जबलपुर: एल- नीनो को लेकर कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों को परामर्श जारी
21 जुलाई 2026, जबलपुर: जबलपुर: एल- नीनो को लेकर कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों को परामर्श जारी – एल-नीनो की संभावित परिस्थितियों के मद्देनजर जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र के तकनीकी प्रकोष्ठ एवं कृषि ओपीडी ने जिले के अधिकांश क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा तथा सूखे के अंतराल की संभावना को देखते हुए किसानों के लिए परामर्श जारी कर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
कृषि विज्ञान केंद्र के तकनीकी प्रकोष्ठ एवं कृषि ओपीडी ने किसानों को कम अवधि एवं सूखा-सहनशील किस्मों का चयन करने की सलाह दी है। किसानों से धान की जेआरबी-1, जेआर-201, सहभागी, जेआर-81, एमटीयू-1156, दंतेश्वरी, एमटीयू-1010 एवं जेआर-21 किस्म की सीधी बोनी करने कहा गया है। इसी प्रकार मक्का की जेएम-216, जेएम-218, जेएम-10, प्रताप तथा प्राइवेट हाइब्रिड किस्मों, अरहर की टीजेटी-501, आईसीपीएल-87, बीडीएन-716, बीडीएन-711, पूसा-991 एवं राजेश्वरी, कोदो की जेके-137, डीपीएस 9-1, इंदिरा कोदो-1, जेके-150 एवं जेके-136, कुटकी की सीजी कुटकी-1, जेके-36, जेके-4, तिल की टीकेजी-21, टीकेजी-22, जेटी-8, जेकेजी-55, टीकेजी-36 एवं आरटी-351 तथा उड़द की पीयू-19, पीयू-30, पीयू-31, पीयू-40, पीयू-94, एलबीजी-402, प्रताप उड़द-1, आईपीयू 2-43 एवं आईपीयू 11-2) की खेती करने तथा धान की सीधी बुवाई करने की अनुशंसा की है।
परामर्श में किसानों को वर्षा जल संरक्षण के लिए खेत तालाब, मेड़बंदी, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग एवं प्राकृतिक मल्चिंग अपनाने की सलाह दी गई है। किसानों से कहा गया है कि नमी संरक्षण के लिए हैप्पी सीडर, जीरो टिल सीड ड्रिल, रिज-फरो एवं रेज्ड बेड तकनीक का उपयोग करें तथा अनावश्यक जुताई से बचें, ताकि मिट्टी की नमी बनी रहे। साथ ही सामान्य सीड ड्रिल से बोई गई फसलों में कुल्पा चलायें।
किसानों को मिट्टी परीक्षण के बाद ही उर्वरक का उपयोग करने कहा गया है। किसानों से कहा गया है कि सूखे की स्थिति में अधिक नाइट्रोजन का उपयोग न करें अन्यथा इसका फसलों पर विपरीत असर पड़ेगा और उर्वरक का ह्रास होगा। इसके साथ ही किसानों को रासायनिक उर्वरकों के साथ कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, कुक्कुट खाद एवं जैव उर्वरकों जैसे जैविक स्रोतों के उपयोग की सलाह दी गई है।
कृषि विज्ञान केंद्र ने खरपतवार नियंत्रण के लिए व्हील हो एवं साइकिल हो जैसी यांत्रिक विधियों को अपनाने, कम पानी वाली फसलों के साथ फसल विविधीकरण एवं अंतर्वर्ती फसल पद्धति अपनाने तथा सूखे के तनाव की स्थिति में एक प्रतिशत पोटेशियम नाइट्रेट अथवा वैज्ञानिक सलाह के अनुसार तरल एवं नैनो उर्वरकों का छिड़काव करने की अनुशंसा भी की है।
कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को सभी कृषि कार्य साप्ताहिक मौसम पूर्वानुमान के अनुरूप करने तथा जीवामृत, घनजीवामृत एवं फसल अवशेषों के उपयोग के माध्यम से प्राकृतिक खेती को अपनाने की सलाह दी है, जो मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता के साथ-साथ नमी बनाए रखने में भी मदद करते हैं I
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