खरीफ में बाजरा की खेती: कम पानी में अधिक मुनाफा देने वाली फसल, जानें सफल उत्पादन के आसान उपाय
17 जुलाई 2026, भोपाल: खरीफ में बाजरा की खेती: कम पानी में अधिक मुनाफा देने वाली फसल, जानें सफल उत्पादन के आसान उपाय – खरीफ मौसम में बाजरा (पर्ल मिलेट) ऐसी प्रमुख मोटे अनाज की फसल है, जो कम वर्षा, अधिक तापमान और सीमित सिंचाई की परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन देने की क्षमता रखती है। जलवायु परिवर्तन और अनियमित मानसून के दौर में बाजरा किसानों के लिए एक भरोसेमंद एवं लाभदायक विकल्प बनकर उभरा है। यही कारण है कि इसे पोषण सुरक्षा और जल संरक्षण, दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण फसल माना जाता है।
यदि किसान समय पर बुवाई, उन्नत किस्मों का चयन, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और समय पर खरपतवार एवं कीट नियंत्रण अपनाते हैं, तो बाजरा से अच्छी पैदावार के साथ बेहतर आर्थिक लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं।बाजरा की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु
बाजरा शुष्क और गर्म जलवायु की फसल है। इसकी अच्छी वृद्धि के लिए 28 से 32 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त माना जाता है। यह मुख्य रूप से वर्षा आधारित फसल है, इसलिए समय पर और संतुलित वर्षा उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कम वर्षा या मानसून में देरी की स्थिति में भी यह अन्य खरीफ फसलों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करती है।
कैसी हो मिट्टी
बाजरा की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त रहती है। हल्की से मध्यम उपजाऊ भूमि में भी इसकी सफल खेती की जा सकती है, लेकिन खेत में जलभराव नहीं होना चाहिए, क्योंकि अधिक नमी फसल को नुकसान पहुंचा सकती है।
बुवाई का सही समय
मानसून की पहली अच्छी वर्षा के बाद जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के मध्य तक बुवाई करना सबसे उपयुक्त रहता है। समय पर बोई गई फसल में अंकुरण अच्छा होता है और उत्पादन भी अधिक मिलता है।उन्नत किस्मों का चयन
अधिक उत्पादन के लिए क्षेत्र के अनुसार विकसित उन्नत किस्मों एवं संकर (हाइब्रिड) बीजों का चयन करना चाहिए। प्रमाणित बीजों का उपयोग करने से रोगों का प्रकोप कम होता है और उपज में वृद्धि होती है।
संतुलित पोषण और सिंचाई
मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करें। जैविक खाद के साथ संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश देने से फसल का विकास बेहतर होता है। सामान्यतः वर्षा आधारित खेती में अतिरिक्त सिंचाई की आवश्यकता कम पड़ती है, लेकिन लंबे समय तक सूखे की स्थिति बनने पर एक जीवनरक्षक सिंचाई लाभदायक रहती है।
कीट एवं खरपतवार प्रबंधन
बुवाई के शुरुआती 30-40 दिनों तक खरपतवार नियंत्रण पर विशेष ध्यान दें। आवश्यकता अनुसार कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेकर कीट एवं रोग नियंत्रण के उपाय अपनाएं।बाजरा क्यों है बेहतर विकल्प?
कम पानी में सफल खेती।
सूखा सहन करने की अधिक क्षमता।
कम लागत में अच्छा उत्पादन।
पोषण से भरपूर और बढ़ती बाजार मांग।
जलवायु परिवर्तन के दौर में सुरक्षित एवं टिकाऊ फसल।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान वैज्ञानिक पद्धतियों से बाजरा की खेती करें, तो यह फसल कम जोखिम के साथ अधिक लाभ देने वाली खरीफ फसलों में महत्वपूर्ण विकल्प साबित हो सकती है।
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