छत्तीसगढ़ में धान के बजाय दलहन-तिलहन और मिलेट्स की खेती पर जोर, किसानों को मिलेगा ₹15 हजार प्रति एकड़ अनुदान
31 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ में धान के बजाय दलहन-तिलहन और मिलेट्स की खेती पर जोर, किसानों को मिलेगा ₹15 हजार प्रति एकड़ अनुदान – छत्तीसगढ़ में किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए धान के स्थान पर दलहन, तिलहन और मिलेट्स जैसी फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। निर्धारित दूसरी फसलों की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये अनुदान देने का प्रावधान है। कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने अधिकारियों को फसल विविधीकरण की धीमी प्रगति में तेजी लाने और किसानों को बाजार की मांग के अनुरूप लाभकारी फसलों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए हैं।
कृषि उत्पादन आयुक्त रायपुर संभाग के अधिकारियों की मैराथन समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्यपालन, सहकारिता, बीज निगम, मंडी बोर्ड सहित अन्य संबंधित विभागों की केंद्र और राज्य प्रवर्तित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। उन्होंने योजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
15 नवंबर से शुरू होगी धान खरीदी, तैयारियां पूरी करने के निर्देश
कृषि उत्पादन आयुक्त ने आगामी 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर शुरू होने वाले धान खरीदी अभियान की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसानों को धान बेचने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए कृषि, सहकारिता, मार्कफेड और संबंधित विभाग आपसी समन्वय से सभी जरूरी व्यवस्थाएं समय पर पूरी करें। उन्होंने खाद और बीज की उपलब्धता, भंडारण तथा वितरण व्यवस्था की भी समीक्षा की। इन कार्यों में पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी के लिए साथी पोर्टल का उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
धान के बदले दलहन, तिलहन और मिलेट्स की खेती पर जोर
कृषि उत्पादन आयुक्त ने फसल विविधीकरण की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को इसमें तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को धान के स्थान पर दलहन, तिलहन और कोदो-कुटकी, रागी जैसी मिलेट्स फसलों की खेती के लिए प्रेरित किया जाए। निर्धारित दूसरी फसलों की खेती करने पर किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये अनुदान देने का प्रावधान है। इसका व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक किसानों को लाभान्वित किया जाए।
उन्होंने फूलों, फलों, मखाना और ऑयल पाम जैसी उद्यानिकी फसलों का रकबा बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि फसल विविधीकरण का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं होना चाहिए, बल्कि किसानों की आय में वृद्धि और उनकी उपज के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किए जाएं।
चक्रवात से फसल नुकसान पर तत्काल सर्वे के निर्देश
बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवात ‘अर्नब’ के संभावित प्रभावों को देखते हुए कृषि उत्पादन आयुक्त ने अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चक्रवात के कारण प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में फसलों को नुकसान होने की स्थिति में तत्काल सर्वे कराया जाए। प्रभावित किसानों के प्रकरण तैयार कर शासन के प्रचलित नियमों और योजनाओं के तहत पात्रता के अनुसार राहत एवं सहायता उपलब्ध कराई जाए।
कृषि यंत्रों के संचालन और रखरखाव का प्रशिक्षण दें
कृषि यंत्रीकरण सबमिशन की समीक्षा करते हुए परदेशी ने कहा कि शासन की योजनाओं के तहत किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके बावजूद बुआई और कटाई के समय हरियाणा, पंजाब सहित दूसरे राज्यों से आने वाली कृषि मशीनों का उपयोग अधिक दिखाई देता है। इस स्थिति पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं के तहत कृषि यंत्र प्राप्त करने वाले किसानों को उनके संचालन, रखरखाव और उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाए। इससे किसान उपलब्ध मशीनों का बेहतर उपयोग कर सकेंगे और खेती की लागत कम करने में मदद मिलेगी।
