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राज्य कृषि समाचार (State News)

मानसून में देरी से घबराएं नहीं किसान, धान की खेती के लिए अभी पर्याप्त समय : कृषि वैज्ञानिक

08 जुलाई 2026, भोपाल: मानसून में देरी से घबराएं नहीं किसान, धान की खेती के लिए अभी पर्याप्त समय : कृषि वैज्ञानिक – छत्तीसगढ़ में इस वर्ष मानसून के सामान्य से कुछ देर से पहुंचने के कारण किसानों के बीच धान की बुआई को लेकर चिंता का माहौल बना हुआ है। हालांकि, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (आईजीकेवी), रायपुर के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा है कि घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। धान की खेती के लिए अभी भी पर्याप्त समय उपलब्ध है और यदि किसान वैज्ञानिक सलाह के अनुसार कृषि कार्य करें तो अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है।

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, इस वर्ष अल नीनो (El Niño) के प्रभाव के चलते मानसून लगभग 10 दिन की देरी से प्रदेश में पहुंचा। इसके कारण जून माह में सामान्य की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई, जिससे कई क्षेत्रों में धान की बुआई प्रभावित हुई। लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है। मानसून पूरे प्रदेश में सक्रिय हो चुका है और मौसम विभाग ने 8 जुलाई तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में अच्छी एवं व्यापक वर्षा होने का पूर्वानुमान जारी किया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी बारिश को देखते हुए किसान खेतों की तैयारी पूरी रखें और पर्याप्त नमी बनने के बाद ही धान की बुआई या रोपाई करें। जल्दबाजी या अपर्याप्त नमी में बुआई करने से अंकुरण प्रभावित हो सकता है और उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसलिए मौसम की स्थिति और कृषि विभाग की सलाह के अनुसार ही खेती के कार्य आगे बढ़ाना अधिक लाभदायक होगा।

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कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे प्रमाणित एवं अनुशंसित किस्मों के बीजों का उपयोग करें तथा आवश्यकता पड़ने पर कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों का चयन करें। साथ ही खेतों में जल निकासी और नमी संरक्षण की उचित व्यवस्था बनाए रखें, ताकि अधिक वर्षा होने की स्थिति में भी फसल को नुकसान न पहुंचे।

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विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई माह में यदि सामान्य या उससे बेहतर वर्षा होती है तो धान की खेती पर मानसून की शुरुआती देरी का विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा। ऐसे में किसान धैर्य रखें, मौसम के पूर्वानुमान पर नजर बनाए रखें और कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुरूप खेती करें। इससे इस खरीफ सीजन में बेहतर उत्पादन और अच्छी उपज प्राप्त की जा सकती है।

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