राज्य कृषि समाचार (State News)एग्रीकल्चर मशीन (Agriculture Machinery)

किसानों के लिए वरदान बनी साइज ग्रेडर मशीन, छंटाई का झंझट खत्म और कमाई दोगुनी

12 जुलाई 2025, भोपाल: किसानों के लिए वरदान बनी साइज ग्रेडर मशीन, छंटाई का झंझट खत्म और कमाई दोगुनी – किसान जब खेत में महीनों मेहनत करके आलू, टमाटर या प्याज उगाता है, तो उसे उम्मीद होती है कि मंडी में उसकी मेहनत का अच्छा मोल मिलेगा। लेकिन असली मुश्किल तब शुरू होती है, जब फसल को साइज के हिसाब से छांटना पड़ता है- कौनसा टमाटर बड़ा, कौनसा छोटा? कौन सा आलू A-ग्रेड का, कौन सा B-ग्रेड का?

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इस छंटाई में समय भी लगता है, पैसा भी और कई बार फसल भी बर्बाद हो जाती है। मगर अब ये चिंता खत्म हो गई है, क्योंकि किसानों के लिए एक नई तकनीक आई है- साइज ग्रेडर मशीन, जो फसल की छंटाई का पूरा काम खुद कर देती है। इससे अब किसानों को न मजदूर की टेंशन, न समय की बर्बादी, होगी सिर्फ ज्यादा दाम और ज्यादा मुनाफा मिलेगा।

क्या है साइज ग्रेडर मशीन और कैसे काम करती है?

साइज ग्रेडर मशीन एक तरह की ऑटोमैटिक छंटाई मशीन है, जो सब्जियों या फलों को उनके आकार के हिसाब से खुद-ब-खुद अलग-अलग ग्रेड में छांट देती है। किसान को बस अपनी फसल (जैसे टमाटर, आलू, प्याज, सेब आदि) मशीन में डालनी है और मशीन सामने से खुद उसे बड़े, मध्यम और छोटे साइज के ढेरों में बांट देती है। इससे मजदूर की जरूरत नहीं पड़ती, न ही फसल बर्बाद होती है।

छंटाई का खर्च बचा, दाम बढ़ा — सीधे मुनाफा

1. पहले किसान मजदूरों से छंटाई करवाते थे, जिसमें काफी खर्च और समय लगता था।
2. हाथ से छंटाई में कई बार फल/सब्जी दब जाते थे, जिससे फसल की गुणवत्ता गिरती थी।
3. अब मशीन से काम कुछ घंटों में हो जाता है और बर्बादी लगभग शून्य हो गई है।
4. मंडी में आकार के हिसाब से छंटी हुई फसल को ज्यादा भाव मिलता है, जिससे किसान की कमाई सीधी दोगुनी हो रही है।

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किन फसलों के लिए है ये सही?

यह मशीन खासतौर पर गोल और मध्यम आकार की फल-सब्जियों के लिए उपयोगी है। जैसे- टमाटर, आलू, प्याज, लहसुन, नींबू, आंवला, संतरा, सेब, अमरूद, चीकू और बेर आदि।

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सरकार भी दे रही सब्सिडी, किसान उठा सकते हैं सीधा लाभ

कृषि और बागवानी विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत किसानों को साइज ग्रेडर मशीन पर 40% से 60% तक की सब्सिडी मिल रही है। यह योजना उन क्षेत्रों में खासतौर से प्रभावी है, जहां बागवानी फसलों का उत्पादन ज्यादा होता है, जैसे: उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब और कर्नाटक।

स्मार्ट खेती की ओर बढ़ता स्मार्ट कदम

आज स्मार्ट खेती का मतलब सिर्फ उन्नत किस्म की फसल उगाना नहीं, बल्कि उसे बाजार तक स्मार्ट तरीके से पहुंचाना भी है। साइज ग्रेडर मशीन इसी दिशा में एक ठोस कदम है, जो न केवल मेहनत बचाती है, बल्कि किसान की बाजार में ताकत और आमदनी दोनों बढ़ाती है।

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