धान छोड़ अपनाई उड़द की खेती, 70 दिन में मिला 15 क्विंटल उत्पादन; किसान ने कमाए 1.10 लाख रुपए
14 जुलाई 2026, रायपुर: धान छोड़ अपनाई उड़द की खेती, 70 दिन में मिला 15 क्विंटल उत्पादन; किसान ने कमाए 1.10 लाख रुपए – खेती में समय के साथ बदलाव अपनाकर बेहतर आय हासिल की जा सकती है। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के मालखरौदा विकासखंड के ग्राम दिमानी के प्रगतिशील किसान दाऊ लाल ने इसका उदाहरण पेश किया है। वर्षों तक ग्रीष्मकालीन धान की खेती करने के बाद उन्होंने कृषि विभाग की सलाह पर उड़द की खेती शुरू की। इसका परिणाम यह रहा कि महज 70 दिनों में 15 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ और फसल बेचकर करीब 1.10 लाख रुपये की आय अर्जित की।
धान की जगह अपनाई उड़द की खेती
दाऊ लाल के पास कुल 4.5 एकड़ कृषि भूमि है। पहले वे ग्रीष्मकालीन धान की खेती करते थे, लेकिन इस फसल में अधिक सिंचाई, बढ़ती लागत और मिट्टी की उर्वरता में कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। इसके बाद कृषि विभाग के दलहन, तिलहन एवं मक्का फसल प्रोत्साहन कार्यक्रम के तहत उन्होंने 2.5 एकड़ में कोटा उड़द-04 किस्म की बुवाई की।
70 दिन में तैयार हुई फसल
उड़द की फसल लगभग 70 दिनों में तैयार हो गई। इस दौरान किसान को 15 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। खेती में कुल करीब 22,500 रुपये की लागत आई, जबकि फसल बेचकर उन्हें लगभग 1.10 लाख रुपये की आय हुई। इस तरह कम लागत में बेहतर मुनाफा हासिल हुआ।
कम पानी में मिली बेहतर पैदावार
दाऊ लाल के अनुसार, उड़द की खेती में धान की तुलना में काफी कम सिंचाई की जरूरत पड़ी। इससे पानी की बचत हुई और सिंचाई पर होने वाला खर्च भी कम हो गया। इसके अलावा फसल में कीट एवं रोगों का प्रकोप भी अपेक्षाकृत कम रहा, जिससे उत्पादन लागत और खेती का जोखिम दोनों घटे।
फसल चक्र अपनाने का लिया निर्णय
उड़द की खेती से मिले अच्छे परिणाम के बाद दाऊ लाल ने भविष्य में भी फसल चक्र अपनाने और दलहनी फसलों का रकबा बढ़ाने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि उड़द कम समय, कम पानी और कम लागत में अच्छी आय देने वाली फसल है, इसलिए यह किसानों के लिए लाभदायक विकल्प साबित हो सकती है।
कृषि विभाग दे रहा वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा
कृषि विभाग के अनुसार, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य में सुधार और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर दलहन, तिलहन और मक्का जैसी वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए किसानों को उन्नत बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी भी उपलब्ध कराई जा रही है।
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