राज्य कृषि समाचार (State News)

राजस्थान में खाद बिक्री का लाइसेंस लेना हुआ आसान, उर्वरक विक्रय प्रशिक्षण से हटाई अधिकतम आयु सीमा

08 अगस्त 2026, जयपुर: राजस्थान में खाद बिक्री का लाइसेंस लेना हुआ आसान, उर्वरक विक्रय प्रशिक्षण से हटाई अधिकतम आयु सीमा – राजस्थान सरकार ने किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार ने खुदरा उर्वरक विक्रय प्राधिकार पत्र प्राप्त करने के लिए जरूरी 15 दिवसीय प्रमाण पत्र प्रशिक्षण में शामिल होने की अधिकतम आयु सीमा की शर्त को हटा दिया है। इससे अब अधिक संख्या में योग्य व्यक्ति इस प्रशिक्षण में भाग ले सकेंगे और उर्वरक विक्रय प्राधिकार पत्र प्राप्त कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल के नेतृत्व में यह पहल की गई है। सरकार का उद्देश्य नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल और सुलभ बनाने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के लिए उर्वरक की उपलब्धता को बेहतर करना है।

15 दिवसीय प्रशिक्षण होगा अनिवार्य

उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत खुदरा उर्वरक विक्रय प्राधिकार पत्र प्राप्त करने के लिए भारत सरकार के गजट नोटिफिकेशन के अनुसार 15 दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स अनिवार्य है। राज्य सरकार ने इसी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए प्रशिक्षण में प्रवेश की अधिकतम आयु सीमा को समाप्त कर दिया है।

इसके साथ ही ग्राम सेवा सहकारी समितियों (GSS) और क्रय-विक्रय सहकारी समितियों (KVSS) के व्यवस्थापकों के लिए विशेष रूप से 15 दिवसीय प्रमाण पत्र प्रशिक्षण आयोजित कराने के निर्देश जारी किए गए हैं।

32 ऑनलाइन और 10 ऑफलाइन प्रैक्टिकल होंगे

कृषि आयुक्तालय के निर्देशों के अनुसार संबंधित जिले के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), कृषि विश्वविद्यालय एवं मान्यता प्राप्त संस्थानों में यह प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान कुल 32 व्याख्यान ऑनलाइन और 10 प्रैक्टिकल ऑफलाइन माध्यम से कराए जाएंगे।

इससे उन सहकारी समितियों के व्यवस्थापकों को भी जल्द प्रशिक्षण मिल सकेगा, जो अब तक अनिवार्य कोर्स से वंचित रहे हैं। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वे खुदरा उर्वरक विक्रय प्राधिकार पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।

ग्रामीण क्षेत्रों में खाद की उपलब्धता होगी आसान

राज्य सरकार के इस फैसले से ग्रामीण क्षेत्रों में उर्वरक की उपलब्धता को सुगम बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही सहकारी समितियों का व्यवसाय मजबूत होगा और किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने में सुविधा होगी। संस्थाओं की ओर से लंबे समय से ऑनलाइन प्रशिक्षण की व्यवस्था करने और अधिकतम आयु सीमा हटाने की मांग की जा रही थी। सरकार के इस निर्णय से इन मांगों को पूरा किया गया है।

‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को मिलेगा बढ़ावा

राज्य सरकार के अनुसार यह पहल ‘आपणो अग्रणी राजस्थान’ की भावना के अनुरूप है। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल के मार्गदर्शन में कृषि विभाग सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने के साथ व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और सुलभ बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

सरकार का मानना है कि इस कदम से जहां उर्वरक विक्रय के लिए जरूरी नियामकीय प्रक्रिया पूरी करने में सहकारी समितियों को सुविधा होगी, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में व्यवसाय करना भी आसान होगा। इससे सहकारी समितियों को मजबूती मिलने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।

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