोयाबीन के पत्तों पर जाले जैसी बुनावट, खुरचने के निशान या सुंडियां दिखाई दें, तो समय पर छिड़काव जरूरी है, क्योंकि देरी होने पर यह कीट कुछ ही दिनों में पूरे खेत में फैल सकता है।

एडवाइजरी तैयार करने में पादप प्रजनन एवं आनुवंशिकी, पादप रोग विज्ञान, कीट विज्ञान, मसाले एवं औषधीय पौध, मुर्गी पालन और सुकर पालन जैसे अलग-अलग विषयों के वैज्ञानिकों ने योगदान दिया है। यह सलाह राज्य के किसानों को हर महीने मौसम के हिसाब से फसल और पशुपालन से जुड़ी जानकारी देने के लिए जारी की जाती है, ताकि किसान समय रहते अपनी फसल की सुरक्षा के उपाय कर सकें।

नागालैंड में सोयाबीन को तेल उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आमदनी के लिए एक अहम फसल के तौर पर बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे में इस फसल पर कीट प्रकोप का समय पर नियंत्रण न केवल मौजूदा सीजन की पैदावार बचाने के लिए जरूरी है, बल्कि आने वाले सीजन में भी किसानों के भरोसे को बनाए रखने के लिए अहम है।

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किन दवाओं का करें इस्तेमाल

वैज्ञानिकों के मुताबिक पत्ती खाने वाली इस सुंडी के शुरुआती लक्षण दिखने पर किसान तीन में से कोई एक उपाय अपना सकते हैं। पहला, नीम तेल का दो मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव किया जा सकता है, जो जैविक तरीका है और मिट्टी व पानी पर कम असर डालता है।

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दूसरा विकल्प NSKE यानी नीम बीज गिरी अर्क पांच प्रतिशत के घोल का छिड़काव है, जिसे किसान खुद भी तैयार कर सकते हैं। तीसरा और ज्यादा असरदार उपाय स्पिनोसैड 45 एससी का 0.75 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के घोल में छिड़काव बताया गया है, जो ज्यादा प्रकोप की स्थिति में इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।

वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि छिड़काव सुबह या शाम के समय किया जाए, जब तेज धूप न हो, ताकि दवा का असर बेहतर तरीके से हो सके। खेत का नियमित निरीक्षण करते रहने से सुंडी के प्रकोप को शुरुआती स्तर पर ही पहचान कर नुकसान को सीमित किया जा सकता है, और महंगी दवाओं के बार-बार छिड़काव से भी बचा जा सकता है।

फसल को बचाना क्यों जरूरी

नागालैंड के पहाड़ी इलाकों में सोयाबीन की खेती ज्यादातर छोटे-छोटे खेतों में होती है, जहां एक बार कीट का प्रकोप फैलने पर पूरे गांव की फसल को खतरा हो सकता है। वैज्ञानिकों ने इसलिए पड़ोसी खेतों के किसानों से भी आपस में जानकारी साझा करने और साथ मिलकर छिड़काव की योजना बनाने की सलाह दी है।

एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि सिर्फ कीटनाशक पर निर्भर रहने के बजाय खेत की नियमित सफाई, खरपतवार हटाने और फसल चक्र अपनाने से भी सुंडी जैसे कीटों का प्रकोप लंबे समय में कम किया जा सकता है। इससे किसानों की दवाओं पर होने वाली लागत भी घटेगी और मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी।

वैज्ञानिकों ने यह भी याद दिलाया है कि किसी भी कीटनाशक का छिड़काव करते समय हाथों व चेहरे की सुरक्षा के लिए दस्ताने और मास्क का इस्तेमाल जरूर करें, और खाली शीशियों व पैकेट को खेत या पानी के स्रोतों के आसपास न फेंकें। सही मात्रा और सही समय पर छिड़काव ही फसल को बचाने के साथ-साथ किसान और पर्यावरण दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

कृषि विभाग के स्थानीय अधिकारियों से भी किसान जरूरत पड़ने पर सीधे संपर्क कर सकते हैं, ताकि कीट की सही पहचान और सही दवा के चुनाव में उन्हें मदद मिल सके। समय पर सही सलाह लेने से किसान गलत दवा के इस्तेमाल और उसमें होने वाले अनावश्यक खर्च से भी बच सकते हैं।

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