धान के साथ दलहन-तिलहन और औषधीय फसलों पर जोर, धमतरी के 152 गांवों में लागू होगा नया खेती मॉडल
06 सितंबर 2026, रायपुर: धान के साथ दलहन-तिलहन और औषधीय फसलों पर जोर, धमतरी के 152 गांवों में लागू होगा नया खेती मॉडल – नदी किनारे की कछार भूमि लंबे समय से खेती के लिए उपजाऊ मानी जाती रही है। धमतरी जिले में अब महानदी, पैरी, सोंढूर और खरून नदियों के किनारे बसे गांवों में खेती को अधिक टिकाऊ, कम जोखिम वाली और लाभदायक बनाने की दिशा में फसल विविधीकरण की योजना तैयार की गई है। इसके तहत इन नदियों से लगे 152 गांवों में नया खेती मॉडल लागू किया जाएगा। योजना से करीब 38 हजार किसान और 30,841.96 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र सीधे लाभान्वित होंगे।
एक फसल पर निर्भरता कम करने पर जोर
फसल विविधीकरण योजना का उद्देश्य धान की खेती को खत्म करना नहीं है, बल्कि किसानों की एक ही फसल पर निर्भरता कम करना है। इसके लिए जमीन की प्रकृति, जलभराव और सिंचाई की स्थिति के अनुसार अलग-अलग फसलों के विकल्प तैयार किए गए हैं। अभियान सितंबर-अक्टूबर से शुरू होगा। इसके तहत किसानों को उनकी जमीन की स्थिति के अनुसार खेती का ऐसा मॉडल अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिसमें धान के साथ दूसरी फसलों को भी शामिल किया जा सके।
तीन जोन के हिसाब से तय होगी फसल
योजना के तहत नदी किनारे के क्षेत्रों को तीन जोन में बांटा गया है। बहुत निचले और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में धान के साथ खस, बच और लेमनग्रास जैसी औषधीय फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। मध्यम ऊंचाई और मौसमी जलभराव वाले क्षेत्रों में धान की कटाई के तुरंत बाद कम अवधि वाली दलहन, तिलहन और सब्जियों की खेती की जाएगी। वहीं अधिक ऊंचाई और बेहतर जल निकासी वाले क्षेत्रों में औषधीय फसलों, फलदार पौधों और सब्जियों के साथ जैविक और प्राकृतिक खेती के क्लस्टर विकसित करने पर जोर रहेगा।
5,458.90 हेक्टेयर में होंगी वैकल्पिक रबी फसलें
फसल विविधीकरण योजना के तहत रबी सीजन में 5,458.90 हेक्टेयर क्षेत्र में वैकल्पिक फसलों की खेती का प्रस्ताव है। इसमें सबसे अधिक 3,244.10 हेक्टेयर में चना, 662.80 हेक्टेयर में गेहूं और 472.50 हेक्टेयर में सरसों की खेती का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा 243.90 हेक्टेयर में मक्का, 214.80 हेक्टेयर में उड़द, 178.70 हेक्टेयर में मूंग और 142.20 हेक्टेयर में मूंगफली की खेती प्रस्तावित है। सूरजमुखी आदि के लिए 39 हेक्टेयर और उच्च मूल्य वाली औषधीय फसलों के लिए 110.60 हेक्टेयर क्षेत्र प्रस्तावित किया गया है।
जल और मिट्टी संरक्षण के काम भी होंगे
फसल विविधीकरण के साथ जल और मिट्टी संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए माइक्रो-वाटरशेड मॉडल के तहत काम किया जाएगा। धमतरी और मगरलोड में 36 नालों की सफाई, 19 खेत तालाब, 17 सोख्ता गड्ढे और 7 चेक डैम/एमआईटी सुधार के काम प्रस्तावित हैं। वहीं 75 नदी तटवर्ती गांवों में मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए तटीय घास और पौधों को बढ़ावा दिया जाएगा।
चार क्षेत्रों में खेतों पर होंगे प्रदर्शन
फसल विविधीकरण के इस मॉडल को किसानों तक पहुंचाने के लिए धमतरी, कुरूद, मगरलोड और नगरी में खेतों पर प्रदर्शन भी किए जाएंगे। योजना का उद्देश्य किसानों को उनकी जमीन के अनुसार खेती के अधिक विकल्प उपलब्ध कराना, खेती का जोखिम कम करना और अतिरिक्त आय के अवसर बढ़ाना है। इससे किसानों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ जल संरक्षण और जलवायु अनुकूल खेती को भी बढ़ावा मिल सकेगा।
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