राज्य कृषि समाचार (State News)

राजस्थान के किसानों को बड़ी राहत: खेत तलाई और सिंचाई पाइपलाइन अनुदान योजना के नियमों में बदलाव

16 जुलाई 2026, जयपुर: राजस्थान के किसानों को बड़ी राहत: खेत तलाई और सिंचाई पाइपलाइन अनुदान योजना के नियमों में बदलाव – राजस्थान सरकार ने किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए फार्म पॉन्ड (खेत तलाई) एवं सिंचाई पाइपलाइन अनुदान योजना के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए प्रावधान के अनुसार अब किसानों को अनुदान प्राप्त करने के लिए कृषि विभाग में पंजीकृत फर्म से ही सामग्री खरीदना अनिवार्य नहीं होगा।

सरकार के इस फैसले से किसानों को अपनी आवश्यकता और बजट के अनुसार किसी भी विश्वसनीय विक्रेता से सामग्री खरीदने की स्वतंत्रता मिलेगी। इससे उन्हें बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध हो सकेंगे और योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से मिल सकेगा।

राज्य सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे किसानों को गुणवत्ता और कीमत—दोनों के बेहतर विकल्प मिलेंगे। साथ ही अनुदान योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और सुविधा भी बढ़ेगी।

फार्म पॉन्ड (खेत तलाई) योजना का उद्देश्य वर्षा जल का संरक्षण कर सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराना है, जबकि सिंचाई पाइपलाइन अनुदान योजना के माध्यम से खेतों तक पानी की आपूर्ति को अधिक दक्ष बनाया जाता है। इन योजनाओं से जल संरक्षण को बढ़ावा मिलने के साथ सिंचाई लागत में कमी आती है और फसल उत्पादन में सुधार होता है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के इस निर्णय से किसानों को सामग्री खरीदने में अधिक विकल्प मिलेंगे, जिससे वे अपनी जरूरत और आर्थिक क्षमता के अनुरूप बेहतर उत्पाद चुन सकेंगे। इससे कृषि योजनाओं का लाभ अधिक किसानों तक पहुंचने और खेती को लाभकारी बनाने में मदद मिलेगी।

किन शर्तों का पालन करना होगा?

कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि अनुदान का लाभ लेने के लिए किसानों को कुछ आवश्यक दस्तावेज और प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे. सामग्री खरीदते समय वैध बीआईएस लाइसेंस, सीएमएल (CML) नंबर, जीएसटी बिल और स्टॉक एंट्री की प्रति देना अनिवार्य होगा. इसके अलावा किसान और निर्माता कंपनी, अधिकृत विक्रेता अथवा डीलर के बीच 500 रुपये के स्टांप पेपर पर अनुबंध भी जमा करना होगा. खरीदी गई सामग्री पर चालू वित्तीय वर्ष का निर्माण वर्ष अंकित होना भी जरूरी रहेगा.

नई व्यवस्था में तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा. कृषि विभाग के अधिकारी और कृषि पर्यवेक्षक मौके पर निरीक्षण के दौरान BIS CARE ऐप के माध्यम से सामग्री की गुणवत्ता और प्रमाणिकता की जांच करेंगे. साथ ही अधिकारी उत्पाद पर अंकित सीएमएल नंबर दर्ज कर उसका लाइसेंस सत्यापित करेंगे. आवश्यकता पड़ने पर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के ऑनलाइन पोर्टल से भी प्रमाणिकता की पुष्टि की जाएगी. इससे नकली उत्पादों के उपयोग पर रोक लगेगी और किसानों को भरोसेमंद सामग्री मिलेगी.

कितना अनुदान?

राजस्थान सरकार जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए खेत तलाई योजना के तहत किसानों को भारी अनुदान उपलब्ध करा रही है, जो कुछ इस प्रकार है-

प्लास्टिक लाइनिंग वाले फार्म पॉन्ड पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और लघु एवं सीमांत किसानों को 90 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा 1.35 लाख रुपये है.

वहीं सामान्य वर्ग के किसानों को इस योजना के तहत 80 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा, जिसकी अधिकतम राशि 1 लाख रुपये निर्धारित की गई है.

यदि किसान कच्चे फार्म पॉन्ड का निर्माण कराते हैं तो उन्हें भी श्रेणी के अनुसार 60 से 70 प्रतिशत तक आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी.

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