मध्यप्रदेश: काली तुलसी, अश्वगंधा और मुनगा की खेती से बढ़ेगी किसानों की कमाई, उद्यानिकी विभाग ने शुरू किया विशेष अभियान
25 जुलाई 2026, भोपाल: मध्यप्रदेश: काली तुलसी, अश्वगंधा और मुनगा की खेती से बढ़ेगी किसानों की कमाई, उद्यानिकी विभाग ने शुरू किया विशेष अभियान – किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें पारंपरिक फसलों के साथ-साथ औषधीय फसलों की खेती से जोड़ने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश के मंडला जिले में उद्यानिकी विभाग द्वारा जिले में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत किसानों को काली तुलसी, अश्वगंधा और मुनगा जैसी औषधीय फसलों की वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार को विकासखंड नैनपुर के ग्राम टाटरी में किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन देने के साथ खेत पर ही इन फसलों की खेती का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया गया।
खेत पर पहुंचकर दिया तकनीकी प्रशिक्षण
उद्यानिकी विभाग की टीम ने ग्राम टाटरी निवासी कृषक सत्येंद्र उइके के खेत का दौरा कर औषधीय फसलों की खेती से जुड़ी आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। इस दौरान सहायक संचालक उद्यानिकी सुश्री दीपा कुलेश, सहायक संचालक आत्मा श्रीमती अंजू कुड़ापे तथा वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी श्री पंकज मरकाम मौजूद रहे।
अधिकारियों ने खेत पर ही किसानों को बीज उपचार, भूमि की तैयारी, बुवाई की सही विधि, सिंचाई प्रबंधन और फसल की देखभाल से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी। साथ ही लाइव डेमो के माध्यम से वैज्ञानिक तरीके से औषधीय फसलों की खेती करने की प्रक्रिया भी समझाई।
कम लागत में बेहतर मुनाफे की संभावना
सहायक संचालक उद्यानिकी सुश्री दीपा कुलेश ने बताया कि काली तुलसी, अश्वगंधा और मुनगा जैसी औषधीय फसलों की बाजार में लगातार मांग बढ़ रही है। इनकी खेती कम लागत में की जा सकती है और किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिल सकता है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए ये फसलें अतिरिक्त आय का अच्छा स्रोत बन सकती हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पलायन जैसी समस्याओं में भी कमी आने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की मंशा किसानों को केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित रखने की नहीं है, बल्कि उन्हें उद्यानिकी और औषधीय फसलों की ओर भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि खेती अधिक लाभकारी बन सके। इसके लिए विभाग लगातार तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन उपलब्ध करा रहा है।
12 एकड़ में करेंगे औषधीय फसलों की खेती
प्रगतिशील किसान सत्येंद्र उइके ने विभाग द्वारा दिए गए प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की सराहना करते हुए बताया कि वे इस वर्ष अपनी 12 एकड़ भूमि पर औषधीय फसलों की खेती करने जा रहे हैं। उनका मानना है कि वैज्ञानिक तकनीकों के साथ औषधीय खेती अपनाने से उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि होगी।
किसानों ने दिखाई रुचि
कार्यक्रम में निजी संस्था के प्रतिनिधि सुरेंद्र गुप्ता सहित गांव के कई प्रगतिशील किसान भी शामिल हुए। किसानों ने औषधीय फसलों की खेती से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों से चर्चा की और वैज्ञानिक खेती की तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
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