ICAR वैज्ञानिकों ने सोयाबीन फसल का किया निरीक्षण, एल-नीनो के बीच किसानों को दिए बचाव के उपाय
23 जुलाई 2026, भोपाल: ICAR वैज्ञानिकों ने सोयाबीन फसल का किया निरीक्षण, एल-नीनो के बीच किसानों को दिए बचाव के उपाय – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के खरपतवार अनुसंधान केंद्र, जबलपुर एवं राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (ICAR-NSRI), इंदौर की संयुक्त वैज्ञानिक टीम द्वारा सीहोर जिले के इछावर के ग्राम भऊखेड़ी, भाड़ाखेड़ी एवं आमला रामजीपुरा में सोयाबीन फसल का निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान कृषि विभाग द्वारा प्रदर्शन के रूप में किसानों को उपलब्ध कराई गई सोयाबीन की उन्नत किस्म जे.एस.-2172 एवं एन.आर.सी.-150 का अवलोकन किया गया। वैज्ञानिकों ने खेतों में फसल की वृद्धि, पौधों की स्थिति, खरपतवार प्रबंधन एवं किसानों द्वारा अपनाई जा रही कृषि तकनीकों का निरीक्षण करते हुए आवश्यक तकनीकी सुझाव दिए।
एल-नीनो के कारण असमान हो सकती है बारिश
वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि एल-नीनो के प्रभाव के कारण वर्षा का वितरण असमान हो सकता है, जिससे सोयाबीन फसल प्रभावित होने की संभावना रहती है। ऐसी स्थिति में किसानों को खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखने, समय पर खरपतवार नियंत्रण करने, फसल की नियमित निगरानी रखने तथा कीट एवं रोगों के प्रारंभिक लक्षण दिखाई देने पर कृषि विभाग एवं कृषि वैज्ञानिकों की अनुशंसा के अनुसार आवश्यक प्रबंधन उपाय अपनाने की सलाह दी गई।
ब्रॉड बेड-फरो तकनीक अपनाने की सलाह
ऐसी परिस्थितियों में किसानों को सलाह दी गई कि जहाँ संभव हो, ब्रॉड बेड एवं फरो /रेज़्ड बेड फरो पद्धति से सोयाबीन की बुवाई करें। इस पद्धति से अधिक वर्षा की स्थिति में खेत से अतिरिक्त पानी की निकासी सुगम होती है तथा कम वर्षा की स्थिति में नमी का बेहतर संरक्षण होता है, जिससे फसल की वृद्धि एवं उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
इस अवसर पर डॉ. राघवेंद्र नरगुंड, डॉ. आर. के. वर्मा, डॉ. वी. के. चौधरी, डॉ. पी. के. सिंह सहित कृषि विस्तार अधिकारी अनिमेष राय उपस्थित रहे।
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