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राज्य कृषि समाचार (State News)

राजगढ़ के किसान ने बायोफ्लॉक तकनीक से बदली किस्मत, अब सालाना 10 लाख रुपए का हो रहा मछली उत्पादन

31 अक्टूबर 2026, राजगढ़: राजगढ़ के किसान ने बायोफ्लॉक तकनीक से बदली किस्मत, अब सालाना 10 लाख रुपए का हो रहा मछली उत्पादन – कहते हैं कि मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन से कठिन परिस्थितियों में भी सफलता की नई राह बनाई जा सकती है। मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के ग्राम गिंदौरमीणा के किसान देवबगस दांगी ने आधुनिक तकनीक को अपनाकर इसे साकार किया है। कभी रोजगार की तलाश में भटकने वाले देवबगस आज वैज्ञानिक पद्धति से मत्स्य पालन कर अपनी आजीविका को सशक्त बना रहे हैं। उन्होंने पौण्ड बायोफ्लॉक तकनीक के माध्यम से मत्स्य पालन को व्यवसाय के रूप में विकसित किया है और अब प्रतिवर्ष लगभग 10 लाख रुपये मूल्य की मछली का उत्पादन कर रहे हैं। उनकी यह सफलता ग्रामीण क्षेत्र में स्वरोजगार, आधुनिक तकनीक और शासकीय योजनाओं के प्रभावी उपयोग की प्रेरक मिसाल है।

शासकीय योजना से मिला आर्थिक संबल, स्वरोजगार को मिली नई दिशा

किसान देवबगस दांगी बताते हैं कि रोजगार की तलाश के दौरान उनकी मुलाकात मत्स्य विभाग के अधिकारियों से हुई। अधिकारियों ने उन्हें मत्स्य पालन की संभावनाओं, आधुनिक पौण्ड बायोफ्लॉक तकनीक और शासन की योजनाओं की जानकारी दी। मार्गदर्शन से प्रेरित होकर उन्होंने मत्स्य पालन शुरू करने का निर्णय लिया। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत उन्हें 11.20 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ, जिससे व्यवसाय की स्थापना में आर्थिक सहयोग मिला। प्रारंभिक दौर में उन्हें कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन निरंतर प्रयास, अनुभव और आधुनिक तकनीक के उपयोग से उन्होंने अपने कार्य को आगे बढ़ाया। आज वे प्रतिवर्ष लगभग 10 लाख रुपये मूल्य की मछली का उत्पादन कर रहे हैं। इस पहल से उन्हें स्वरोजगार का स्थायी अवसर मिला है और स्थानीय स्तर पर अन्य लोगों के लिए भी रोजगार की संभावनाएं विकसित हुई हैं।

28 लाख रुपये की लागत से स्थापित कीं दो यूनिट, 21 हजार फिंगरलिंग की संयुक्त क्षमता

किसान देवबगस दांगी ने कुल 28 लाख रुपये की लागत से मत्स्य पालन की दो यूनिट स्थापित की हैं। इन दोनों यूनिट की संयुक्त क्षमता 21 हजार फिंगरलिंग की है। उन्होंने दोनों यूनिट में 10,500 फिंगरलिंग का संचयन कर गहन मत्स्य पालन की शुरुआत की। आधुनिक तकनीक के उपयोग से वे सीमित संसाधनों में मत्स्य उत्पादन को व्यवस्थित और प्रभावी ढंग से संचालित कर रहे हैं। पौण्ड बायोफ्लॉक तकनीक में उपयोगी सूक्ष्मजीवों एवं प्रोबायोटिक की सहायता से जैविक अपशिष्ट के प्रबंधन और पानी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है। इससे मत्स्य पालन की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से संचालित करने में सहायता मिलती है।

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आधुनिक तकनीक, मेहनत और सही मार्गदर्शन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

किसान देवबगस दांगी की सफलता की कहानी बताती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी आधुनिक तकनीक और शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर स्वरोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं। मत्स्य पालन के क्षेत्र में उनकी पहल अन्य किसानों और युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि सही मार्गदर्शन, निरंतर मेहनत और नई तकनीक अपनाने का संकल्प हो, तो रोजगार की तलाश कर रहा व्यक्ति भी स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

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