बीकानेर के मुकेश गर्वा ने पॉलीहाउस से ऑफ-सीजन खेती कर कमाए 42 लाख रुपये सालाना
20 सितंबर 2026, बीकानेर (राजस्थान): बीकानेर के मुकेश गर्वा ने पॉलीहाउस से ऑफ-सीजन खेती कर कमाए 42 लाख रुपये सालाना – राजस्थान के बीकानेर जिले की लूणकरणसर तहसील के फूलदेसर गांव के किसान मुकेश गर्वा ने पॉलीहाउस तकनीक से ऑफ-सीजन सब्जियां उगाकर अपनी सालाना आय 2-3 लाख रुपये से बढ़ाकर 30-40 लाख रुपये तक पहुंचा दी है। रेगिस्तानी और पानी की कमी वाले इस इलाके में उनकी यह सफलता क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए मिसाल बन गई है।
कैसे बदली किस्मत
मुकेश गर्वा ने अपने खेत में 4,000 वर्ग मीटर के तीन पॉलीहाउस बनवाए, जिनमें वे खीरा, टिंडा और तोरई जैसी सब्जियां ऑफ-सीजन में उगाते हैं। सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन प्रणाली अपनाई गई है, साथ ही वर्षा जल संचयन के लिए एक गड्ढा भी बनाया गया है, जिससे पानी की कमी वाले इस इलाके में सिंचाई का पानी सुरक्षित रहता है।
बीकानेर के लूणकरणसर इलाके में भूजल सामान्यतः खारा होता है, इसलिए ज्यादातर किसान परंपरागत रूप से बाजरा और मोठ जैसी कम पानी वाली फसलों तक सीमित रहते थे। मुकेश गर्वा ने वर्षा जल संचयन और ड्रिप सिंचाई के जरिए इस चुनौती से निपटते हुए सब्जियों की खेती की राह चुनी, जो शुरुआत में इलाके के लिए एक जोखिम भरा प्रयोग माना गया।
पिछले सीजन में उनके पॉलीहाउस से कुल 2,400 क्विंटल उत्पादन हुआ, जिससे उन्हें करीब 60 लाख रुपये की कुल आय हुई। इसमें से करीब 18 लाख रुपये की लागत घटाने के बाद उनका शुद्ध मुनाफा लगभग 42 लाख रुपये रहा।
कृषि विभाग से मिला सहयोग
मुकेश गर्वा को कृषि विभाग से संरक्षित खेती (प्रोटेक्टेड कल्टिवेशन) की तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण मिला, जिसकी मदद से उन्होंने पॉलीहाउस के भीतर तापमान और नमी का बेहतर प्रबंधन सीखा। ऑफ-सीजन में सब्जियां तैयार होने से उन्हें बाजार में बेहतर भाव मिलता है, क्योंकि उस समय आम खेतों में इन सब्जियों की आवक कम होती है।
राजस्थान में बागवानी विभाग की योजनाओं के तहत आमतौर पर पॉलीहाउस निर्माण पर किसानों को अनुदान मिलता है, हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों में मुकेश गर्वा को मिली विशिष्ट सहायता राशि का ब्योरा नहीं दिया गया है।
बीकानेर जैसे शुष्क इलाके में जहां पानी सबसे बड़ी चुनौती है, वहां ड्रिप सिंचाई और वर्षा जल संचयन के साथ संरक्षित खेती को जोड़ना पानी बचाने और आय बढ़ाने दोनों में कारगर साबित हो रहा है।
राजस्थान जैसे पानी की कमी वाले राज्यों में पॉलीहाउस और ड्रिप सिंचाई जैसी तकनीकों से जुड़े कृषि-इनपुट कारोबार (पॉलीहाउस निर्माण सामग्री, ड्रिप उपकरण, हाइब्रिड बीज) की मांग बढ़ने की पूरी संभावना है। मुकेश गर्वा जैसी सफलता कहानियां अन्य छोटे व सीमांत किसानों को भी सीमित जमीन और पानी में संरक्षित खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं।
बीकानेर जिला रेगिस्तानी क्षेत्र में आता है, जहां सालाना बारिश बहुत कम होती है और भूजल का बड़ा हिस्सा खेती लायक नहीं माना जाता। ऐसे में वर्षा जल संचयन के गड्ढे और ड्रिप सिंचाई का साथ में इस्तेमाल पानी की एक-एक बूंद का सदुपयोग सुनिश्चित करता है, जिससे परंपरागत सिंचाई के मुकाबले काफी कम पानी में ज्यादा उत्पादन लिया जा सकता है।
पारंपरिक रूप से इस इलाके के किसान बाजरा, चना और मोठ जैसी कम पानी वाली फसलों पर निर्भर रहते आए हैं, जिनसे आय सीमित रहती है। मुकेश गर्वा का अनुभव दिखाता है कि सही तकनीक अपनाकर रेगिस्तानी इलाकों में भी ऊंची कीमत वाली सब्जियों की व्यावसायिक खेती संभव है, जो आने वाले समय में क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए एक व्यवहारिक विकल्प बन सकती है।
शुरुआती दौर में सीमित पूंजी और नई तकनीक को लेकर अनिश्चितता के चलते जोखिम जरूर रहा, लेकिन धीरे-धीरे मिली सफलता ने साबित किया कि रेगिस्तानी इलाके में भी धैर्य और सही तकनीक के साथ खेती को मुनाफे का व्यवसाय बनाया जा सकता है।
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