आंध्र प्रदेश में मूंगफली की फली बनने की अवस्था में स्पोडोप्टेरा सुंडी का खतरा, कृषि विभाग ने दी दवा की सलाह
31 अक्टूबर 2026, अनंतपुर (आंध्र प्रदेश): आंध्र प्रदेश में मूंगफली की फली बनने की अवस्था में स्पोडोप्टेरा सुंडी का खतरा, कृषि विभाग ने दी दवा की सलाह – राज्य कृषि-मौसम सेवा केंद्र, अमरावती की ताज़ा सलाह के अनुसार अनंतपुर, कुरनूल और नंदयाल जिलों में मूंगफली की फली बनने की अवस्था में स्पोडोप्टेरा यानी तोबैको कैटरपिलर सुंडी का प्रकोप बढ़ सकता है। यह एडवाइजरी 27 अक्टूबर को जारी हुई और 28 अक्टूबर से 1 नवंबर तक के लिए प्रभावी है।
यह सलाह AMFU अनंतपुरमु केंद्र ने भारत मौसम विज्ञान विभाग की ग्रामीण कृषि मौसम सेवा योजना के तहत जारी की है। मौजूदा मौसम की स्थिति इस सुंडी के प्रकोप के लिए अनुकूल बताई गई है, क्योंकि फली बनने की अवस्था में पौधे की पत्तियां और नई कलियां सुंडी के लिए आसान भोजन बन जाती हैं।
सुंडी की अवस्था के अनुसार अलग-अलग दवा
एडवाइजरी में सुंडी की उम्र के हिसाब से दो तरह की सलाह दी गई है। अंडे या शुरुआती यानी छोटी अवस्था की सुंडी के लिए किसानों को क्विनालफॉस कीटनाशक का 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी, नीम तेल 5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के साथ मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
वहीं बड़ी या ज्यादा विकसित सुंडी के लिए नोवालुरॉन 1 मिलीलीटर प्रति लीटर और क्लोरफेनापायर 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक सुंडी की अवस्था बदलने के साथ दवा की असर करने की क्षमता भी बदल जाती है, इसलिए खेत में सुंडी की सही अवस्था पहचानना जरूरी है।
स्पोडोप्टेरा सुंडी मूंगफली के पत्तों और फली बनने की अवस्था में सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। यह सुंडी रात में ज्यादा सक्रिय रहती है और समूह में पौधों की पत्तियां खा जाती है, जिससे पौधे की बढ़वार प्रभावित होती है और फली भरने की प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है।
किसानों को सलाह दी गई है कि वे सुबह या शाम के समय खेत का निरीक्षण करें, क्योंकि इस समय सुंडी पत्तियों पर ज्यादा दिखाई देती है। छिड़काव करते समय पौधे के निचले हिस्से और पत्तियों के नीचे की तरफ भी दवा पहुंचे, इसका खास ध्यान रखने को कहा गया है, क्योंकि सुंडी अक्सर पत्तियों के नीचे छिपी रहती है।
रायलसीमा क्षेत्र के मूंगफली उत्पादक इस समय फली बनने की अहम अवस्था से गुजर रहे हैं, इसलिए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सुझाव दिया है कि वे किसी भी तरह के प्रकोप के शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी कृषि अधिकारी या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें, ताकि सही समय पर उपचार हो सके और उपज को नुकसान से बचाया जा सके।
आंध्र प्रदेश देश के प्रमुख मूंगफली उत्पादक राज्यों में शामिल है, और अनंतपुर जिला राज्य के सबसे बड़े मूंगफली उत्पादक इलाकों में से एक माना जाता है। फली बनने की अवस्था में किसी भी तरह का कीट प्रकोप सीधे उपज और खाने योग्य तेल उत्पादन दोनों पर असर डाल सकता है, इसलिए इस दौर में फसल की निगरानी बेहद जरूरी हो जाती है।
कीट विशेषज्ञ किसानों को सलाह देते हैं कि वे खेत में पीले या प्रकाश वाले फेरोमोन ट्रैप लगाकर भी सुंडी की मौजूदगी का समय रहते पता लगा सकते हैं। इससे किसान को यह अंदाजा मिल जाता है कि कीटनाशक का छिड़काव कब शुरू करना है, जिससे दवा का इस्तेमाल सही समय पर और सही मात्रा में किया जा सकता है।
खेत में परजीवी कीटों और पक्षियों को बचाए रखने से भी सुंडी की संख्या स्वाभाविक रूप से नियंत्रण में रहती है। कृषि विभाग का कहना है कि रासायनिक छिड़काव का सहारा तभी लेना चाहिए जब सुंडी की संख्या खेत में तय सीमा से ज्यादा दिखाई दे, ताकि फसल के लाभकारी कीटों को अनावश्यक नुकसान न पहुंचे।
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