मध्यप्रदेश: धार की सुनीता धांगड़ ने 1 भैंस से शुरू किया डेयरी व्यवसाय, अब हर माह कमा रहीं डेढ़ लाख रुपए
15 मई 2026, धार: मध्यप्रदेश: धार की सुनीता धांगड़ ने 1 भैंस से शुरू किया डेयरी व्यवसाय, अब हर माह कमा रहीं डेढ़ लाख रुपए – मध्यप्रदेश के धार जिले के उमरबन विकासखंड के ग्राम मलनगांव की निवासी श्रीमती सुनीता धांगड़ ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और स्व-सहायता समूह की मदद से आत्मनिर्भरता की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने ग्रामीण महिलाओं के लिए नई राह खोल दी है। कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाली सुनीता आज सफल डेयरी उद्यमी बनकर हर महीने 1 लाख से 1.5 लाख रुपए तक की आय अर्जित कर रही हैं।
सुनीता का परिवार पहले खेती और सीमित पशुपालन पर निर्भर था, जिससे घर चलाना मुश्किल हो जाता था। वर्ष 2015 में उन्होंने “बाबा रामदेव स्व-सहायता समूह” से जुड़कर अपने जीवन को नई दिशा देने का फैसला किया। समूह से मिले 50 हजार रुपए के ऋण से उन्होंने अपनी पहली भैंस खरीदी और दूध बेचने का काम शुरू किया। यहीं से उनके आत्मनिर्भर बनने की कहानी की शुरुआत हुई।
मुख्यमंत्री योजना से मिला विस्तार और सहयोग
प्रारंभिक सफलता के बाद सुनीता ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का लाभ लिया और 2 लाख रुपए का ऋण प्राप्त कर तीन उच्च नस्ल की भैंसें खरीदीं। सरकारी मार्गदर्शन और योजनाओं की मदद से उन्होंने पशुपालन को व्यवस्थित रूप दिया और आधुनिक शेड का निर्माण भी कराया।
आज उनके पास कुल 10 उच्च नस्ल की भैंसें हैं, जिनसे प्रतिदिन लगभग 80 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। वे स्थानीय बाजार के साथ-साथ बड़ी डेयरी कंपनियों को भी दूध की आपूर्ति कर रही हैं। दूध का बड़ा हिस्सा “अमृत डेयरी” और “मिर्जापुर डेयरी” के माध्यम से टैंकरों द्वारा मुंबई जैसे बड़े शहरों तक पहुंच रहा है।
आधुनिक डेयरी और महिला सशक्तिकरण की मिसाल
सुनीता ने अपने पशुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त शेड तैयार किया है, जिसमें गर्मी से बचाव के लिए फॉगर्स और कूलिंग सिस्टम लगाए गए हैं। वे चाय की दुकानों और घरों में भी सीधे दूध की सप्लाई करती हैं, जिससे उनकी आय के कई स्रोत बन गए हैं।
उनकी इस सफलता में पूरे संयुक्त परिवार का भी महत्वपूर्ण योगदान है, जो पशुओं की देखभाल, दूध दोहन और विपणन में साथ देता है। इससे न केवल संचालन आसान हुआ है, बल्कि व्यवसाय भी तेजी से बढ़ा है।
“लखपति दीदी” अभियान की प्रेरणा बनीं सुनीता
सुनीता धांगड़ की यह यात्रा ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। वे अब भविष्य में अपने डेयरी व्यवसाय का और विस्तार करने की योजना बना रही हैं और अधिक उच्च नस्ल की भैंसें जोड़ने की तैयारी कर रही हैं।
वे अपनी सफलता का श्रेय प्रदेश सरकार की योजनाओं, बैंक ऋण और समय पर मिले मार्गदर्शन को देती हैं। सुनीता का कहना है कि सही दिशा और सरकारी सहयोग मिले तो ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं भी बड़े व्यावसायिक लक्ष्य हासिल कर सकती हैं और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार कर सकती हैं।
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