राज्य कृषि समाचार (State News)

अच्छी बारिश का उठाएं पूरा लाभ, कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को जारी की खरीफ सीजन की एडवाइजरी

08 जुलाई 2026, रायपुर: अच्छी बारिश का उठाएं पूरा लाभ, कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को जारी की खरीफ सीजन की एडवाइजरी – छत्तीसगढ़ में हाल के दिनों में हुई अच्छी वर्षा को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) ने किसानों के लिए खरीफ सीजन की एडवाइजरी जारी की है। केंद्र ने किसानों से अपील की है कि खेतों में उपलब्ध पर्याप्त नमी का लाभ उठाते हुए खरीफ मौसम से जुड़े सभी कृषि कार्य समय पर पूरे करें, ताकि फसलों का बेहतर विकास हो और उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित की जा सके।

कृषि विज्ञान केंद्र के अनुसार जिन किसानों की धान की नर्सरी तैयार हो चुकी है, वे खेतों में पर्याप्त नमी का लाभ उठाकर जल्द रोपाई शुरू करें। धान की रोपाई कतार पद्धति से करने, 20 से 21 दिन की पौध लगाने तथा अनुशंसित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। इससे पौधों की संख्या संतुलित रहेगी, खरपतवार नियंत्रण आसान होगा और उपज में वृद्धि होगी।

जिन किसानों ने अभी तक धान की बुवाई नहीं की है, उन्हें वर्तमान मौसम को देखते हुए मिट्टी में पर्याप्त नमी होने पर लेही विधि से बुवाई करने की सलाह दी गई है। साथ ही प्रमाणित या आधार श्रेणी के बीजों का एजोस्पाइरिलम एवं पीएसबी कल्चर से बीजोपचार करने, संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करने तथा समय पर नाइट्रोजन का छिड़काव करने पर जोर दिया गया है।

कृषि विशेषज्ञों ने धान और मक्का की फसलों में अंकुरण पूर्व एवं अंकुरण पश्चात खरपतवारनाशी के उपयोग की सलाह दी है। वहीं मक्का की फसल में समय-समय पर निराई-गुड़ाई और मिट्टी चढ़ाने का कार्य करने को भी कहा गया है। इसके अलावा 10 से 15 दिन बाद अरहर, उड़द और मूंग जैसी कम अवधि वाली दलहनी फसलों के साथ तिल और मूंगफली जैसी तिलहनी फसलों की अनुशंसित बीज दर, कतार दूरी और बीजोपचार के साथ बुवाई करने की सलाह दी गई है। किसानों से मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने का आग्रह किया गया है।

एडवाइजरी में खरीफ मौसम की सब्जियों की खेती पर भी विशेष जोर दिया गया है। किसानों से लौकी, कद्दू, करेला, तोरई, भिंडी, बरबटी, मिर्च और बैंगन जैसी मौसमी सब्जियों की समय पर बुवाई करने को कहा गया है। वहीं तैयार नर्सरी वाले मिर्च, बैंगन और फूलगोभी के पौधों की रोपाई शुरू करने की सलाह दी गई है। अदरक, हल्दी, भिंडी और बरबटी की फसलों में नियमित निराई-गुड़ाई करने तथा अधिक वर्षा होने पर खेतों से जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी बात कही गई है।

कृषि विज्ञान केंद्र ने वर्तमान समय को आम, अमरूद, नींबू, कटहल, सहजन और केले जैसे फलदार पौधों के रोपण के लिए भी उपयुक्त बताया है। पौधरोपण के समय अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद और अनुशंसित उर्वरकों का उपयोग करने तथा पौधों की नियमित देखभाल करने की सलाह दी गई है।

केंद्र ने वर्षा जल संरक्षण पर भी विशेष बल दिया है। किसानों से खेतों की मेड़ों को मजबूत रखने, खेत तालाब, डबरी, मेड़बंदी और अन्य जल संचयन संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल का अधिकतम संरक्षण करने की अपील की गई है। साथ ही संरक्षित पानी का उपयोग वर्षा के अंतराल के दौरान सिंचाई के लिए करने तथा खेतों में नमी बनाए रखने के लिए उचित जल प्रबंधन और मल्चिंग तकनीक अपनाने की सलाह दी गई है।

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