देवास: मानसून की अनिश्चितता की स्थिति में कृषि विभाग द्वारा एडवाइजरी जारी
08 जुलाई 2026, देवास: देवास: मानसून की अनिश्चितता की स्थिति में कृषि विभाग द्वारा एडवाइजरी जारी – किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा वैज्ञानिकों के परामर्श से जारी सामयिक कृषि सलाह में कहा गया है कि मौसम की अनिश्चितता के बारे में लगाए जा रहे अनुमानों के बाद भी किसान भाइयों को चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। खरीफ की बुआई के लिए कुछ सावधानियां अपनाकर किसान उत्पादन में स्थिरता बनाए रख सकते हैं। किन्तु फिलहाल कुछ जिलों में अल्प वर्षा को देखते हुए खरीफ फसलों की बोवाई में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। जब तक खेतों में पर्याप्त नमी न हो जाए, तब तक बुआई करना जोखिम पूर्ण हो सकता है। सामान्य रूप से 4 इंच यानी लगभग 1 बालिश्त की गहराई तक नमी होने तथा बतर आने के बाद बुवाई की आदर्श स्थिति मानी जाती है। वर्तमान में पूरी तरह मानसून की सक्रियता न होने के कारण बुवाई के लिए किसानों को प्रतीक्षा करने की आवश्यकता है। वहीं जिन किसान भाइयों के पास सिंचाई की पर्याप्तता हो उन्हें मृदा की उर्वरता बढ़ाने के लिये ढैंचा या सनई की बुवाई हरित खाद के रूप में करना चाहिये। जिन क्षेत्रों में पूर्व में वर्षा हुई है, वे भी हरित खाद या ग्रीन मैन्यूरिंग हेतु फसल बो सकते हैं। बुवाई के लिए तैयार खेतों में आधार खाद जैसे गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट एवं उर्वरक जैसे सुपर फॉस्फेट, म्यूरेट ऑफ पोटाश और जिंक सल्फेट तथा जिप्सम आदि को खेत में बुवाई या छिड़काव द्वारा मिलाया जा सकता है।
कृषि सलाह के अनुसार किसान भाई, सोयाबीन के बीज का अंकुरण परीक्षण कर 70 प्रतिशत से अधिक अंकुरण क्षमता वाले बीजों का उपयोग करें। रोग एवं कीट प्रतिरोधी उपयुक्त ऐसी किस्मों का चयन करें जिनकी जल मांग भी कम हो। इसके लिये कृषि अधिकारियों से परामर्श लेना उपयोगी होगा। बुवाई से पूर्व बीजों को फफूंदनाशकों एवं जैव उर्वरकों से उपचारित करना आवश्यक है। सोयाबीन फसल की बुवाई में जलभराव एवं सूखे के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने हेतु रिज- एंड फरो सीड ड्रिल, ब्रॉड बेड एंड फरो (BBF) सीड ड्रिल अथवा हस्तचलित सीड डिब्लर का प्रयोग करना उपयोगी है। इसी प्रकार धान की बुवाई के लिए श्री पद्धति अथवा सीधी बुवाई अपनाना लाभकारी है।
किसान भाइयों को वर्षा जल संचय के लिए हर संभव उपाय अपनाना चाहिये। इसके लिए खेत तालाबों, पोखर, सोक्ता पिट्, कुओं आदि में जल को रोकने का प्रबंध करना चाहिये। जलभराव वाले खेत के हिस्से में पानी रोकना तथा कुओं और नलकूपों को रिचार्ज करना भी वर्ष भर पानी उपयोग करने की दृष्टि से उपयोगी होगा। खरीफ फसलों में इंटर क्रॉपिंग या अंतरवर्ती खेती की सलाह भी दी गई है। एक ही खेत में एक से अधिक फसलें साथ बोना और एक फसल की एक से अधिक किस्म बोने से किसी भी संभावित जोखिम में कमी आती है। इसके अतिरिक्त किसानों को फसल बीमा कराने की सलाह भी दी गई है। कृषि सलाह के अनुसार विभिन्न प्रसार माध्यमों से किसानों को मौसम की सूचनाओं पर ध्यान देने तथा उसके अनुकूल फसल कार्य करने के लिए भी आगाह किया जा रहा है। संचालक कृषि श्री उमाशंकर भार्गव ने इस संबंध में मैदानी अमले को किसानों से सतत संपर्क करने के अधीनस्थ कार्यालयों को निर्देश जारी किए हैं।
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