भदोही में धान की फसल में जीवाणु झुलसा और खैरा रोग का प्रकोप, कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी
08 अक्टूबर 2026, भदोही (उत्तर प्रदेश): भदोही में धान की फसल में जीवाणु झुलसा और खैरा रोग का प्रकोप, कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी – जिले में धान की फसल में जीवाणु झुलसा और खैरा रोग का प्रकोप देखा जा रहा है, जिसे देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। उप कृषि निदेशक राम प्रवेश और जिला कृषि अधिकारी इरम मिर्जा ने किसानों से समय रहते लक्षण पहचानकर उपचार शुरू करने की अपील की है।
विभाग के मुताबिक जीवाणु झुलसा रोग में पत्तियां किनारों और सिरों से सूखने लगती हैं और धीरे-धीरे मुड़कर विकृत आकार ले लेती हैं। वहीं खैरा रोग जिंक की कमी से होता है, जिसमें पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और उन पर भूरे रंग के धब्बे दिखने लगते हैं।
जीवाणु झुलसा के लिए क्या छिड़कें
जीवाणु झुलसा रोग से बचाव के लिए कृषि विभाग ने स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट 90 प्रतिशत और टेट्रासाइक्लिन हाइड्रोक्लोराइड 10 प्रतिशत के मिश्रण वाली दवा की सलाह दी है। इसकी मात्रा प्रति एकड़ 200 ग्राम तय की गई है, जिसे 120 लीटर पानी में घोलकर खेत में छिड़कना चाहिए।
विभाग का कहना है कि लक्षण दिखते ही छिड़काव शुरू कर देना चाहिए, क्योंकि देरी होने पर रोग पूरे खेत में तेजी से फैल सकता है और बचा हुआ उपचार असरदार नहीं रह जाता।
खैरा रोग के लिए जिंक-यूरिया का घोल
खैरा रोग के उपचार के लिए किसानों को प्रति एकड़ दो किलोग्राम जिंक सल्फेट और आठ किलोग्राम यूरिया के घोल के छिड़काव की सलाह दी गई है। कृषि विभाग के मुताबिक यह उपाय समय पर करने से पौधों की बढ़वार दोबारा सामान्य हो जाती है और उपज पर पड़ने वाला असर कम हो जाता है।
कृषि विभाग की टीमें जिले के अलग-अलग ब्लॉकों में खेतों का सर्वे कर रही हैं, ताकि प्रभावित क्षेत्रों की सही पहचान हो सके। इसके साथ ही किसानों को जागरूक करने के लिए गांव-गांव जाकर शिविर भी लगाए जा रहे हैं, जिसमें कृषि रक्षा से जुड़े अधिकारी रोग की पहचान और सही दवा के इस्तेमाल का तरीका समझा रहे हैं।
विभाग ने किसानों को यह भी सलाह दी है कि किसी भी दवा का छिड़काव करने से पहले खेत में पानी की उचित निकासी सुनिश्चित कर लें, क्योंकि ज्यादा जलभराव की स्थिति में जीवाणु झुलसा रोग और तेजी से फैलता है। धान की कटाई का समय नजदीक आने के साथ ही कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे खेतों की नियमित निगरानी करते रहें और किसी भी असामान्य लक्षण की सूचना नजदीकी कृषि कार्यालय को जरूर दें।
विभाग के मुताबिक जिन खेतों में बीज खुद के बचाए हुए हैं, उनमें जीवाणु झुलसा रोग के फैलने की आशंका ज्यादा रहती है, इसलिए आने वाले सीजन के लिए प्रमाणित और उपचारित बीज के इस्तेमाल पर भी जोर दिया जा रहा है।
विभाग ने किसानों से यह भी कहा है कि किसी भी भ्रम की स्थिति में दवा का छिड़काव करने से पहले नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि रक्षा कार्यालय से जरूर संपर्क करें, ताकि रोग की सही पहचान के बाद ही सही दवा का इस्तेमाल हो सके।
खैरा रोग खासतौर पर उन खेतों में ज्यादा देखा जाता है जहां मिट्टी में जिंक की मूल रूप से कमी रहती है, इसलिए कृषि विभाग किसानों को मिट्टी परीक्षण कराने की भी सलाह देता रहा है। समय पर मिट्टी की जांच हो जाने से किसान अगले सीजन की बुवाई से पहले ही जरूरी पोषक तत्वों की कमी को पूरा कर सकते हैं।
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