सहजन की खेती से बढ़ेगी किसानों की आय, बीकानेर में शुरू हुआ तीन दिवसीय प्रशिक्षण; किसानों को मिलेंगे 1,000 मुफ्त पौधे
21 जुलाई 2026, जयपुर: सहजन की खेती से बढ़ेगी किसानों की आय, बीकानेर में शुरू हुआ तीन दिवसीय प्रशिक्षण; किसानों को मिलेंगे 1,000 मुफ्त पौधे – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) के क्षेत्रीय अनुसंधान स्टेशन, बीकानेर में नाबार्ड वित्तपोषित परियोजना के तहत ‘सहजन आधारित कृषि प्रणाली’ विषय पर तीन दिवसीय कृषक कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को सहजन (मोरिंगा) आधारित आधुनिक और टिकाऊ खेती से जोड़ना, उनकी आय बढ़ाना, पोषण सुरक्षा को मजबूत करना और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर केंद्रीय मूंगफली अनुसंधान केंद्र, बीकानेर के प्रभारी अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र कुमार ने किसानों से सहजन आधारित कृषि प्रणाली अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि मोरिंगा एक बहुउपयोगी फसल है, जिसका उपयोग मानव पोषण, पशुपालन, कृषि और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है। इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ टिकाऊ कृषि को भी बढ़ावा मिलेगा।
जलवायु परिवर्तन के दौर में सहजन बनेगा किसानों का सहारा
काजरी के अध्यक्ष डॉ. नवरत्न पंवार ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के मौजूदा दौर में सहजन केवल एक फसल नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, पोषण सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने इसे भविष्य की टिकाऊ कृषि प्रणाली का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए किसानों से प्रशिक्षण का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने यह भी बताया कि अगस्त माह में इसी विषय पर दो और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
प्रशिक्षण लेने वाले हर किसान को मिलेंगे 1,000 मुफ्त सहजन के पौधे
परियोजना के मुख्य समन्वयक डॉ. बी.एल. बिश्नोई ने बताया कि प्रशिक्षण में बीकानेर जिले की विभिन्न तहसीलों के करीब 30 किसान भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि सहजन के विभिन्न उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकते हैं। उन्होंने बताया कि मोरिंगा औषधीय गुणों से भरपूर है और इसकी पत्तियां, फलियां तथा पाउडर को दैनिक आहार में शामिल कर पोषण स्तर बेहतर बनाया जा सकता है।
उन्होंने जानकारी दी कि प्रशिक्षण में भाग लेने वाले प्रत्येक किसान को प्रमाण-पत्र के साथ 1,000 सहजन के पौधे निःशुल्क दिए जाएंगे। वहीं परियोजना के तहत बीकानेर जिले के करीब 300 किसानों को तीन लाख से अधिक सहजन के पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि जिले में सहजन आधारित खेती का विस्तार हो सके।
विशेषज्ञों ने दी आधुनिक खेती की जानकारी
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान किसानों को सहजन की वैज्ञानिक खेती, पौधरोपण, देखभाल, मूल्य संवर्धन और विपणन से जुड़ी आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। कार्यक्रम के संचालन और आयोजन में काजरी के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी डॉ. मनोज गोरा, मूल सिंह गेहलोत और डॉ. सीताराम जाट का विशेष सहयोग रहा।
काजरी का मानना है कि सहजन आधारित कृषि प्रणाली किसानों के लिए अतिरिक्त आय का बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। साथ ही यह कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसल होने के कारण बदलते जलवायु परिदृश्य में टिकाऊ खेती को भी बढ़ावा देगी।
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