राज्य कृषि समाचार (State News)

कर्नाटक में सूखे की मार से चावल, चीनी और प्याज महंगे, बिगड़ने लगा घरेलू बजट

28 अगस्त 2026, बेंगलुरु: कर्नाटक में सूखे की मार से चावल, चीनी और प्याज महंगे, बिगड़ने लगा घरेलू बजट – कर्नाटक में कम बारिश और सूखे जैसे हालात का असर अब आम लोगों की रसोई पर दिखाई देने लगा है। राज्य में चावल, चीनी और प्याज की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। खासतौर पर पिछले एक महीने में चावल के दाम बढ़ने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। रोजमर्रा की जरूरत की वस्तु होने के कारण चावल की कीमत में वृद्धि का सीधा असर परिवारों के मासिक बजट पर पड़ रहा है।

चावल की लगभग सभी प्रमुख किस्मों के दाम बढ़े हैं। 26 किलो कच्चे चावल के पैकेट की कीमत 1,664 रुपये से बढ़कर 1,924 रुपये हो गई है। यानी एक महीने में ही इसकी कीमत में 260 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले स्टीम्ड चावल की 26 किलो की बोरी भी पिछले 30 दिनों में करीब 250 से 300 रुपये तक महंगी हुई है।

मांग के मुकाबले कम हो रही सप्लाई

चावल कारोबारियों के अनुसार फिलहाल बाजार में मांग के अनुपात में पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही है। एक चावल मिल मालिक का कहना है कि आने वाले दिनों में कीमत किस स्तर तक पहुंचती है, यह अभी कहना मुश्किल है। यदि आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो कीमतों में और तेजी की आशंका बनी हुई है।

चावल के साथ-साथ चीनी और प्याज के दाम भी बढ़ रहे हैं। कृषि उपज बाजार समिति (एपीएमसी) के सलाहकार रमेश चंद्र लाहोटी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में चीनी के थोक भाव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

चीनी 45 से बढ़कर 63 रुपये किलो

कर्नाटक में चीनी का थोक भाव करीब 45 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 63 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। यानी कीमत में लगभग 18 रुपये प्रति किलो की वृद्धि हुई है। लाहोटी के अनुसार, मॉनसून के दौरान कम बारिश के कारण राज्य में गन्ने का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। इसके अलावा त्योहारी मौसम और इथेनॉल की बढ़ती मांग से चीनी की मांग भी बढ़ी है। उत्पादन और आपूर्ति पर दबाव के बीच मांग बढ़ने से कीमतों में तेजी आई है।

प्याज के दामों में भी पिछले करीब 20 दिनों में तेजी देखी गई है। कम बारिश और कृषि उत्पादन पर इसके असर को बाजार में कीमत बढ़ने की प्रमुख वजहों में माना जा रहा है।

अगले साल की फसल पर भी असर की आशंका

जानकारों के मुताबिक इस साल कम बारिश और कम बुवाई का असर केवल मौजूदा बाजार पर ही नहीं, बल्कि अगले कृषि सीजन पर भी पड़ सकता है। यदि पर्याप्त क्षेत्र में बुवाई नहीं हुई तो अगले साल उत्पादन प्रभावित होने की संभावना रहेगी।

एक तरफ खाद्य वस्तुओं के बढ़ते दाम आम उपभोक्ताओं का घरेलू बजट बिगाड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कम बारिश कृषि उत्पादन के लिए चुनौती बन रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में चावल, चीनी और प्याज की कीमतों पर बाजार के साथ मौसम की स्थिति का भी बड़ा प्रभाव देखने को मिल सकता है।

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