महाराष्ट्र में सूखे से त्राहि-त्राहि, केंद्र ने किसानों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया
29 सितंबर 2026, नागपुर: महाराष्ट्र में सूखे से त्राहि-त्राहि, केंद्र ने किसानों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया – महाराष्ट्र के करीब तीन-चौथाई हिस्से में सूखे की मार झेल रहे किसानों के लिए केंद्र सरकार ने राहत का भरोसा दिलाया है। केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को नागपुर में कहा कि केंद्र सरकार राज्य सरकार के साथ मिलकर सूखे और बाढ़ से प्रभावित किसानों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएगी। उन्होंने यह बात पीटीआई-वीडियो से बातचीत के दौरान कही।
दरअसल महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के कुल 358 तालुकों में से 265 तालुकों यानी करीब 74 प्रतिशत हिस्से को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है। सबसे ज्यादा असर विदर्भ के यवतमाल और अमरावती जिलों में देखा जा रहा है, जहां कपास की पैदावार आधी तक घट सकती है। राज्य सरकार ने प्रभावित इलाकों में फसल ऋण की शर्तें आसान करने, भू-राजस्व में छूट देने, बिजली बिल पर सब्सिडी और सर्वे के बाद फसल नुकसान का मुआवजा देने का ऐलान किया है।
आईसीएआर की योजना और वैकल्पिक फसलों पर जोर
चौहान ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और संबंधित संस्थानों ने सूखा प्रभावित हर जिले के लिए अलग से आकस्मिक फसल योजना तैयार की है। इसके तहत बीज बैंक स्थापित किए गए हैं, ताकि किसानों को समय पर वैकल्पिक और कम अवधि में पकने वाली फसलों के बीज मिल सकें। उन्होंने कहा, “हम राज्य सरकार के साथ समन्वय करके किसानों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएंगे।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब देश के कई राज्यों में मौसम की मार किसानों पर पड़ रही है। मौसम विभाग ने 27 सितंबर को उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब और झारखंड सहित करीब 19 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। उत्तर प्रदेश के जालौन, अमरोहा, बलरामपुर और इटावा जैसे जिलों में तेज बारिश और हवा से धान, गन्ना और दलहन-तिलहन की फसलों को नुकसान पहुंचा है।
राहत उपायों पर अब भी स्पष्ट राशि का इंतजार
गौरतलब है कि चौहान के बयान में अभी तक किसी ठोस मौद्रिक राहत पैकेज या केंद्रीय सहायता राशि की घोषणा नहीं हुई है। मंत्री ने तकनीकी और सलाहकार सहायता, यानी बीज उपलब्धता और वैकल्पिक फसल योजना पर ज्यादा जोर दिया है। किसान संगठन लगातार मांग कर रहे हैं कि केंद्र जल्द ही एक विशेष आर्थिक पैकेज का ऐलान करे, खासकर कपास किसानों के लिए, जिन्हें सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ रहा है।
आमतौर पर ऐसे मामलों में अंतिम राहत राशि तय करने से पहले राजस्व विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में सर्वे करके वास्तविक नुकसान का आकलन करती हैं। किसान संगठनों का कहना है कि जितनी जल्दी यह सर्वे और आकलन पूरा होगा, उतनी ही जल्दी किसानों तक मुआवजा और राहत राशि पहुंच सकेगी, इसलिए वे इस प्रक्रिया को तेज करने की मांग कर रहे हैं।
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्रीय कृषि मंत्रालय आगामी रबी सीजन 2026-27 की तैयारियों की समीक्षा में भी जुटा है। इससे पहले चौहान ने दिल्ली में रबी सीजन को लेकर राज्यों के साथ बैठक की थी, जिसमें बीज उपलब्धता, उर्वरक आपूर्ति और सिंचाई व्यवस्था पर चर्चा हुई थी। सूखा प्रभावित इलाकों में रबी की बुआई समय पर हो सके, इसके लिए भी केंद्र और राज्य मिलकर योजना बना रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खरीफ में नुकसान हुआ है, तो रबी सीजन में बेहतर उत्पादन के जरिए किसानों की भरपाई की कोशिश की जा सकती है।
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