e-Samyukti और e-Samriddhi: डिजिटल मंच से किसानों के खाते में सीधे पहुंच रहा MSP का पैसा
31 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: e-Samyukti और e-Samriddhi: डिजिटल मंच से किसानों के खाते में सीधे पहुंच रहा MSP का पैसा – केंद्र सरकार के फसल खरीद से जुड़े दो डिजिटल मंच किसानों को बिचौलियों के बिना सीधे उनके बैंक खाते में भुगतान पहुंचा रहे हैं। एक आधिकारिक दस्तावेज़ के मुताबिक 19 अक्टूबर तक e-Samyukti प्लेटफॉर्म के जरिए 43 लाख से ज्यादा किसानों की 37.45 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा उपज खरीदी जा चुकी है और उनके खातों में 13,000 करोड़ रुपये से ज्यादा सीधे जमा हुए हैं।
वहीं e-Samriddhi प्लेटफॉर्म पर 1.37 करोड़ से ज्यादा किसान पंजीकृत हो चुके हैं। इस मंच के जरिए 2.25 करोड़ से ज्यादा इकाई उपज की खरीद हुई है और 81 लाख से ज्यादा किसानों को भुगतान किया जा चुका है। यह दोनों मंच गेहूं, जौ, चना, मसूर, सरसों और कुसुम की सरकारी खरीद से जुड़े हैं, जिन पर किसानों को हर साल न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी मिलती है।
पंजीयन से लेकर भुगतान तक पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन
इन दोनों मंचों पर किसान अपनी फसल बेचने के लिए पहले ऑनलाइन पंजीयन कराते हैं, फिर तय मंडी या खरीद केंद्र पर अपनी उपज जमा करते हैं। इसके बाद तुलाई और गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया पूरी होने पर MSP की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए भेज दी जाती है।
पहले मंडियों में उपज बेचने के बाद किसानों को भुगतान के लिए अक्सर कई दिन इंतजार करना पड़ता था, या बिचौलियों के जरिए बेचने पर उन्हें MSP से कम कीमत मिलती थी। डिजिटल मंच से यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बन गई है, क्योंकि किसान ऑनलाइन अपने भुगतान की स्थिति खुद देख सकते हैं।
दस्तावेज़ में कहा गया है कि मूल्य आश्वासन, खरीद के दायरे में बढ़ोतरी और तकनीक के इस्तेमाल से किसानों की बाजार तक पहुंच मजबूत हो रही है। इससे फसल बिकने के बाद पैसे के लंबे इंतजार या कमीशन कटने जैसी शिकायतें कम हुई हैं।
मंडी स्तर पर भी दिख रहा असर
कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जिन राज्यों में e-Samyukti और e-Samriddhi जैसे मंच पूरी तरह लागू हो चुके हैं, वहां खरीद केंद्रों पर किसानों की लाइन में लगने की समस्या भी कम हुई है, क्योंकि पंजीयन और स्लॉट बुकिंग पहले से ऑनलाइन हो जाती है। इससे किसान तय समय पर ही अपनी उपज लेकर खरीद केंद्र पहुंच पाते हैं।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जितने ज्यादा किसान इस तरह के डिजिटल मंच से जुड़ेंगे, उतनी ही तेजी से उन्हें फसल का पैसा मिल सकेगा, खासकर रबी सीजन की कटाई के बाद जब किसानों को बुवाई और घरेलू खर्च के लिए नकदी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। छोटे व मझोले किसानों के लिए यह सुविधा खासतौर पर फायदेमंद मानी जा रही है, क्योंकि उनके पास भुगतान में देरी झेलने की गुंजाइश कम होती है।
राज्य कृषि विभागों को भी इन प्लेटफॉर्म से यह फायदा मिल रहा है कि उन्हें खरीद और भुगतान का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में मिल जाता है, जिससे योजना बनाने और अगले सीजन की तैयारी करने में आसानी होती है।
सरकार पिछले कुछ वर्षों से कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर खासतौर से जोर दे रही है, ताकि खरीद से जुड़ी हर प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाया जा सके। e-Samyukti और e-Samriddhi जैसे मंच इसी दिशा में बढ़ाए गए कदमों का हिस्सा हैं।
ऑनलाइन पंजीयन की वजह से किसानों को अब मंडी या खरीद केंद्र पर बार-बार जाकर अपनी उपज बेचने की स्लॉट बुक नहीं करानी पड़ती, क्योंकि यह जानकारी पहले ही सिस्टम में दर्ज हो जाती है। इससे किसानों का समय और आने-जाने का खर्च दोनों बचता है, खासकर उन किसानों के लिए जिनके गांव खरीद केंद्र से दूर हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि आगे आने वाले सीजन में अगर इन डिजिटल मंचों से जुड़ने वाले किसानों की संख्या और बढ़ती है, तो मंडी स्तर पर भुगतान में देरी की शिकायतें और भी कम हो सकती हैं, जिससे खरीद प्रक्रिया पर किसानों का भरोसा और मजबूत होगा।
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