टमाटर-केले की खेती छोड़ी, अब एवोकाडो से बदल रही किसान वरदराज की किस्मत — पीएम मोदी ने भी की तारीफ
29 सितंबर 2026, कडप्पा (आंध्र प्रदेश): टमाटर-केले की खेती छोड़ी, अब एवोकाडो से बदल रही किसान वरदराज की किस्मत — पीएम मोदी ने भी की तारीफ – आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले के किसान वरदराज सालों से अपने खेत में टमाटर और केले की खेती करते आ रहे थे। एक दिन उन्होंने अपने एक दोस्त के खेत में एवोकाडो की फसल देखी, और यहीं से उनकी खेती की दिशा बदल गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” के 137वें एपिसोड में वरदराज का ज़िक्र करते हुए बताया कि टमाटर-केले की खेती करने वाले वरदराज ने एक दोस्त के खेत में एवोकाडो की फसल देखने के बाद ही यह नई फसल अपनाने का फैसला किया था।
यूट्यूब से सीखी खेती, अब सीधे दुकानों को बेच रहे उपज
वरदराज ने एवोकाडो की खेती की तकनीकी जानकारी यूट्यूब वीडियो देखकर जुटाई। शुरुआत में यह उनके लिए बिल्कुल नई और अनजान फसल थी, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने इसे सीख लिया।
आज वरदराज करीब 4 टन एवोकाडो का उत्पादन कर रहे हैं और इसे सीधे स्थानीय दुकानों को बेचते हैं। बिचौलियों को दरकिनार कर सीधी बिक्री से उन्हें बेहतर दाम मिल रहा है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि नई फसल, वैज्ञानिक सलाह और सीधी मार्केटिंग ने वरदराज के छोटे खेत से होने वाली कमाई को पूरी तरह बदल दिया है।
इसी एपिसोड में पीएम मोदी ने तमिलनाडु के कोडाइकनाल के किसान चंद्रशेखरन का भी ज़िक्र किया, जिन्होंने आधा हेक्टेयर ज़मीन पर एवोकाडो की खेती शुरू की है और जिन्हें अब अच्छे दाम मिल रहे हैं तथा जिनकी आय बढ़ी है।
शहरी बाज़ारों में बढ़ी मांग, किसानों के लिए नया मौका
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि कुछ साल पहले तक एवोकाडो ज्यादातर भारतीयों के लिए एक अनजान फल था, लेकिन अब शहरी बाज़ारों में सेहत के प्रति जागरूक ग्राहकों के बीच इसकी मांग तेज़ी से बढ़ रही है। यही वजह है कि दक्षिण भारत के कई राज्यों में किसान परंपरागत फसलों के साथ-साथ एवोकाडो जैसी नई फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।
वरदराज और चंद्रशेखरन जैसे किसानों की कहानियां बताती हैं कि सही जानकारी और थोड़े धैर्य के साथ छोटे किसान भी नई फसलों में हाथ आज़माकर अपनी आय के स्रोत बढ़ा सकते हैं। हालांकि कृषि विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि नई फसल अपनाने से पहले स्थानीय जलवायु, मिट्टी और बाज़ार की मांग को ध्यान में रखते हुए बागवानी विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह ज़रूर लेनी चाहिए।
गौरतलब है कि “मन की बात” कार्यक्रम में पीएम मोदी अक्सर देश के अलग-अलग कोनों से ऐसे किसानों और उद्यमियों की कहानियां चुनते हैं, जिन्होंने अपने दम पर कुछ नया करके दिखाया हो। वरदराज और चंद्रशेखरन का ज़िक्र इसी परंपरा का हिस्सा है, और इससे इन दोनों किसानों के साथ-साथ एवोकाडो जैसी नई बागवानी फसल को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। इस तरह की पहचान मिलने के बाद अक्सर देखा गया है कि आसपास के इलाकों के दूसरे किसान भी उसी फसल के बारे में जानकारी जुटाना शुरू कर देते हैं, जिससे धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र में नई फसल का दायरा बढ़ता है।
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