NHB के नए नियमों के विरोध में दिल्ली में लामबंद हुए हाईटेक किसान
50 प्रतिशत अनुदान बहाली सहित छह मांगों को लेकर राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड कार्यालय पर प्रदर्शन
सचिन बोंद्रिया
15 सितंबर 2026, इंदौर: NHB के नए नियमों के विरोध में दिल्ली में लामबंद हुए हाईटेक किसान – जिस तरह उद्योगों को विस्तार करने के लिए सरकार कोई बंधन नहीं डालती, उसी तरह किसानों को अपनी खेती का विस्तार करने से क्यों रोका जाए? खेती की बढ़ती लागत से त्रस्त किसानों की इस चिंता को कृषक जगत ने 31 अगस्त 2026 को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। अब राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) के नए दिशा-निर्देशों के विरोध में हाईटेक किसान दिल्ली में लामबंद हो गए हैं। संरक्षित खेती से जुड़े किसानों, उद्यमियों एवं प्रतिनिधियों ने 15 सितंबर को गुरुग्राम स्थित NHB कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन कर नए नियम वापस लेने की मांग की।
किसानों का कहना है कि नेट हाउस, पॉलीहाउस और ग्रीनहाउस जैसी संरक्षित खेती परियोजनाओं में किसान पहले ही भारी निवेश कर चुके हैं। बैंक ऋण, निर्माण सामग्री, पौध सामग्री, सिंचाई, बिजली और श्रम की बढ़ती लागत के बीच अनुदान में कमी से किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उनका कहना है कि किसानों ने पूर्व की सरकारी नीति और सहायता व्यवस्था पर भरोसा करते हुए अपनी परियोजनाओं में निवेश किया है, इसलिए अचानक नियम बदलना उचित नहीं है।
50 से 35 प्रतिशत हुआ अनुदान – किसानों के अनुसार 21 अगस्त 2026 के NHB सर्कुलर में संरक्षित खेती के लिए सहायता सामान्य क्षेत्रों में 50 प्रतिशत से घटाकर 35 प्रतिशत तथा निर्धारित क्षेत्रों में 45 प्रतिशत कर दी गई है। साथ ही लंबित LoC/GoC आवेदन एवं सब्सिडी दावों को केस-टू-केस आधार पर निपटाने की व्यवस्था से किसानों में असमंजस की स्थिति है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कई किसानों के ऋण स्वीकृत हो चुके हैं, ऑर्डर दिए जा चुके हैं और परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है। ऐसे मामलों में नए नियम लागू करने से किसानों को भारी वित्तीय नुकसान हो सकता है।
किसानों ने छह प्रमुख मांगें उठाईं- इसमें 50 प्रतिशत अनुदान की की बहाली, लंबित एवं पहले से प्रतिबद्ध परियोजनाओं को पुराने नियमों के तहत संरक्षण, ‘एक परिवार-एक लाभार्थी’ नियम समाप्त करना, ₹10,000 पेंशन संबंधी पात्रता शर्त पर पुनर्विचार, संरक्षित खेती की कृषि संरचनाओं पर 5 प्रतिशत GST तथा कृषि निर्यात को बढ़ावा देना शामिल है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अनियमितताओं और फर्जी दावों पर रोक लगाने के लिए कड़े प्रावधान होने चाहिए, लेकिन उनकी आड़ में वास्तविक किसानों के हित प्रभावित नहीं होने चाहिए। संरक्षित खेती आधुनिक कृषि का महत्वपूर्ण माध्यम है और इसे बढ़ावा देने के लिए स्थिर एवं किसान हितैषी नीति जरूरी है।
किसानों ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। उन्होंने NHB के नए प्रावधानों की समीक्षा कर पहले से निवेश कर चुके किसानों को राहत देने तथा अनुदान की पूर्व व्यवस्था बहाल करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने नारे लगाते हुए कहा कि “हम अन्नदाता हैं, हमारे साथ न्याय होना चाहिए” और “किसान हित में पुराने नियम पुनः लागू करो।” किसानों का कहना है कि जब उद्योगों को विस्तार के लिए प्रोत्साहन दिया जाता है तो आधुनिक तकनीक अपनाकर खेती का विस्तार करने वाले किसानों पर अनावश्यक बंधन नहीं लगाए जाने चाहिए।
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