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राज्य कृषि समाचार (State News)

मध्यप्रदेश में सोयाबीन बीज का संकट

(अतुल सक्सेना)

भोपाल। सोया राज्य कहलाने वाले मध्यप्रदेश में ही इस वर्ष सोयाबीन बीजों का संकट गहरा गया है। खरीफ सीजन सिर पर है बुवाई प्रारंभ होने वाली है परंतु सोयाबीन बीज किसान ढूंढ रहा है क्योंकि विगत दो-तीन वर्षों में अतिवृष्टि के कारण सोयाबीन फसल बर्बाद हुई है इस कारण किसानों के पास बीज की कमी है वहीं दूसरी तरफ सरकारी एजेंसियों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं जिससे निजी बीज कंपनियों की चांदी हो गई है। जिनके पास बीज है वह औने-पौने दामों पर 8 से 12 हजार रू क्विंटल बेच रहे हैं इससे बीज की कालाबाजारी बढ़ रही है। इसे रोकने के लिए सरकार को सख्त कदम उठाने होंगे अन्यथा किसान सोयाबीन बीज ढूंढता रह जाएगा।

चालू खरीफ में सरकार ने 63 लाख 74 हजार हे. क्षेत्र में सोयाबीन बोने का लक्ष्य रखा है। जबकि गत वर्ष लगभग 65 लाख हे. में सोयाबीन बोई थी और उत्पादन 48 लाख टन हुआ था। राज्य में बीज प्रतिस्थापन दर लगभग 32 फ़ीसदी है इसके मुताबिक लगभग 20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों को बीज बदलने की आवश्यकता होगी। इसके लिए लगभग 16 लाख क्ंिवटल बीज लगेगा वह कहां से आएगा यह प्रश्न विचारणीय है। सूत्रों के मुताबिक राज्य में लगभग 12 लाख कुंटल सोयाबीन बीज की उपलब्धता है परंतु मांग अधिक है जिससे पूर्ति करना संभव नहीं है। हालांकि सोयाबीन बीज की कालाबाजारी को लेकर कृषि मंत्री के निर्देश पर कुछ कंपनियों के बिरुद्ध स्नढ्ढक्र और कुछ अधिकारियों को निलंबित किया गया है वहीं दूसरी तरफ कुछ कंपनियों ने कृषि विभाग पर भी आरोप लगाया है कि वो प्राइवेट सेक्टर में माफिया बन बैठा है कमीशन की बात भी सामने आ रही है।

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अन्य दूसरी फसलों को प्रोत्साहन

सोयाबीन बीज का टोटा इस कदर बढ़ गया है कि विशेषज्ञों के मुताबिक प्रदेश में कई हे. रकबा खाली रह सकता है। प्रदेश में सोयाबीन के बीज की किल्लत पहली बार खड़ी हुई है। इसके पीछे मूल कारण बीते दो सालों में सोयाबीन की अंकुरण क्षमता का प्रभावित होना है। इसे देखते हुए पहले ही यह आशंका खड़ी हो गई थी कि मौजूदा खरीफ सीजन में सोयाबीन का बीज उपलब्ध होना आसान नहीं होगा। वही स्थिति बनी भी। देश में सोयाबीन की आपूर्ति करने वाला अकेला राज्य मध्य प्रदेश चालू खरीफ सीजन में बीज की मांग को पूरी करने के तरीके तलाश रहा है। अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि बीज की कमी खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है और फिलहाल इस संकट से निपटने का एकमात्र तरीका यही है कि किसानों को अन्य खरीफ फसलों का रकबा बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएं।

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भोपाल के सयुक्त संचालक श्री बी. एल. बिलैया का कहना है कि संभाग में 70 हजार क्विंटल सोयाबीन बीज उपलब्ध है तथा कुल 12 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बोनी का लक्ष्य है। संभाग में इस वर्ष सोयाबीन का क्षेत्र कम करने की तरफ विशेष ध्यान दिया जा रहा है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अन्य फसलों मक्का, अरहर, तिल, ज्वार पर जाएं। यदि सोयाबीन ही बोना है तो अंकुरण परीक्षण कर बीज उपचार कर ही बोनी करें। संभाग में इस बार कुल 18 लाख हे. मेंं खरीफ फसल लेने का लक्ष्य रखा गया है।

बीज में अंकुरण क्षमता की कमी

प्रदेश के अधिकांश किसान बीज के लिए सहकारी सोयायटियों पर ही निर्भर है। वहीं सोसायटियों में भी बीज भंडारण को लेकर स्थिति फिलहाल डावांडोल है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिछले सीजनों से हो रही अतिवृष्टि के चलते सोयाबीन बीज को नुकसान पहुंचा है।