गृहिणी से मछली पालक उद्यमी तक: ओडिशा की सुजाता भुयां की कहानी, हीराकुद जलाशय में सालाना 25-30 टन उत्पादन
29 सितंबर 2026, संबलपुर (ओडिशा): गृहिणी से मछली पालक उद्यमी तक: ओडिशा की सुजाता भुयां की कहानी, हीराकुद जलाशय में सालाना 25-30 टन उत्पादन – ओडिशा के संबलपुर की सुजाता भुयां पहले एक साधारण गृहिणी थीं। लेकिन परिवार की आर्थिक मदद के लिए कुछ नया करने की चाहत ने उन्हें कुछ साल पहले हीराकुद जलाशय में मछली पालन शुरू करने की ओर प्रेरित किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “मन की बात” के 132वें एपिसोड में सुजाता का ज़िक्र करते हुए बताया कि वे पहले गृहिणी थीं, लेकिन परिवार की मदद के लिए कुछ नया करना चाहती थीं, इसलिए उन्होंने हीराकुद जलाशय में मछली पालन शुरू किया। पीएम ने कहा कि शुरुआती दिन उनके लिए आसान नहीं थे — मौसम में बदलाव, मछलियों के चारे का इंतज़ाम और घर की ज़िम्मेदारियां संभालना, कई चुनौतियां थीं। लेकिन महज दो-तीन साल में ही उन्होंने अपने काम को एक कामयाब कारोबार में बदल दिया।
पिंजरा तकनीक से मछली पालन, कई राज्यों में सप्लाई
सुजाता ने केज कल्चर यानी पिंजरा पद्धति अपनाई है, जिसमें जलाशय में जाल के बड़े पिंजरे लगाकर मछली पाली जाती है। इसके लिए उन्होंने मत्स्य विभाग से प्रशिक्षण लिया और बैंक से लोन लेकर काम शुरू किया।
आज वे सालाना करीब 25 से 30 टन मछली का उत्पादन कर रही हैं, जिसे वे ओडिशा के अलावा आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल तक सप्लाई करती हैं। पहले साल यानी 2022 में उनकी कमाई करीब 6 लाख रुपये रही थी, और तब से उनका कारोबार लगातार बढ़ता रहा है।
सुजाता ने बताया, “शुरुआत में बहुत मुश्किल था। मौसम के बदलाव और मछली के लिए चारे का इंतज़ाम भी एक बड़ा मुद्दा था, साथ ही घर की ज़िम्मेदारियां भी संभालनी होती थीं।” पीएम मोदी ने कहा कि आज सुजाता की कामयाबी समुदाय की दूसरी महिलाओं के लिए भी उम्मीद की नई किरण बन गई है।
केज कल्चर तकनीक कैसे करती है काम
केज कल्चर में जलाशय के अंदर मजबूत जाल से बने बड़े-बड़े पिंजरे बांधे जाते हैं, जिनमें मछली के बीज डालकर उन्हें नियंत्रित तरीके से पाला जाता है। यह तालाब में पारंपरिक मछली पालन के मुकाबले कम जगह में ज्यादा उत्पादन देने वाली तकनीक मानी जाती है, और बड़े जलाशयों वाले राज्यों में मछली पालन विभाग इसे बढ़ावा दे रहे हैं।
सुजाता जैसी कहानियां दिखाती हैं कि सही प्रशिक्षण और थोड़ी शुरुआती पूंजी मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी बड़े पैमाने पर मत्स्य कारोबार खड़ा कर सकती हैं। “मन की बात” में उनका ज़िक्र आने के बाद उनकी कहानी अब देश भर में मछली पालन में दिलचस्पी रखने वाली महिलाओं के लिए एक मिसाल के तौर पर देखी जा रही है।
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