हरियाणा में कपास किसानों को कीट-नियंत्रण व सूक्ष्म पोषक तत्वों पर ₹4,000 तक अनुदान, 15 सितंबर अंतिम तारीख
13 सितंबर 2026, चंडीगढ़/हिसार: हरियाणा में कपास किसानों को कीट-नियंत्रण व सूक्ष्म पोषक तत्वों पर ₹4,000 तक अनुदान, 15 सितंबर अंतिम तारीख – हरियाणा के कपास किसानों के लिए सरकारी सब्सिडी का लाभ उठाने का समय अब बहुत कम बचा है। राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने कपास पर एकीकृत कीट प्रबंधन (आईपीएम) और सूक्ष्म पोषक तत्वों की खरीद पर सब्सिडी देने की योजना चलाई है, जिसमें बिल अपलोड करने की अंतिम तारीख 15 सितंबर 2026 तय की गई है।
इस योजना के तहत किसान को खरीद लागत का 50 प्रतिशत या प्रति एकड़ ₹2,000, जो भी कम हो, अनुदान के रूप में मिलेगा। एक किसान अधिकतम दो एकड़ तक के लिए यह लाभ ले सकता है, यानी कुल मिलाकर ₹4,000 तक की सब्सिडी। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा के अनुसार, पात्र कपास उत्पादक इस योजना के तहत अधिकतम ₹4,000 तक की सहायता प्राप्त कर सकते हैं, बशर्ते वे तय शर्तों और क्षेत्रफल की सीमा को पूरा करें।
राज्य में इस बार कई इलाकों में कपास की फसल पर सफेद मक्खी और गुलाबी सुंडी जैसे कीटों की शिकायतें सामने आई हैं, जिसके बाद कृषि विभाग समय-समय पर किसानों को फेरोमोन ट्रैप लगाने और जरूरत पड़ने पर ही अनुमोदित कीटनाशकों के छिड़काव की सलाह दे रहा है। ऐसे में यह सब्सिडी योजना किसानों को सही सामग्री समय पर खरीदने के लिए आर्थिक मदद देती है।
किन उत्पादों पर मिलेगी सब्सिडी और कैसे करें आवेदन
सब्सिडी सिर्फ उन्हीं सूक्ष्म पोषक तत्वों और आईपीएम सामग्री पर मिलेगी, जिनकी सिफारिश चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार ने की है। किसानों को यह सामग्री अर्ध-सरकारी केंद्रों, सहकारी समितियों या अधिकृत डीलरों से ही खरीदनी होगी, तभी सब्सिडी के लिए दावा मान्य होगा।
आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। खरीद के बाद किसान को असली बिल की प्रति कृषि विभाग के पोर्टल agriharyana.gov.in पर अपलोड करनी होगी। इसके बाद विभाग तय प्रक्रिया के अनुसार दस्तावेजों और आवेदन का सत्यापन करेगा, और मानदंड पूरे मिलने पर राशि किसान के खाते में भेजी जाएगी। किसी भी दिक्कत की स्थिति में किसान हेल्पलाइन नंबर 1800-180-2117 पर संपर्क कर सकते हैं या नजदीकी कृषि विकास अधिकारी के कार्यालय में जानकारी ले सकते हैं।
विभाग ने साफ किया है कि तय अंतिम तिथि के बाद अपलोड किए गए बिल स्वीकार नहीं किए जाएंगे, इसलिए जिन किसानों ने अब तक खरीद कर ली है, उन्हें जल्द से जल्द अपना बिल पोर्टल पर अपलोड कर देना चाहिए।
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