अमानक कीटनाशक बेचने वालों पर चलेगा विशेष जांच अभियान
कृषि उत्पादन आयुक्त ने निजी कृषि आदान विक्रय केंद्रों में अनियमितताओं की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कुछ निजी विक्रेताओं द्वारा प्रतिष्ठित कंपनियों के बीज या कीटनाशक खरीदने वाले किसानों को जबरन अन्य अमानक उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य करने की शिकायतें मिल रही हैं। इस तरह की फोर्स टैगिंग पर तत्काल रोक लगाई जाए।
उन्होंने बिना लाइसेंस कीटनाशक बेचने और अमानक उत्पादों का विक्रय करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ विशेष जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए। साथ ही दोषियों पर नियमानुसार कठोर कानूनी कार्रवाई और नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने को कहा।
700 एकड़ में ब्लैक राइस उत्पादन की पहल की सराहना
बैठक में बाजार आधारित और लाभकारी खेती को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। इस दौरान बलौदाबाजार जिले के कलेक्टर ने बताया कि जिले के कसडोल विकासखंड में लगभग 700 एकड़ क्षेत्र में ब्लैक राइस का उत्पादन कराया जा रहा है। इसके विपणन के लिए जापान की एक कंपनी से समन्वय स्थापित किया गया है। उन्होंने 25 हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से इसके विक्रय की जानकारी भी दी।
कृषि उत्पादन आयुक्त ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि बाजार आधारित ऐसे कृषि मॉडल किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने अन्य जिलों के अधिकारियों को भी स्थानीय परिस्थितियों, उत्पादन क्षमता और बाजार की मांग के अनुसार इस तरह के नवाचार अपनाने के निर्देश दिए।
हर जिले में विकसित होंगे 2 से 3 विशिष्ट कृषि मॉडल
परदेशी ने रायपुर संभाग के सभी जिलों के अधिकारियों को कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के साथ समन्वय कर दो से तीन विशिष्ट कृषि गतिविधियों का चयन करने के निर्देश दिए। इन गतिविधियों का चयन जिले की जलवायु, मिट्टी, उपलब्ध संसाधनों और बाजार की मांग के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि चयनित गतिविधियों को कृषि मॉडल के रूप में विकसित किया जाए, ताकि संबंधित जिले की कृषि क्षेत्र में अलग पहचान बन सके। इससे किसानों को नई तकनीक अपनाने, बेहतर उत्पादन और विपणन के अवसर मिलेंगे।
पीएम-आशा के तहत खरीदी और समय पर भुगतान सुनिश्चित करें
कृषि उत्पादन आयुक्त ने प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्धारित फसलों की खरीदी और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसके माध्यम से पारंपरिक ठोस उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने बीज उत्पादन और भंडारण की स्थिति संतोषजनक बताई। साथ ही किसानों को बिचौलियों के बजाय सीधे बीज निगम के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।
उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्यपालन विभाग के अधिकारियों ने भी विभागीय योजनाओं की प्रगति और किसानों तथा पशुपालकों को लाभान्वित करने के लिए संचालित गतिविधियों की जानकारी दी।
योजनाओं की प्रगति की संभागवार समीक्षा
उल्लेखनीय है कि कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी प्रदेश के विभिन्न संभागों के अधिकारियों की क्रमवार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। इन बैठकों का उद्देश्य कृषि एवं संबद्ध विभागों की योजनाओं की जमीनी प्रगति का आकलन करना, क्रियान्वयन में आ रही समस्याओं का समाधान करना और किसानों तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाना है। इसी क्रम में रायपुर संभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में कृषि विभाग के संचालक राहुल देव, मार्कफेड के प्रबंध संचालक जितेंद्र शुक्ला, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के प्रबंध संचालक अजय अग्रवाल, पशुधन विकास विभाग के संचालक चंद्रकांत वर्मा, मत्स्यपालन विभाग के संचालक एन.एस. नाग, मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक महेंद्र सावन्नी, एपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक सहित रायपुर संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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