राज्य कृषि समाचार (State News)

नीमच हर्बल मंडी किसानों के लिए वरदान: लाखों में बिक रही औषधीय फसलें, देशभर से पहुंच रहे किसान

18 मई 2026, नीमच: नीमच हर्बल मंडी किसानों के लिए वरदान: लाखों में बिक रही औषधीय फसलें, देशभर से पहुंच रहे किसान – मध्यप्रदेश के नीमच जिले की हर्बल मंडी औषधीय फसलों की खेती करने वाले किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यह देश की इकलौती ऐसी मंडी है, जहां कांटे, फूल, पत्ती, छिलके, बीज, छाल और जड़ तक की खरीद-बिक्री होती है। यहां किसानों को विभिन्न औषधीय फसलों के 500 रुपये से लेकर 2 लाख रुपये प्रति क्विंटल तक के दाम मिल रहे हैं। यही वजह है कि अब गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के किसान भी अपनी उपज लेकर नीमच पहुंच रहे हैं।

अप्रैल तक रहती है भारी आवक

नीमच हर्बल मंडी में अप्रैल माह तक औषधीय फसलों की भरपूर आवक बनी रहती है, जबकि मई के अंतिम सप्ताह तक आवक कम होने लगती है। खास बात यह है कि यहां आने वाले किसानों को निराश नहीं होना पड़ता, क्योंकि लगभग हर प्रकार की जड़ी-बूटी की खरीद हो जाती है।

मुख्य मंडी प्रांगण में 16 शेड बनाए गए हैं। यह देश की एकमात्र ऐसी बड़ी मंडी मानी जाती है, जहां 40 से 50 प्रकार के औषधीय पौधों की खरीदी नीलामी के जरिए होती है। साथ ही मसाला फसलों की खरीदी के लिए भी यह देश की सबसे बड़ी मंडियों में शामिल है।

औषधीय खेती से बढ़ रही किसानों की आय

नीमच के बड़े काश्तकार नीलेश पाटीदार पिछले दो-तीन वर्षों से मसाला और औषधीय फसलों की खेती कर रहे हैं। उनके पास करीब 45 एकड़ जमीन है। वे बताते हैं कि इसबगोल, इरानी अकरकारा, चिरायता, अजवाइन, किनोवा, चिया सीड और तुलसी बीज जैसी फसलों के अच्छे दाम मिल रहे हैं। लहसुन की फसल से भी किसानों को लाभ हो रहा है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव औषधीय फसलों के उत्पादन को बढ़ावा दे रहे हैं। यदि किसानों को जड़ी-बूटी की खेती की आधुनिक तकनीकों की बेहतर ट्रेनिंग मिले तो इसके और अच्छे परिणाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल सरकार किसानों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करा रही है।

छोटे किसानों को भी मिल रहा फायदा

रतलाम जिले के आजमपुर डोडिया गांव के किसान प्रहलाद सिंह ने बताया कि उन्हें अश्वगंधा और अकरकारा बीज बेचने पर अच्छे दाम मिले। मंडी में समय पर बोली लगती है और फसल आसानी से बिक जाती है। किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती।

इसी गांव के किसान पंचम सिंह ने बताया कि वे अजवाइन और अश्वगंधा लेकर मंडी पहुंचते हैं, जहां तत्काल भुगतान हो जाता है। अच्छी तुलाई, बेहतर दाम और भुगतान की सुविधा के कारण देशभर के किसान यहां आना पसंद कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसबगोल, अश्वगंधा, कलौंजी, सतावरी, सफेद मूसली, केसर और सर्पगंधा जैसी फसलों की हमेशा मांग बनी रहती है।

मंडी में आधुनिक सुविधाएं

मंडी सचिव उमेश बसेडिया शर्मा के अनुसार किसानों के हित में मंडी में लगातार सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। समय पर नीलामी, गुणवत्तापूर्ण तुलाई और त्वरित भुगतान की व्यवस्था किसानों के लिए काफी लाभदायक साबित हुई है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 में मंडी में 64.16 लाख क्विंटल और वर्ष 2025-26 में 72.40 लाख क्विंटल तक आवक दर्ज की गई। राष्ट्रीय पादप बोर्ड ने मंडी की अधोसंरचना के विकास के लिए करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये का अनुदान भी दिया है। मंडी में इलेक्ट्रॉनिक नाप-तौल और माल को सीधे व्यापारियों के गोदाम तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।

करीब 10.9 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली इस मंडी से लगभग 1100 लाइसेंसधारी व्यापारी जुड़े हुए हैं, जबकि यहां 150 से अधिक तुलावटी उपलब्ध रहते हैं।

औषधीय फसलों के उत्पादन में अग्रणी है मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश औषधीय फसलों के उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य बन चुका है। प्रदेश में करीब 46 हजार 837 हेक्टेयर क्षेत्र में इसबगोल, सफेद मूसली, कोलियस समेत कई औषधीय फसलों की खेती की जा रही है। वर्ष 2024-25 में प्रदेश में लगभग सवा लाख मीट्रिक टन औषधीय फसलों का उत्पादन हुआ।

देश में उत्पादित कुल औषधीय फसलों का करीब 44 प्रतिशत हिस्सा मध्यप्रदेश में पैदा होता है। राज्य सरकार किसानों को औषधीय फसलों की खेती के लिए 20 से 50 प्रतिशत तक अनुदान भी दे रही है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।

प्रदेश में अश्वगंधा, सफेद मूसली, गिलोय, तुलसी और कोलियस जैसी फसलों की खेती तेजी से बढ़ रही है, जिससे किसानों की आय में लगातार इजाफा हो रहा है।

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