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राज्य कृषि समाचार (State News)

पांढुर्ना: समन्वित खेती किसानों के लिए वरदान, वर्षभर आय का प्रभावी मॉडल

18 जुलाई 2026, पांढुर्ना: पांढुर्ना: समन्वित खेती किसानों के लिए वरदान, वर्षभर आय का प्रभावी मॉडल – कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ के मार्गदर्शन में जिले में कृषि क्षेत्र में हो रहे नवाचारों तथा भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप समन्वित खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गुरुवार को उपसंचालक कृषि श्री मोरिस नाथ, परियोजना संचालक श्री धीरज ठाकुर एवं कृषि विभाग के अधिकारियों ने प्रगतिशील कृषक डॉ. सुरेंद्र पन्नासे के कृषि प्रक्षेत्र का निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने देखा कि डॉ. सुरेंद्र पन्नासे अपने खेत में आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए उद्यानिकी फसलों जैसे संतरा, अमरूद, आम एवं सीताफल के साथ मक्का, अरहर, कपास सहित विभिन्न फसलों की समन्वित खेती कर रहे हैं। इसके साथ ही वे पशुपालन भी कर रहे हैं, जिससे उन्हें वर्षभर नियमित आय प्राप्त हो रही है।

डॉ. पन्नासे ने अपने खेत में जीवामृत यूनिट स्थापित की है, जिसका उपयोग वे अपनी फसलों में कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जीवामृत के उपयोग से खेती की लागत में कमी लाई जा सकती है। समन्वित खेती अपनाने से किसानों को वर्षभर आय प्राप्त होती है, उत्पादन लागत कम होती है तथा भूमि की उर्वरा शक्ति भी बनी रहती है। उन्होंने बताया कि समन्वित खेती में किसान अधिक लाभ अर्जित कर सकता है।

डॉ. पन्नासे ने अपने खेत में सीताफल की विभिन्न किस्में, आम, अमरूद, मौसंबी, संतरा, अरहर, बरबटी, मक्का, चकोतरा, नींबू आदि की खेती की है। साथ ही जल संरक्षण के लिए खेत में तालाब का निर्माण कराया है, जिससे सिंचाई के लिए पानी का उपयोग किया जाता है। कृषि के साथ पशुपालन से उन्हें दूध, गोबर एवं गोमूत्र भी प्राप्त होता है, जिसका उपयोग खेती में किया जा रहा है।उपसंचालक कृषि श्री मोरिस नाथ ने जिले के सभी किसानों से अपील की कि वे एकल फसल उत्पादन के बजाय समन्वित खेती अपनाएं, जिससे उन्हें वर्षभर आय प्राप्त हो सके।भ्रमण के दौरान सहायक संचालक कृषि श्री दीपक चौरसिया, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री विनोद लोखंडे तथा कृषि विस्तार अधिकारी श्री पंकज पराड़कर उपस्थित रहे।

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