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राज्य कृषि समाचार (State News)

किसान कल्याण वर्ष में ग्वालियर बना कृषि नवाचार का मॉडल, हजारों किसानों को मिल रहा योजनाओं का लाभ

14 जुलाई 2026, भोपाल: किसान कल्याण वर्ष में ग्वालियर बना कृषि नवाचार का मॉडल, हजारों किसानों को मिल रहा योजनाओं का लाभ – किसान कल्याण वर्ष में ग्वालियर जिले में कृषि क्षेत्र में नवाचार, प्राकृतिक खेती, जैविक उत्पादन और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। प्राकृतिक खेती से लेकर उद्यानिकी, तिलहन उत्पादन, पराली प्रबंधन, खाद्य प्रसंस्करण और मत्स्य पालन तक विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले के हजारों किसान लाभान्वित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर संपूर्ण प्रदेश के साथ-साथ ग्वालियर जिले में भी मौजूदा साल को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है।

प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत जिले के 25 क्लस्टरों में 3,125 किसान प्राकृतिक एवं जैविक खेती से जुड़े हैं। 17 गाय आधारित रिसोर्स सेंटर के माध्यम से जीवामृत, घनजीवामृत और नीमास्त्र जैसे जैविक आदान उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे खेती की लागत घट रही है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ रही है।

मिलेट मिशन, तिलहन उत्पादन और जैविक खेती में नई पहल

मिलेट मिशन एवं तिलहन योजनाओं के तहत किसानों को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ भ्रमण कराकर पोषक व मोटे अनाजों (मिलेट) एवं तिलहन उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। तिलहन मिशन के तहत जिले में 1,060 फसल प्रदर्शन आयोजित कर किसानों को लगभग 95.20 लाख रुपए का अनुदान प्रदान किया गया है। परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत घाटीगांव, डबरा और भितरवार में लगभग 2,000 हेक्टेयर क्षेत्र में 1,799 किसान जैविक खेती अपना चुके हैं। योजना के अंतर्गत लगभग 1 करोड़ रुपए का अनुदान प्रदान किया गया है। ग्वालियर में स्थापित “जैविक सेतु” (जैविक खाद) केन्द्र पर प्रत्येक रविवार किसान अपने जैविक उत्पादों का विक्रय कर बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं। यह जैविक हाट जिला प्रशासन द्वारा मेला रोड पर कृषि विभाग के कार्यालय के सामने रविवार को लगवाई जा रही है।

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उद्यानिकी और फ्लोरीकल्चर से बढ़ रही संभावनाएँ

जिले में 23,389 हेक्टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी फसलें ली जा रही हैं, जिनसे लगभग 1,393 करोड़ रुपए का उत्पादन प्राप्त होता है, जो कुल कृषि आय का करीब 37 प्रतिशत है। ग्वालियर की जलवायु को देखते हुए फ्लोरीकल्चर की बड़ी संभावनाओं को साकार करने के लिए प्रदेश के पहले फ्लोरीकल्चर गार्डन की स्थापना की दिशा में भी पहल की गई है। ग्वालियर शहर से सटे खुरैरी ग्राम के समीप बनने जा रही हाईटेक नर्सरी एवं फ्लोरीकल्चर गार्डन का हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा भूमिपूजन किया गया है। इसकी स्थापना के लिये सरकार द्वारा प्रथम चरण के लिए 13 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। जिले में फलोरीकल्चर की अपार संभावनाएं हैं। वर्तमान में 370 हेक्टेयर में गेंदा और 120 हेक्टेयर में गुलाब की खेती होती है।

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खाद्य प्रसंस्करण और मत्स्य पालन को भी मिल रहा प्रोत्साहन

जिले में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना के तहत 599 खाद्य प्रसंस्करण इकाईयों का लक्ष्य है। जिसके तहत अब तक 553 इकाइयों को स्वीकृति देकर 92 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की गई है। वहीं प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना एवं मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना के माध्यम से मत्स्य पालकों को अनुदान, प्रशिक्षण और स्मार्ट फिश पार्लर जैसी सुविधाओं का लाभ दिया जा रहा है, जिससे मत्स्य पालन को भी स्वरोजगार का मजबूत माध्यम बनाया जा रहा है।

उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण से खेती हो रही लाभकारी

आत्मा योजना के तहत जिले के 225 किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया है। साथ ही 120 किसानों को उन्नत कृषि क्षेत्रों का भ्रमण कराया गया। जिले में 5,005 किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड वितरित किए गए हैं, जिससे संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा मिला है।

पराली प्रबंधन

जिले में पराली प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए 165.75 लाख रुपए के अनुदान से फसल प्रदर्शन कराए गए हैं। जिले में 149 सुपर सीडर, 693 स्ट्रॉ रीपर और 4 बेलर उपलब्ध हैं, जिनसे पर्यावरण संरक्षण के साथ खेती की लागत भी कम हो रही है।

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