राज्य कृषि समाचार (State News)

मध्यप्रदेश: अलीराजपुर का ‘नूरजहाँ’ आम बना दुनिया में मशहूर, एक फल की कीमत 3000 रुपये तक

18 मई 2026, भोपाल: मध्यप्रदेश: अलीराजपुर का ‘नूरजहाँ’ आम बना दुनिया में मशहूर, एक फल की कीमत 3000 रुपये तक – भारत को आमों का देश कहा जाता है और मध्यप्रदेश इस पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला प्रमुख राज्य बनकर उभर रहा है। प्रदेश की उपजाऊ मिट्टी, अनुकूल जलवायु और विविध भौगोलिक परिस्थितियां आम उत्पादन के लिए बेहद उपयुक्त मानी जाती हैं। यही वजह है कि यहां दशहरी, लंगड़ा, चौसा, केसर, आम्रपाली और अल्फांसो जैसी प्रसिद्ध किस्मों के साथ एक ऐसी दुर्लभ किस्म भी पैदा होती है, जिसने देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी खास पहचान बनाई है। यह विशेष किस्म है ‘नूरजहाँ’ आम, जिसे “किंग ऑफ मैंगो” भी कहा जाता है।

विशाल आकार और अनोखे स्वाद के लिए प्रसिद्ध

मध्यप्रदेश के जनजातीय बहुल अलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में उगाया जाने वाला नूरजहाँ आम अपने विशाल आकार, आकर्षक स्वरूप और बेहतरीन स्वाद के कारण दुनिया भर में चर्चित है। इसे दुनिया के सबसे बड़े आमों में गिना जाता है। सामान्यतः एक नूरजहाँ आम का वजन 2 से 5 किलोग्राम तक होता है। इसका आकार इतना बड़ा होता है कि एक ही आम पूरे परिवार के लिए पर्याप्त माना जाता है।

इस आम की मिठास, सुगंध और अलग स्वाद लोगों को पहली नजर में आकर्षित कर लेते हैं। यही कारण है कि बड़े शहरों के साथ-साथ विदेशों में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। बाजार में एक नूरजहाँ आम की कीमत 1500 से 3000 रुपये तक पहुंच जाती है।

सीमित उत्पादन के कारण बढ़ती है कीमत

नूरजहाँ आम केवल अपने बड़े आकार के कारण ही खास नहीं है, बल्कि इसकी दुर्लभता भी इसे बेहद विशेष बनाती है। इसके पेड़ों पर सीमित संख्या में ही फल लगते हैं, इसलिए इसकी कीमत सामान्य आमों की तुलना में कई गुना अधिक होती है। कई बार एक फल ही हजारों रुपये में बिक जाता है।

कट्ठीवाड़ा का मौसम और वातावरण इस किस्म के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है। यहां की जलवायु और मिट्टी फल की गुणवत्ता को और बेहतर बनाती है। यही वजह है कि यह आम किसानों के लिए लाभकारी फसल के रूप में उभर रहा है।

गुजरात से आया था नूरजहाँ का पौधा

ग्राम जूना कट्ठीवाड़ा स्थित शिव (बावड़ी) आम फार्म के कृषक भरतराजसिंह जादव बताते हैं कि उनके पिता स्वर्गीय रणवीरसिंह जादव लगभग 55 से 60 वर्ष पहले गुजरात के बनमाह क्षेत्र से नूरजहाँ आम का पौधा लेकर आए थे। उन्होंने इसे अपने खेत में लगाया और वर्षों की मेहनत से संरक्षित किया। बाद में यही पौधा पूरे क्षेत्र की पहचान बन गया।

भरतराजसिंह जादव के अनुसार, उनके पिता ने ग्राफ्टिंग तकनीक के जरिए विशेष पौधा तैयार किया था, जिसकी वर्तमान आयु करीब 20 से 25 वर्ष है। इसके अलावा उनके द्वारा तैयार किए गए 11 ग्राफ्टेड पौधे भी अब विकसित हो रहे हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर मिल चुका सम्मान

कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में नूरजहाँ आम की पहचान वर्षों पुरानी है। इसकी विशेषता को देखते हुए वर्ष 1999 और 2010 में इसे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका है। इन पुरस्कारों ने न केवल किसानों का उत्साह बढ़ाया बल्कि आलीराजपुर जिले को भी राष्ट्रीय पहचान दिलाई।

धीरे-धीरे यह आम मध्यप्रदेश की उद्यानिकी पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया है।

मुगलकालीन विरासत से जुड़ा है इतिहास

नूरजहाँ आम का इतिहास मालवा और पश्चिमी भारत की सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ा माना जाता है। कहा जाता है कि मुगलकाल में बड़े आकार और विशेष स्वाद वाले आमों को शाही बागों में विशेष महत्व दिया जाता था। इसी परंपरा से जुड़ी यह किस्म समय के साथ गुजरात और झाबुआ-आलीराजपुर क्षेत्र तक पहुंची।

आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी और तापमान नूरजहाँ आम के लिए बेहद अनुकूल साबित हुए, जिसके कारण यह किस्म यहां अच्छी तरह विकसित हुई।

विदेशों में बढ़ रही मांग

नूरजहाँ आम की मांग अब विदेशों में भी तेजी से बढ़ रही है। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर और कुवैत जैसे खाड़ी देशों में भारतीय प्रीमियम आमों की अच्छी मांग रहती है। वहां बड़े आकार और आकर्षक स्वरूप वाले फलों को विशेष पसंद किया जाता है।

इसके अलावा अमेरिका, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम में बसे भारतीय समुदाय के बीच भी यह आम काफी लोकप्रिय हो रहा है। सिंगापुर और मलेशिया जैसे देशों में भी इसकी पहचान लगातार बढ़ रही है।

हालांकि इसका उत्पादन सीमित मात्रा में होता है, इसलिए बड़े पैमाने पर निर्यात संभव नहीं हो पाता। इसके बावजूद अपनी दुर्लभता और खासियत के कारण नूरजहाँ आम अंतरराष्ट्रीय बाजार में “लक्ज़री मैंगो” के रूप में पहचान बना रहा है।

किसानों की बढ़ रही आय

मध्यप्रदेश सरकार और उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को आधुनिक तकनीक, उन्नत पौध, ड्रिप सिंचाई और फल प्रसंस्करण के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे प्रदेश में आम उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि हो रही है।

आज नूरजहाँ आम केवल स्वाद का प्रतीक नहीं, बल्कि किसानों की समृद्धि, कृषि नवाचार और मध्यप्रदेश की वैश्विक पहचान का माध्यम बन चुका है।

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