राज्य कृषि समाचार (State News)

सतावर की खेती से किसानों को दोहरा फायदा, कम खर्च में अतिरिक्त आमदनी का मौका

30 अगस्त 2026, रायपुर: सतावर की खेती से किसानों को दोहरा फायदा, कम खर्च में अतिरिक्त आमदनी का मौका – छत्तीसगढ़ में किसानों को पारंपरिक खेती के साथ औषधीय पौधों की खेती से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सतावर की खेती किसानों के लिए कम लागत, कम पानी और अतिरिक्त आमदनी का बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन विभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

65 किसान 140 एकड़ में कर रहे सतावर की खेती

सतावर की जड़ों का इस्तेमाल आयुर्वेदिक और हर्बल औषधियों में किया जाता है, जिसके चलते इसकी बाजार में मांग बनी हुई है। इसी संभावनाओं को देखते हुए धमतरी, कांकेर और कोंडागांव जिले के 65 किसान करीब 140 एकड़ में सतावर की खेती कर रहे हैं। बोर्ड का उद्देश्य किसानों को औषधीय पौधों की खेती से जोड़कर उनकी आय के अतिरिक्त साधन विकसित करना है।

कम पानी में खेती, लागत भी कम

सतावर की खेती की खास बात यह है कि इसमें अधिक पानी और महंगे कीटनाशकों की जरूरत नहीं पड़ती। फसल में कीट और रोगों का प्रकोप भी अपेक्षाकृत कम रहता है। शुरुआती दिनों में सिंचाई के बाद सामान्य तौर पर महीने में एक बार हल्की सिंचाई पर्याप्त मानी जाती है। एक एकड़ में सतावर की खेती पर करीब 20 हजार रुपये तक खर्च आता है। फसल लगभग 18 से 20 महीने में तैयार होती है। एक एकड़ से करीब 200 से 250 क्विंटल तक ताजी जड़ें प्राप्त होती हैं। सुखाने के बाद इनकी मात्रा लगभग 20 से 25 क्विंटल रह जाती है। सूखी सतावर की जड़ों की बाजार कीमत करीब 180 से 220 रुपये प्रति किलोग्राम तक बताई गई है।

किसानों को पौधे और प्रशिक्षण भी

सतावर की खेती को आसान बनाने के लिए किसानों को तकनीकी सहयोग भी दिया जा रहा है। खेती शुरू करने के इच्छुक किसानों को बोर्ड से संपर्क करना होगा। जरूरत के अनुसार बोर्ड द्वारा सतावर के पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही किसानों को पौधरोपण से लेकर फसल तैयार होने तक खेती की जरूरी तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उपज की बिक्री के लिए अनुबंधित खरीदारों के माध्यम से खरीद सुनिश्चित करने की व्यवस्था भी की गई है, जिससे किसानों को बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिल सके।

औषधीय खेती से अतिरिक्त आय का रास्ता

सतावर की खेती किसानों के लिए पारंपरिक फसलों के साथ अतिरिक्त आय का जरिया बन सकती है। कम लागत, सीमित सिंचाई और औषधीय बाजार में मांग के कारण यह खेती किसानों के लिए उपयोगी विकल्प के रूप में सामने आ रही है। सरकार की पहल का उद्देश्य किसानों को ऐसी फसलों से जोड़ना है, जिनसे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सके और उनकी आमदनी के नए रास्ते खुलें। सतावर की खेती इसी दिशा में एक कदम है, जो किसानों को औषधीय पौधों की बढ़ती मांग से जोड़ने के साथ आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ने का अवसर दे रही है।

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