मध्यप्रदेश: इंटरक्रॉपिंग खेती से पांढुर्ना का किसान हुआ मालामाल, सालाना 9 लाख रुपए तक पहुंची आय
11 मई 2026, भोपाल: मध्यप्रदेश: इंटरक्रॉपिंग खेती से पांढुर्ना का किसान हुआ मालामाल, सालाना 9 लाख रुपए तक पहुंची आय – पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीक और नवाचार को अपनाने का परिणाम अब किसानों की आय में साफ दिखाई देने लगा है। पांढुर्ना क्षेत्र के एक किसान ने इंटरक्रॉपिंग (अंतरवर्तीय खेती) और प्राकृतिक खेती के मॉडल को अपनाकर अपनी खेती को एक लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया है। पहले सीमित आय तक सिमटे रहने वाले इस किसान की वार्षिक आमदनी अब बढ़कर लगभग 9 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
किसान ने अपनी 4.5 एकड़ भूमि में संतरे के बागान के साथ-साथ कपास, तुअर, हल्दी, काली हल्दी, काला आलू और कंटोला जैसी फसलों की इंटरक्रॉपिंग शुरू की। इसके साथ ही उन्होंने पशुपालन और जैविक इनपुट निर्माण जैसे वर्मी कम्पोस्ट और नीम पाउडर उत्पादन को भी अपनाया। इन सभी गतिविधियों ने मिलकर खेती की लागत को कम किया और उत्पादन क्षमता को बढ़ाया।
प्राकृतिक खेती और नवाचार बना सफलता की कुंजी
कृषि विभाग और आत्मा परियोजना के मार्गदर्शन में किसान ने जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत और दशपर्णी अर्क जैसे जैविक इनपुट का उपयोग शुरू किया। इससे न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ी, बल्कि फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन में भी सुधार हुआ। पहले जहां खेती से सीमित लाभ मिलता था, वहीं अब इंटरक्रॉपिंग और जैविक खेती के कारण आय में तीन गुना तक वृद्धि दर्ज की गई है।
वर्मी कम्पोस्ट और नीम पाउडर से अतिरिक्त आय
किसान ने 32 बेड की वर्मी कम्पोस्ट यूनिट स्थापित कर जैविक खाद का उत्पादन शुरू किया, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। इसके अलावा नीम पाउडर उत्पादन यूनिट से भी उन्हें नियमित रूप से मुनाफा मिल रहा है। इन सहायक गतिविधियों ने उनकी आर्थिक स्थिति को और मजबूत किया है।
पशुपालन ने बढ़ाई स्थिरता
खेती के साथ-साथ किसान ने देशी गायों के माध्यम से पशुपालन को भी अपनाया है, जिससे उन्हें जैविक खेती के लिए आवश्यक गोबर आधारित उत्पाद आसानी से मिल रहे हैं। यह मॉडल उनकी खेती को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
अन्य किसानों के लिए बनी प्रेरणा
इस सफल मॉडल ने क्षेत्र के अन्य किसानों को भी प्रेरित किया है। अब कई किसान इंटरक्रॉपिंग और जैविक खेती की ओर रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह वैज्ञानिक खेती और नवाचार को अपनाया जाए तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।
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