पांढुर्ना में पुराना खाद नए भाव में बेचने की हैट्रिक
(विशेष संवाददाता)
25 अगस्त 2026, इंदौर: पांढुर्ना में पुराना खाद नए भाव में बेचने की हैट्रिक – कहा जाता है कि जब किसी चीज की लत लग जाती है, तो वह आसानी से नहीं छूटती है। ‘ लागी छूटे ना ‘ की यह मिसाल पांढुर्ना के खाद बिक्री मामले में पूरी तरह मुफीद बैठ रही है , क्योंकि यहां एक बार नहीं , बल्कि तीन बार पुरानी दर के खाद को किसानों को नए भाव पर बेचने की हैट्रिक हो गई , लेकिन संबंधित विभागों के कान पर जूं भी नहीं रेंगी है। पुरानी दर के खाद को नए भाव में बेचने के इस तीसरे घटनाक्रम से मार्कफेड और सहकारिता विभाग के बीच मिलीभगत की आशंका को बल मिला है। इस मामले में कृषि विभाग की उदासीनता भी सवालों के घेरे में है। पुरानी दर की खाद को नई दर पर बेचने से मप्र के किसानों के साथ जो आर्थिक अन्याय हुआ है , क्या उसकी किसान वर्ष में गहन जांच होगी ? क्या किसानों को न्याय मिलेगा ? इन सवालों के ज़वाब प्रशासन की कार्रवाई पर निर्भर है।

प्रायः देखा गया है कि जब कोई गलती हो जाती है, तो उससे सबक लेकर आगे सावधानीपूर्वक कार्य किया जाता है , लेकिन पांढुर्ना के इस खाद बिक्री मामले ने इस बात को भी झुठला दिया है। क्या इसे संबंधित विभागों की सामूहिक लापरवाही समझें ? या संबंधितों द्वारा संगमत होकर पुरानी दर की खाद को नए भाव में बेचने का प्रयास ? पांढुर्ना जिले में पुरानी दर के खाद को तीन बार नए भाव से बेचा जाना दाल में काला होने की तरफ इशारा कर रहा है। जबकि मार्कफेड ने अपने 26 मई 2026 को जारी मूल्य संशोधन आदेश में स्पष्ट रूप से लिखा था, कि मूल्य वृद्धि लागू होने से पहले उपलब्ध पुराने खाद का स्टॉक पूर्व निर्धारित दर अथवा बोरी पर अंकित एमआरपी पर बेचा जाएगा। यह पूरा खेल कथित शुभ -लाभ के चक्कर में पुरानी एमआरपी दरों वाली खाद को नई दरों पर बेचने का प्रयास प्रतीत होता है। जिसमें किसानों का बहुत आर्थिक शोषण हुआ है। यदि इस मामले की राज्यव्यापी जांच की जाए और सहकारी समितियों के गोदामों में मौजूद पुरानी दर के खाद का भौतिक सत्यापन एवं बिक्री दस्तावेजों से बड़ा घोटाला सामने आने से इंकार नहीं किया जा सकता है। इसमें किसानों की अशिक्षा अथवा जागरूकता के अभाव की बड़ी भूमिका है।

पुराना खाद, नए भाव की हैट्रिक – उल्लेखनीय है कि सबसे पहला मामला पांढुर्ना के डबल लॉक केंद्र का सामने आया था , जहां ई- टोकन की आड़ में किसानों को पुरानी दर का खाद नई दरों पर बेचकर 118 किसानों से 38850 रु की अधिक वसूली की गई थी। इस मामले को जब कृषक जगत ने 22 जून 2026 के अंक में ‘ क्या ई -टोकन की आड़ में किसानों से अधिक वसूली हुई ? शीर्षक से मुखपृष्ठ पर छापा तो तंत्र सक्रिय हुआ और मार्कफेड के द्वारा त्वरित कार्रवाई कर पांढुर्ना के डबल लॉक केंद्र के गोदाम प्रभारी मनोज कुमार टेपे को निलंबित कर एफआईआर दर्ज़ करने के आदेश जारी हुए थे। इसे कृषक जगत के 27 जुलाई 2026 के अंक में प्रकाशित किया गया था। इस मामले की स्याही अभी सूख भी नहीं पाई थी कि वृहत्ताकार कृषि साख समिति , पांढुर्ना द्वारा त्रंबकेश्वर एग्रो इंडस्ट्रीज़ , मेघनगर का सिंगल सुपर फास्फेट ज़िंक दानेदार खाद 630 रु / बोरी की दर से किसानों को बेचा गया ,जबकि बोरी पर एमआरपी 530 रु अंकित थी। इस घटना को कृषक जगत के 17 अगस्त 2026 के अंक में प्रकाशित किया । जिसमें अधिकारियों ने अपने कथन में उक्त खाद की बिक्री बंद कराने की बात कही , लेकिन संबंधित अधिकारियों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की , जिसका नतीजा यह हुआ कि बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति ,मर्यादित , पांढुर्ना द्वारा अरिहंत फर्टिलाइज़र एन्ड केमिकल्स इंडिया लि , कनावटी ( नीमच ) का विक्रम सुपर स्टार सिंगल सुपरफास्फेट दानेदार सादा खाद बैच नंबर AG001 , निर्माण अप्रैल -26 , मप्र में एमआरपी 505 रु की पुरानी दर का खाद किसानों को 605 रु बेचकर उन्हें इसकी रसीद भी दी गई। यह किसानों से पुरानी एमआरपी के बजाय नई दर से खाद बेचने का तीसरा मामला सामने आया। किसान श्री रामेश्वर मिरग्याजी बेलखड़े ने कृषक जगत को बताया कि मैंने उक्त समिति से पांच अलग खाद खरीदे थे। बाद में सिंगल सुपर फास्फेट दानेदार सादे खाद की बोरी देखी तो पता चला कि मुझसे पुरानी दर के हिसाब से 4 बोरी के 400 रु. अधिक लिए गए।
अधिकारियों के कथन – इस संबंध में अरिहंत फर्टिलाइज़र एन्ड केमिकल्स इंडिया लि के मार्केटिंग ऑफिसर श्री राधेश्याम शर्मा ने कृषक जगत से कहा कि रात में गाड़ी भरी गई थी। मजदूरों से गलती से पुरानी दर का माल लोड हो गया था। समिति से अभी भुगतान नहीं हुआ है। पुरानी दर का खाद वापस करवा लेंगे और पुरानी दर की खाद की अंतर राशि का भी समाधान कर लिया जाएगा । इस संबंध में प्रबंधन को पत्र लिख दिया है। वहीं सहकारी निरीक्षक / प्रशासक श्री प्रवीण नवांगे का कहना था कि मेरे अधीन 6 सहकारी समितियां हैं। लेकिन इनमें कहीं भी पुरानी दर के खाद को नई दर पर बेचने का मामला सामने नहीं आया है। जहां तक कंपनियों को समितियों के लिए उर्वरक के ऑर्डर देने और बिल्टी भेजने का है , तो यह प्रक्रिया जिला विपणन अधिकारी, छिंदवाड़ा से होती है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी वही दे सकते हैं।
मार्कफेड का एसएसपी से कोई लेना-देना नहीं -डीएमओ – नए मामले पर मार्कफेड की डीएमओ सुश्री अंकिता गुरनानी ने कहा कि संबंधित एसएसपी खाद की आपूर्ति से मार्कफेड का कोई लेना-देना नहीं है। उनके अनुसार यह खाद संभवतः डिप्टी रजिस्ट्रार सहकारिता और बैंक प्रबंधक के माध्यम से सप्लाई हुई होगी।
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