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राज्य कृषि समाचार (State News)

सेब की कम फसल ने बढ़ाई बागवानों की चिंता, लागत बढ़ने से मुनाफे पर संकट

02 सितंबर 2026, शिमला: सेब की कम फसल ने बढ़ाई बागवानों की चिंता, लागत बढ़ने से मुनाफे पर संकट – हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादक इस बार मौसम और बढ़ती लागत की दोहरी मार झेल रहे हैं। कई इलाकों में फूल आने के समय बदले मौसम, बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और ठंड ने फसल को नुकसान पहुंचाया, जिससे निचले और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उत्पादन काफी कम बताया जा रहा है। दूसरी ओर मजदूरी, खाद, कीटनाशक, पैकेजिंग और परिवहन की लागत बढ़ने से बागवानों के सामने कम उत्पादन में लागत निकालने की चुनौती खड़ी हो गई है।

शिमला की ढल्ली मंडी में अच्छी गुणवत्ता वाले सेब को 20 किलो के बॉक्स पर करीब 3,000 से 3,500 रुपये तक का भाव मिल रहा है। बागवान इस कीमत को फिलहाल संतोषजनक मान रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि लगातार बढ़ती लागत को देखते हुए केवल अच्छा मंडी भाव पर्याप्त नहीं है। उन्हें पूरे सीजन स्थिर और लाभकारी कीमत की जरूरत है।

शिमला जिले के रत्नारी क्षेत्र के किसान दौलत राम के अनुसार फूल आने के दौरान मौसम में लगातार बदलाव से कई बागों में फूल खराब हो गए और फल कम लगे। कुछ क्षेत्रों में उत्पादन सामान्य है, लेकिन कई बागों में फसल बेहद कम है। उनका कहना है कि किसान को मजदूरी से लेकर दवाइयों, खाद, कार्टन और परिवहन तक हर स्तर पर बढ़ा खर्च उठाना पड़ रहा है।

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छोटे बागवानों की मुश्किल ज्यादा

किसानों ने मार्केट इंटरवेंशन स्कीम के तहत भुगतान में देरी का मुद्दा भी उठाया है। छोटे बागवानों का कहना है कि सीमित संसाधनों के कारण बाजार में मोलभाव करने की उनकी क्षमता कम होती है। ऐसे में समय पर भुगतान और उचित मूल्य उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

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एक अन्य उत्पादक रमेश चौहान ने बताया कि निचले और मध्यम क्षेत्रों में फसल की स्थिति खराब है, जबकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी कई बागों में उत्पादन घटा है। मंडी में सेब के भाव गुणवत्ता के अनुसार करीब 700-800 रुपये से लेकर 3,000 रुपये या उससे अधिक प्रति बॉक्स तक बताए जा रहे हैं। प्रीमियम गुणवत्ता को बेहतर दाम मिल रहा है, जबकि छोटे आकार और कम गुणवत्ता वाले सेब की मांग कमजोर है।

व्यापारियों के सामने भी अलग चुनौती है। उनका कहना है कि खरीद कीमत बढ़ने के बावजूद बाहरी बाजारों में मांग कमजोर रहने से मुनाफा सीमित है। कश्मीर से आने वाले सेब की आवक और छोटे आकार के स्थानीय सेब ने भी बाजार की स्थिति को प्रभावित किया है।

बागवानों की मांग है कि सरकार स्थानीय सेब उत्पादकों को बाजार में बेहतर सुरक्षा दे, समय पर भुगतान सुनिश्चित करे और बढ़ती उत्पादन लागत को देखते हुए ऐसी व्यवस्था बनाए जिससे कम फसल वाले साल में भी किसान अपनी लागत निकालकर सम्मानजनक आय हासिल कर सकें।

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