MP Weather: मध्यप्रदेश के रीवा-जबलपुर समेत इन जिलों में बरसेंगे बादल, मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी
10 जून 2026, भोपाल: MP Weather: मध्यप्रदेश के रीवा-जबलपुर समेत इन जिलों में बरसेंगे बादल, मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी – भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार मध्य प्रदेश में मंगलवार को मौसम के दो अलग-अलग रंग देखने को मिले। एक ओर छतरपुर जिले के खजुराहो में 46 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ भीषण लू का असर रहा, वहीं दूसरी ओर रीवा, जबलपुर, शहडोल और सागर संभाग के कई जिलों में बारिश, आंधी और गरज-चमक की गतिविधियां दर्ज की गईं। जबलपुर और दमोह जिलों में ओलावृष्टि भी हुई, जबकि कई क्षेत्रों में तेज हवाओं ने मौसम का मिजाज बदल दिया।
पिछले 24 घंटों के दौरान रीवा संभाग के जिलों में अनेक स्थानों पर बारिश हुई, जबकि चंबल, जबलपुर, शहडोल और सागर संभाग के कुछ इलाकों में भी वर्षा दर्ज की गई। शेष संभागों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क बना रहा। जबलपुर में सबसे तेज 74 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं, जबकि सीधी में 68 और सागर में 59 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार दर्ज की गई।
खजुराहो सबसे गर्म, पचमढ़ी सबसे ठंडा
प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान खजुराहो (छतरपुर) में 46.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके बाद दतिया में 44 डिग्री, राजगढ़, रीवा और टीकमगढ़ में 43 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।
वहीं सबसे कम अधिकतम तापमान पचमढ़ी में 35.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान की बात करें तो प्रदेश में सबसे कम तापमान पचमढ़ी (नर्मदापुरम) में 18.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि सबसे अधिक न्यूनतम तापमान सतना में 30 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।
बारिश, आंधी और ओलावृष्टि का असर
बीते 24 घंटों में जबलपुर जिले के शाहपुरा में 29.3 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि पाटन में 15.8 मिमी, कुरई में 15 मिमी, सीधी में 14.6 मिमी और बक्सवाहा में 14.2 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।
भिंड, दतिया, मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी, सागर, जबलपुर, छतरपुर, छिंदवाड़ा, रीवा, सीधी, सिंगरौली, दमोह, कटनी, मंडला, नरसिंहपुर, सतना और मऊगंज जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश हुई। जबलपुर और दमोह में ओलावृष्टि दर्ज की गई, जबकि सिंगरौली और नरसिंहपुर में धूलभरी आंधी चली।
सिनॉप्टिक मौसम परिस्थिति: क्यों बदल रहा है मौसम?
IMD के अनुसार देशभर में सक्रिय कई मौसम प्रणालियां मध्य प्रदेश के मौसम को प्रभावित कर रही हैं। मानसून की उत्तरी सीमा वर्तमान में हरनाई, सोलापुर, कलबुर्गी, नंद्याल, चेन्नई, सिलिगुड़ी और पूर्वोत्तर भारत के हिस्सों से होकर गुजर रही है। अगले 3 से 4 दिनों के दौरान मानसून के महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और ओडिशा के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ने की संभावना है।
मौसम विभाग के अनुसार पंजाब से लेकर गंगीय पश्चिम बंगाल तक एक मौसमी ट्रफ सक्रिय है। इसके अलावा उत्तर-पश्चिम और पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण बने हुए हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश से छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश होते हुए विदर्भ तक एक ट्रफ रेखा भी सक्रिय है, जो प्रदेश में नमी पहुंचा रही है।
वहीं मध्य क्षोभमंडल में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ भी मौसम को प्रभावित कर रहा है। इन सभी प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक, तेज हवाएं और बारिश की गतिविधियां देखने को मिल रही हैं।
चेतावनी: इन जिलों में तेज आंधी और बिजली गिरने का खतरा
IMD ने उमरिया, कटनी और जबलपुर जिलों के लिए गरज-चमक, वज्रपात और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की है।
इसके अलावा नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगौन, बड़वानी, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, अनूपपुर, शहडोल, डिंडोरी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, पन्ना, दमोह, मैहर और पांढुर्णा जिलों में भी गरज-चमक, वज्रपात तथा 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी है।
किसानों के लिए विशेष सलाह
मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि बारिश और गरज-चमक की संभावना को देखते हुए फिलहाल सिंचाई, उर्वरक उपयोग और कीटनाशक छिड़काव जैसे कार्य टाल दें। खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें ताकि जलभराव से फसलों की जड़ों को नुकसान न पहुंचे।
तेज हवाओं से बचाव के लिए सब्जी फसलों, बेलदार पौधों और युवा फलदार वृक्षों को सहारा दें। कटाई की गई उपज, बीज, उर्वरक और कृषि उपकरणों को सुरक्षित स्थान पर रखें तथा तिरपाल से ढंककर सुरक्षित करें।
मौसम विभाग ने किसानों को यह भी सलाह दी है कि आंधी, बारिश या बिजली चमकने के दौरान खुले खेतों में काम न करें। पशुओं को सुरक्षित और हवादार स्थानों पर रखें तथा पर्याप्त चारे और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था बनाए रखें। ओलावृष्टि या बारिश के बाद फसलों का निरीक्षण कर आवश्यक पौध संरक्षण उपाय अपनाने की भी सलाह दी गई है।
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