नरवाई के प्रबंधन पर वेबिनार का आयोजन

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22 अप्रैल 2022,  इंदौर । नरवाई के प्रबंधन पर वेबिनार का आयोजन किसानों द्वारा गेहूं की पराली (नरवाई ) को जलाने से होने वाले नुकसान और इसके उचित प्रबंधन के लिए परियोजना संचालक,आत्मा , इंदौर द्वारा गत दिनों ऑन लाइन वेबिनार आयोजित किया गया। जिसमें क्षेत्रीय गेहूं अनुसन्धान केंद्र इंदौर से डॉ केसी शर्मा ,कृषि अभियांत्रिकी विभाग से श्री संतोष बावने , परियोजना संचालक आत्मा श्रीमती शर्ली थॉमस , कृषि विभाग के अधिकारी और जिले के चारों विकास खंडों से करीब 100  किसान शामिल हुए।

डॉ केसी शर्मा ने कहा कि नरवाई जलाने से मिट्टी कड़क हो जाती है और पोषक तत्वों को हानि होने के साथ लाभदायक जीवाणुओं का भी नाश होता है।  फसल अवशेषों से प्राप्त कार्बनिक पदार्थ मृदा में सुधारकर सूक्ष्मजीवी अभिक्रियाओं को उत्प्रेरित करता है , जिससे खेत की उर्वरता बढ़ती है। आपने किसानों को कम्बाइन हार्वेस्टर के साथ स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम या स्ट्रा रीपर का प्रयोग अनिवार्य रूप से करने की सलाह दी।

श्री संतोष बावने ने नरवाई के प्रबंधन हेतु जरुरी कृषि यंत्रों की जानकारी , तरीके, विभागीय अनुदान और इन योजनाओं का लाभ लेने की पूरी प्रक्रिया विस्तार से बताई। श्रीमती शर्ली थॉमस ने कहा कि फसल अवशेषों को वापस भूमि में मिला देने से भूमि में कार्बनिक पदार्थ /पोषक तत्वों की उपलब्धता में वृद्धि होती है और मिट्टी के भौतिक गुणों में सुधार होता है। इसलिए नरवाई न जलाएं और इसका उपयोग खाद और भूसा बनाने में करें।

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