राज्य कृषि समाचार (State News)

एमपी में धान की रोपाई लक्ष्य से पीछे, क्या मानसून बदलेगा तस्वीर?

24 जुलाई 2026, भोपाल: एमपी में धान की रोपाई लक्ष्य से पीछे, क्या मानसून बदलेगा तस्वीर? – मध्य प्रदेश में खरीफ 2026 के दौरान धान की बुवाई फिलहाल अपेक्षाकृत धीमी रही है। 22 जुलाई 2026 तक राज्य में 39.63 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 19.54 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई हुई है, जो लक्ष्य का 49.3 प्रतिशत है। कृषि विभाग के सूत्रों के अनुसार पिछले वर्ष इसी अवधि तक 27.39 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई थी।

हालांकि, इन आंकड़ों को देखकर धान की खेती को कमजोर नहीं माना जा सकता, क्योंकि मध्य प्रदेश में धान की रोपाई का प्रमुख समय जुलाई के अंतिम सप्ताह से लेकर अगस्त के प्रथम सप्ताह तक रहता है। इसलिए अभी बुवाई का अंतिम आकलन होना बाकी है।22 जुलाई तक के आंकड़े इस प्रकार हैं :-(पीडीऍफ़ लगाएं)

बुवाई की रफ्तार धीमी क्यों?

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कुछ संभावित कारण हो सकते हैं—

  • पूर्वी एवं दक्षिण-पूर्वी जिलों में वर्षा का असमान वितरण।
  • धान की खेती मुख्यतः रोपाई आधारित होने के कारण किसान पर्याप्त वर्षा और खेतों में पानी भरने की प्रतीक्षा करते हैं।
  • तालाबों, नहरों और जलाशयों में पर्याप्त जल उपलब्ध होने के बाद ही बड़े पैमाने पर रोपाई शुरू होती है।

धान की प्रमुख उत्पादक पट्टी

आगे क्या संकेत हैं?

यदि जुलाई के अंतिम सप्ताह और अगस्त के पहले पखवाड़े में अच्छी वर्षा होती है, तो धान की रोपाई में तेजी आने की पूरी संभावना है और बुवाई का रकबा लक्ष्य के काफी करीब पहुंच सकता है। लेकिन यदि वर्षा में और विलंब होता है या लंबे समय तक शुष्क स्थिति बनी रहती है, तो अंतिम बुवाई क्षेत्र और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

कृषक जगत विश्लेषण

वर्तमान स्थिति को धान की कमजोर फसल के रूप में नहीं, बल्कि विलंबित रोपाई के रूप में देखना अधिक उचित होगा। मध्य प्रदेश में धान ऐसी प्रमुख खरीफ फसल है जिसकी बुवाई का अधिकांश हिस्सा जुलाई के अंतिम सप्ताह और अगस्त के आरंभ में पूरा होता है। इसलिए आगामी 10–15 दिनों की वर्षा ही तय करेगी कि राज्य धान के निर्धारित लक्ष्य के कितना करीब पहुंच पाता है। फिलहाल स्थिति चिंताजनक नहीं, बल्कि प्रतीक्षारत कही जा सकती है।

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