फसल की खेती (Crop Cultivation)राज्य कृषि समाचार (State News)

बागवानी किसानों को बड़ी राहत! आम, लीची और अमरूद के बगीचों में दवा छिड़काव पर मिलेगी सब्सिडी

25 जुलाई 2026, भोपाल: बागवानी किसानों को बड़ी राहत! आम, लीची और अमरूद के बगीचों में दवा छिड़काव पर मिलेगी सब्सिडी – बिहार सरकार ने बागवानी किसानों को बड़ी राहत देते हुए आम, लीची और अमरूद के बगीचों में कीट एवं रोग प्रबंधन के लिए नई योजना शुरू की है। इस योजना के तहत अब किसानों को कीटनाशी दवाओं के छिड़काव पर सरकारी अनुदान मिलेगा। सरकार का उद्देश्य बागवानी फसलों में कीट और रोगों से होने वाले नुकसान को कम करना, उत्पादन बढ़ाना और किसानों की लागत घटाकर उनकी आय में वृद्धि करना है।

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि राज्य सरकार ने इस वर्ष से “बगीचों में कीट प्रबंधन योजना” लागू की है। इसके तहत आम, लीची और अमरूद के बगीचों में कीट एवं रोगों के वैज्ञानिक, सुरक्षित और समयबद्ध नियंत्रण के लिए दवा छिड़काव पर करीब 75 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा।

तीन प्रमुख फलदार फसलों को मिलेगा लाभ

योजना के तहत अलग-अलग फसलों के लिए अनुदान की राशि तय की गई है। आम के बगीचों में कीट, रोग और फल झड़ने की समस्या के नियंत्रण के लिए पहले छिड़काव पर 57 रुपये प्रति पेड़ तथा दूसरे छिड़काव पर 72 रुपये प्रति पेड़ की दर से 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा।

इसी प्रकार अमरूद के बगीचों में पहले छिड़काव पर 33 रुपये प्रति पेड़ और दूसरे छिड़काव पर 45 रुपये प्रति पेड़ की सहायता मिलेगी। वहीं, लीची के बगीचों के लिए पहले छिड़काव पर 162 रुपये प्रति पेड़ तथा दूसरे छिड़काव पर 114 रुपये प्रति पेड़ का अनुदान निर्धारित किया गया है।

ऑनलाइन आवेदन कर उठा सकेंगे लाभ

कृषि मंत्री ने बताया कि योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसान कृषि विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन स्वीकृत होने के बाद पात्र किसानों को अनुदानित दर पर दवा छिड़काव की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने किसानों से अधिक से अधिक संख्या में इस योजना का लाभ लेने की अपील की।

कीट और रोग नियंत्रण से बढ़ेगा उत्पादन

कृषि मंत्री ने कहा कि बागवानी फसलों में समय पर कीट एवं रोग नियंत्रण नहीं होने से उत्पादन और फलों की गुणवत्ता दोनों प्रभावित होती हैं। नई योजना के माध्यम से किसानों को समय पर वैज्ञानिक तरीके से दवा छिड़काव करने में सहायता मिलेगी। इससे फलों की गुणवत्ता बेहतर होगी, उत्पादन में वृद्धि होगी और बाजार में किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।

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