Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राज्य कृषि समाचार (State News)

ओडिशा में गन्ने पर मिलीबग-स्केल कीट का खतरा, मौसम केंद्र ने बताई दवा व मात्रा

31 अक्टूबर 2026, बालेश्वर (ओडिशा): ओडिशा में गन्ने पर मिलीबग-स्केल कीट का खतरा, मौसम केंद्र ने बताई दवा व मात्रा – मौसम विज्ञान केंद्र, भुवनेश्वर की ताज़ा कृषि-मौसम सलाह के मुताबिक बालेश्वर, भद्रक और जाजपुर जिलों में गन्ने की बढ़वार अवस्था में मिलीबग और स्केल कीट का प्रकोप बढ़ने का खतरा है। मौजूदा मौसम की स्थिति इन कीटों के फैलने के लिए अनुकूल बताई गई है।

27 अक्टूबर को जारी हुई इस एडवाइजरी में किसानों को 28 अक्टूबर से 1 नवंबर तक के लिए सलाह दी गई है। यह एडवाइजरी भारत मौसम विज्ञान विभाग की ग्रामीण कृषि मौसम सेवा योजना के तहत AMFU रणीताल केंद्र ने जारी की है, जो इस इलाके के किसानों को हर हफ्ते मौसम आधारित खेती सलाह देता है।

थायामेथोक्सम व लैम्ब्डा-साइहेलोथ्रिन से नियंत्रण

मिलीबग व स्केल कीट पर नियंत्रण के लिए किसानों को थायामेथोक्सम कीटनाशक का 80 ग्राम प्रति एकड़ की मात्रा में छिड़काव करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा लैम्ब्डा-साइहेलोथ्रिन 4.9% CS का 250 मिलीलीटर प्रति एकड़ की मात्रा में भी छिड़काव किया जा सकता है।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

कीट विशेषज्ञों के मुताबिक मिलीबग व स्केल कीट गन्ने के तने व पत्तियों से रस चूसते हैं, जिससे पौधे की बढ़वार रुक जाती है और उपज के साथ-साथ गन्ने में चीनी की मात्रा पर भी असर पड़ सकता है। समय पर छिड़काव न करने पर यह कीट पूरे खेत में तेजी से फैल सकता है, क्योंकि मिलीबग की मादा बहुत कम समय में बड़ी संख्या में अंडे देती है।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

बारिश के बाद बढ़ी नमी और मौजूदा तापमान की स्थिति को इस प्रकोप के पीछे बड़ी वजह बताया गया है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेत का नियमित निरीक्षण करें, खासकर गन्ने की गांठों और पत्तियों के नीचे का हिस्सा ध्यान से देखें, जहां यह कीट छिपकर पलता है।

एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि छिड़काव सुबह या शाम के समय करना बेहतर रहता है, जब तेज धूप नहीं होती, ताकि दवा का असर ज्यादा समय तक बना रहे। खेत में जल निकासी की व्यवस्था ठीक रखने और खरपतवार हटाने से भी कीट के फैलने की रफ्तार कम होती है, क्योंकि खरपतवार कई बार मिलीबग के लिए अतिरिक्त आश्रय का काम करते हैं।

ओडिशा के गन्ना उत्पादक जिलों में किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने इलाके के कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क करके ही दवा की सही मात्रा और छिड़काव का तरीका तय करें, ताकि नुकसान को समय रहते रोका जा सके।

मिलीबग व स्केल कीट का असर सिर्फ उपज की मात्रा पर ही नहीं, बल्कि गन्ने से निकलने वाले रस की गुणवत्ता और चीनी मिलों तक पहुंचने वाली फसल की ताजगी पर भी पड़ता है। इसी वजह से गन्ना पेराई सीजन से पहले इस तरह की सलाह को किसानों के लिए खास अहमियत वाला माना जाता है।

रासायनिक दवाओं के साथ-साथ किसान खेत में परजीवी कीटों और लेडीबर्ड बीटल जैसे प्राकृतिक शत्रु कीटों को बचाकर भी मिलीबग की संख्या को नियंत्रण में रख सकते हैं, क्योंकि यह कीट मिलीबग को खाकर उसकी संख्या घटाने में मदद करते हैं। खेत की नियमित साफ-सफाई और सूखी पत्तियों को हटाना भी इस कीट के प्रकोप को कम करने में मदद करता है।

एडवाइजरी में यह भी बताया गया है कि प्रभावित पौधों की पहचान होने पर पहले उस हिस्से को अलग कर देना चाहिए, ताकि कीट बाकी खेत में न फैल सके। इससे दवा की जरूरत भी कम पड़ती है और छिड़काव का खर्च भी नियंत्रण में रहता है।

ओडिशा में गन्ने की खेती कई जिलों के छोटे व मझोले किसानों की आमदनी का अहम जरिया है, और पेराई सीजन के ठीक पहले किसी भी कीट प्रकोप से निपटने में देरी का असर सीधे किसानों की कमाई पर पड़ सकता है। इसलिए मौसम विज्ञान केंद्र जैसी संस्थाओं की नियमित सलाह किसानों के लिए समय पर सही फैसला लेने में मदद करती है।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture