राजस्थान में बीज कंपनियों के पंजीकरण में डिजिटल क्रांति: ब्लॉकचेन तकनीक से होगी ऑनलाइन और फेसलेस प्रक्रिया
18 जुलाई 2026, जयपुर: राजस्थान में बीज कंपनियों के पंजीकरण में डिजिटल क्रांति: ब्लॉकचेन तकनीक से होगी ऑनलाइन और फेसलेस प्रक्रिया – राजस्थान सरकार कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य में अब ब्लॉकचेन तकनीक (Blockchain Technology) के माध्यम से बीज कंपनियों का ऑनलाइन, कॉन्टैक्टलेस और फेसलेस पंजीकरण किया जाएगा। इससे बीज किस्मों के पंजीकरण की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और समयबद्ध बन सकेगी।
कृषि विभाग इस नई डिजिटल प्रणाली को सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग, आईआईटी कानपुर के आईटी विशेषज्ञों तथा राज किसान साथी टीम के सहयोग से विकसित कर रहा है। प्रस्तावित योजना के अनुसार अगस्त 2026 से नया डिजिटल मॉड्यूल लागू किया जाएगा।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद बीज कंपनियों को पंजीकरण के लिए सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। आवेदन से लेकर दस्तावेजों के सत्यापन और अनुमोदन तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होगी।
ब्लॉकचेन तकनीक के उपयोग से पंजीकरण से संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित और छेड़छाड़-मुक्त रहेंगे। इससे बीजों की गुणवत्ता, प्रमाणिकता और ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी तथा फर्जीवाड़े की संभावनाएं भी कम होंगी।
कृषि विभाग का मानना है कि यह पहल राज्य में डिजिटल कृषि प्रशासन को मजबूत करने के साथ-साथ बीज उद्योग के लिए अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद व्यवस्था विकसित करेगी। इससे गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता बढ़ेगी और किसानों को प्रमाणित बीज समय पर उपलब्ध कराने में भी सहायता मिलेगी।
बिना कार्यालय जाए होगा नई बीज किस्मों का पंजीकरण
नई व्यवस्था लागू होने के बाद बीज कंपनियों के प्रतिनिधियों को कृषि विभाग के कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी। वे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऑनलाइन आवेदन कर नई विकसित बीज किस्मों का पंजीकरण करा सकेंगे। यह पूरी प्रक्रिया कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन केंद्रीय बीज समिति (Central Seed Committee) एवं राज्य बीज उप समिति (State Seed Sub Committee) की परिचालन गाइडलाइन के अनुरूप संचालित होगी।
किसानों को समय पर मिलेंगी अधिक उपज देने वाली बीज किस्में
सरकार का मानना है कि इस डिजिटल व्यवस्था से नई उन्नत बीज किस्मों का पंजीकरण आसान होगा। इससे बीज कंपनियां तेजी से नई किस्में विकसित कर सकेंगी और राज्य के किसानों को अधिक उत्पादन देने वाले प्रमाणित बीज उचित समय और उचित कीमत पर उपलब्ध होंगे। नई व्यवस्था से विभाग के समय और श्रम की भी बचत होगी तथा पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
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