छत्तीसगढ़ में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का असर, किसानों को धान की कटाई-मिंजाई रोकने की सलाह
31 अक्टूबर 2026, रायपुर: छत्तीसगढ़ में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का असर, किसानों को धान की कटाई-मिंजाई रोकने की सलाह – बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में आगामी दिनों में बारिश, तेज हवाएं और गरज-चमक के साथ वज्रपात की संभावना है। मौसम में होने वाले इस बदलाव को देखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कृषि मौसम विज्ञान विभाग ने किसानों के लिए विशेष मौसम आधारित कृषि परामर्श जारी किया है। विभाग ने किसानों को धान सहित अन्य खरीफ फसलों की कटाई और मिंजाई का काम फिलहाल रोकने तथा खेतों में तैयार फसलों और कृषि उपज को सुरक्षित रखने की सलाह दी है।
29 अक्टूबर को भारी बारिश और तेज हवाओं की संभावना
कृषि मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, भारत मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त पूर्वानुमान के मुताबिक चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से 29 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के अधिकांश स्थानों पर मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर भारी से अति भारी वर्षा हो सकती है। एक-दो स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश की भी संभावना जताई गई है। इस दौरान गरज-चमक के साथ वज्रपात और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।
29 अक्टूबर को रायपुर, बलौदाबाजार, बलरामपुर-रामानुजगंज, जशपुर, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरबा, जांजगीर-चांपा, कबीरधाम, महासमुंद, रायगढ़, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ सहित कई जिलों में बारिश का प्रभाव अधिक रहने का अनुमान है। वहीं, 30 और 31 अक्टूबर को भी प्रदेश के अनेक हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक और वज्रपात की आशंका है। एक और दो नवंबर को भी कुछ जिलों में बारिश का दौर जारी रह सकता है।
धान और खरीफ फसलों की कटाई दो दिन टालें
कृषि मौसम विज्ञान विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि जिन खेतों में धान, दलहन और तिलहन की फसलें पकने की अवस्था में हैं, उनकी कटाई कम से कम आगामी दो दिनों तक टाल दें। जिन किसानों ने कटाई शुरू कर दी है, वे कटी हुई फसलों को जल्द सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर रखें, ताकि बारिश से उपज की गुणवत्ता प्रभावित न हो।
खेतों में जलभराव रोकने के लिए अतिरिक्त पानी की निकासी की उचित व्यवस्था करने को भी कहा गया है। खासकर पकने की अवस्था वाली फसलों में पानी जमा होने से उत्पादन और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। बारिश और तेज हवाओं की संभावना को देखते हुए फिलहाल सिंचाई, उर्वरक और कीटनाशकों का छिड़काव स्थगित रखने की सलाह दी गई है। मौसम साफ होने के बाद ही जरूरी कृषि कार्य शुरू करें।
कटाई के बाद उपज को अच्छी तरह सुखाकर करें भंडारण
विभाग ने किसानों को धान, दलहन और तिलहन की कटाई के बाद उपज को पर्याप्त रूप से सुखाकर ही भंडारित करने की सलाह दी है। कृषि उपज को नमी से बचाने के लिए सुरक्षित और हवादार भंडारण स्थल का चयन करें। इसके साथ ही भंडारण स्थल की छत, फर्श और जल निकासी की व्यवस्था भी सुनिश्चित करें, ताकि बारिश का पानी उपज तक न पहुंचे।
सब्जियों और बागवानी फसलों को सुरक्षित रखने की सलाह
उद्यानिकी फसलों के लिए भी विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। पकने की अवस्था में पहुंच चुकी सब्जियों और बागवानी फसलों की जल्द तुड़ाई कर उन्हें सुरक्षित बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था करें। टमाटर, बैंगन, मिर्च, भिंडी सहित अन्य सब्जियों के खेतों में जलभराव न होने दें। तेज हवाओं से पौधों को नुकसान से बचाने के लिए जरूरत के अनुसार सहारा दें। जिन केले के पौधों में फल आ चुके हैं, उन्हें बांस का सहारा देकर सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है।
फसलों में कीट-रोगों की नियमित निगरानी करें
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, लगातार बारिश और अधिक नमी के कारण फसलों में कीट एवं रोगों का प्रकोप बढ़ सकता है। इसलिए किसानों को मौसम साफ होने के बाद फसलों का नियमित निरीक्षण करना चाहिए। किसी तरह का कीट या रोग दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेकर उचित उपचार करें।
पशुपालक भी बरतें सावधानी
विभाग ने पशुपालकों को बारिश के दौरान पशुओं को सूखे और सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह दी है। तेज हवाओं और वज्रपात की आशंका को देखते हुए पशुओं को पेड़ों के नीचे बांधने से बचें। उनके लिए स्वच्छ पेयजल, पर्याप्त चारा और सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था करें। पशुओं में कोई असामान्य स्थिति दिखाई देने पर तत्काल पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
कृषि मौसम विज्ञान विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे मौसम संबंधी ताजा चेतावनियों पर नजर रखें और बारिश, तेज हवाओं तथा बिजली चमकने के दौरान खेतों में काम करने से बचें। समय रहते सावधानी बरतकर फसलों, कृषि उपज और पशुधन को संभावित नुकसान से बचाया जा सकता है।
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