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राज्य कृषि समाचार (State News)

पंजाब के किसान ने फूलगोभी-टमाटर-बासमती की तिकड़ी से 20 एकड़ में बनाया मुनाफे का मॉडल

31 अक्टूबर 2026, मोगा (पंजाब): पंजाब के किसान ने फूलगोभी-टमाटर-बासमती की तिकड़ी से 20 एकड़ में बनाया मुनाफे का मॉडल – पंजाब के मोगा जिले के किसान गुरमीत सिंह ने परंपरागत गेहूं-धान की खेती के साथ-साथ फूलगोभी, टमाटर और कम अवधि वाली बासमती धान की तिकड़ी अपनाई, और उनकी खेती 2.5 एकड़ से शुरू होकर आज 20 एकड़ तक पहुंच गई है।

सर्दियों में वे हाइब्रिड फूलगोभी की स्नोबॉल, गिरिराज और पूसा मेघना जैसी किस्में उगाते हैं, जिससे प्रति एकड़ करीब 1.5 लाख रुपये तक की कमाई हो जाती है। गर्मियों में रानी, योगी और उपहार किस्मों के हाइब्रिड टमाटर से उन्हें प्रति एकड़ 1 से 2 लाख रुपये मिलते हैं।

फसल विविधता बनी नुकसान से बचाव का जरिया

खरीफ सीजन में गुरमीत सिंह पूसा 1509 और PB-1121 जैसी कम अवधि वाली बासमती किस्मों की खेती करते हैं, जो करीब 110 दिन में पककर तैयार हो जाती हैं और प्रति एकड़ 50,000 से 70,000 रुपये की आमदनी देती हैं। तीनों फसलों को मिलाकर उन्हें प्रति एकड़ सालाना 2 से 3 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा हो रहा है।

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गुरमीत सिंह बताते हैं कि फसल विविधता किसान के लिए सबसे बड़ा बीमा साबित होती है। साल 2023-24 में ओलावृष्टि से उनकी टमाटर की फसल खराब हो गई थी, लेकिन उसी दौरान फूलगोभी और बासमती से हुई कमाई ने उन्हें नुकसान की भरपाई करने में मदद की।

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एक ही खेत में अलग-अलग मौसम की फसलें लगाने से साल भर कोई न कोई फसल कटाई या बिक्री के लिए तैयार रहती है, जिससे नकदी प्रवाह लगातार बना रहता है। इससे किसान को पूरे साल की आमदनी किसी एक फसल के भाव पर निर्भर नहीं रहती।

वे आगे ड्रिप सिंचाई अपनाने और रंगीन शिमला मिर्च जैसी उच्च मूल्य वाली सब्जियों की खेती शुरू करने की योजना बना रहे हैं, ताकि पानी की बचत के साथ कमाई को और बढ़ाया जा सके। गुरमीत सिंह का कहना है कि सब्जियों की खेती में मेहनत ज्यादा लगती है, लेकिन बाजार में सही समय पर उपज पहुंचाने पर गेहूं-धान के मुकाबले कहीं ज्यादा मुनाफा मिल जाता है।

इलाके के अन्य किसान भी अब उनसे हाइब्रिड सब्जियों की खेती और मंडी तक उपज पहुंचाने के तरीकों के बारे में सलाह लेने लगे हैं, जिससे धीरे-धीरे क्षेत्र में परंपरागत खेती से सब्जी व फल आधारित खेती की ओर रुझान बढ़ रहा है।

पंजाब में दशकों से गेहूं-धान का चक्र चलने की वजह से भूजल स्तर लगातार गिरता रहा है, और कृषि विशेषज्ञ लंबे समय से किसानों को कम पानी मांगने वाली सब्जियों व बागवानी फसलों की तरफ रुख करने की सलाह देते रहे हैं। गुरमीत सिंह जैसे किसान इसी बदलाव की मिसाल बनकर सामने आए हैं।

सब्जियों की खेती में निवेश और मेहनत दोनों ज्यादा लगते हैं, क्योंकि बीज, खाद और सिंचाई के साथ कीट-रोग प्रबंधन पर भी बराबर ध्यान देना पड़ता है। लेकिन मंडी में सही समय पर और सही गुणवत्ता की उपज पहुंचाने पर किसान को गेहूं-धान के मुकाबले प्रति एकड़ कई गुना ज्यादा कमाई मिल जाती है, जैसा गुरमीत सिंह के अनुभव में भी देखने को मिला है।

अपनी जमीन का एक हिस्सा अब भी परंपरागत फसलों के लिए रखकर गुरमीत सिंह ने जोखिम को पूरी तरह सब्जियों पर नहीं डाला है, बल्कि गेहूं-धान, सब्जी और बासमती के बीच संतुलन बनाकर एक मजबूत और स्थिर खेती का मॉडल तैयार किया है।

हाइब्रिड किस्मों का चुनाव करते समय वे बाजार की मांग और मंडी तक पहुंचने की दूरी दोनों का ध्यान रखते हैं, क्योंकि फूलगोभी और टमाटर जैसी सब्जियां जल्दी खराब होने वाली फसलें हैं। समय पर तुड़ाई और सही तापमान में भंडारण न होने पर मुनाफे का बड़ा हिस्सा नुकसान में बदल सकता है।

गुरमीत सिंह जैसे किसानों के अनुभव से यह भी पता चलता है कि सब्जी और बासमती जैसी नकदी फसलों की खेती के लिए बाजार से जुड़ी जानकारी और सही समय पर फैसला लेना परंपरागत फसलों की तुलना में कहीं ज्यादा जरूरी हो जाता है।

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