प्राकृतिक खेती के मॉडल फार्म तैयार करें किसान – कलेक्टर छिंदवाड़ा
हर्रई के किसान पूरनलाल इवनाती का प्राकृतिक मॉडल एक्सपोजर साइट के रूप में घोषित
25 अक्टूबर 2026, छिंदवाड़ा: प्राकृतिक खेती के मॉडल फार्म तैयार करें किसान – कलेक्टर छिंदवाड़ा – कलेक्टर श्री हरेंद्र नारायन के मार्गदर्शन में परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) के अंतर्गत एलआरपी (लोकल रिसोर्स पर्सन) प्रशिक्षण एवं खेत बचाव अभियान कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती की पद्धतियों, रासायनिक आदानों के विकल्पों तथा टिकाऊ कृषि के महत्व की जानकारी दी गई। इस दौरान कलेक्टर श्री नारायन पुलिस अधीक्षक श्री अजय पांडे के साथ उपस्थित थे। उन्होंने किसानों से अपने खेतों में प्राकृतिक खेती के मॉडल फार्म तैयार करने और अन्य किसानों को भी इन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करने की अपील की।
कलेक्टर श्री नारायन ने कहा कि खेती को टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने के लिए प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग आवश्यक है। किसान रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक एवं जैविक खेती की पद्धतियों को अपनाएं। इससे मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, पर्यावरण संरक्षण तथा खेती की लागत कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने किसानों से अपने खेतों में प्राकृतिक खेती के सफल मॉडल विकसित करने तथा उनके माध्यम से दूसरे किसानों को भी जागरूक करने का आह्वान किया।

किसान पूरन लाल इवनाती के प्राकृतिक खेती मॉडल का किया अवलोकन – कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर श्री हरेंद्र नारायन ने हर्रई विकासखंड के प्रगतिशील किसान श्री पूरनलाल इवनाती के प्राकृतिक खेती मॉडल फार्म का अवलोकन किया। उन्होंने खेत में अपनाई जा रही खेती की पद्धतियों एवं विभिन्न फसलों की जानकारी प्राप्त की। किसान श्री इवनाती के खेत में औषधीय फसलों के अंतर्गत सफेद मूसली एवं इरानियाकारकरा की खेती की जा रही है। इसके साथ ही फ्लाईबीन की फसल एवं नारियल का प्लांटेशन भी किया गया है। कलेक्टर ने फसल विविधीकरण एवं प्राकृतिक खेती के माध्यम से खेती को लाभकारी बनाने के इन प्रयासों की जानकारी ली।
उल्लेखनीय है कि किसान श्री पूरन लाल इवनाती के प्राकृतिक खेती मॉडल को प्रदेश स्तर पर सराहना मिली है तथा शासन द्वारा इसे किसान एक्सपोजर साइट के रूप में घोषित किया गया है। इस मॉडल के माध्यम से अन्य किसान प्राकृतिक खेती की तकनीकों, औषधीय फसलों के उत्पादन एवं फसल विविधीकरण के व्यावहारिक तरीकों को समझकर अपने खेतों में अपना सकते हैं।
प्राकृतिक खेती की तकनीकों से किसानों को किया जागरूक – उपसंचालक कृषि श्री मोरिस नाथ ने किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती के महत्व की जानकारी देते हुए जैविक आदानों के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग खेती की लागत कम करने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में सहायक हो सकता है।
परियोजना संचालक आत्मा श्री धीरज ठाकुर ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती की विभिन्न तकनीकों की जानकारी देते हुए एलआरपी के माध्यम से अधिक से अधिक किसानों तक तकनीकी जानकारी पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने किसानों को प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी का उपयोग अपने खेतों में करने तथा जैविक आदानों के निर्माण एवं उपयोग की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।
एसडीओ कृषि श्री नीलकंठ पटवारी ने प्राकृतिक खेती की विभिन्न पद्धतियों एवं उपलब्ध कृषि संसाधनों के समुचित उपयोग की जानकारी दी। कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. अहिरवार ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती की तकनीकों, जैविक आदानों के निर्माण एवं उपयोग तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों के संबंध में तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया।
कार्यक्रम के दौरान बीआरसी सेंटर का भी अवलोकन किया गया। यहां संचालित गतिविधियों एवं किसानों को उपलब्ध कराई जा रही तकनीकी जानकारी के संबंध में चर्चा की गई। प्रशिक्षण के माध्यम से एलआरपी एवं किसानों की क्षमता विकसित करने तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती की तकनीकों को खेत स्तर तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में, उप संचालक कृषि श्री मोरिस नाथ, परियोजना संचालक आत्मा श्री धीरज ठाकुर, एसडीओ कृषि श्री नीलकंठ पटवारी, कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. अहिरवार, एईओ श्री पंकज पराडकर, इश एग्रीटेक संस्था के प्रतिनिधि श्री प्रशांत परिहार, डीसी, बीसी, एलआरपी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।
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