राज्य कृषि समाचार (State News)

MP-महाराष्ट्र के बीच मजबूत होगा संपर्क, किसानों की उपज पहुंचेगी बड़े बाजारों तक

31 मई 2026, भोपाल: MP-महाराष्ट्र के बीच मजबूत होगा संपर्क, किसानों की उपज पहुंचेगी बड़े बाजारों तक – मध्य भारत के केले के प्रमुख उत्पादक केन्द्र खंडवा और बुरहानपुर में प्रतिवर्ष 1.7 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक केले का उत्पादन होता है। यहां से प्रतिदिन 140 भारी-भरकम ट्रक घरेलू बाजारों और अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों तक केले पहुंचाते हैं। वर्षों से इन ट्रकों को संकरी और जर्जर सड़कों से होकर गुजरना पड़ता था।

 इससे आवागमन धीमा हो जाता था, यात्रा का समय बढ़ जाता था और परिवहन एक कठिन कार्य बन जाता था। लेकिन महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना के तहत एनएच-753 एल के बोरगांव से शाहपुर खंड के आधुनिक चार-लेन वाले राजमार्ग गलियारे के रूप में विकसित होने से अब यह स्थिति बदलने वाली है। एन एच-753 एल का बोरगांव से शाहपुर तक का खंड रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है और यह महाराष्ट्र में बोरगांव बुजुर्ग से मुक्तईनगर तक फैले एक बड़े गलियारे का हिस्सा है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा विकसित इस गलियारे से मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच अंतर-राज्यीय संपर्क को नया रूप मिलने की उम्मीद है। लगभग 944 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विकसित किया जा रहा यह गलियारा लगभग 47 किलोमीटर लंबा है और इसका 85 प्रतिशत निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। पूर्ण रूप से निर्मित होने के बाद, यह मार्ग इंदौर और छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) के बीच एक तेज, सुरक्षित एवं अधिक कुशल वैकल्पिक संपर्क के रूप में उभरेगा और क्षेत्रीय लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करते हुए अंतर-राज्यीय परिवहन की एक प्रमुख धुरी बन जाएगा।

खेत से बाजार तक के संपर्क को मजबूती

यह परियोजना केले, कपास, सोयाबीन और गेहूं जैसी फसलों के लिए प्रसिद्ध कृषि प्रधान क्षेत्रों से होकर गुजरती है। स्थानीय किसानों और ट्रांसपोर्टरों के लिए, इन बेहतर सड़कों का सीधा लाभ यह होगा कि उनकी बाजार तक तेजी से पहुंच संभव होगी और परिवहन लागत में कमी आएगी।

इस क्षेत्र के गांवों के लिए, यह राजमार्ग पहले से ही दैनिक जीवन में एक बड़ा सुधार साबित हो रहा है। नए राजमार्ग के बनने से ट्रकों की आवाजाही काफी सुगम हो गई है। इससे किसानों और ट्रांसपोर्टरों, दोनों को कृषि उपज को अधिक कुशलता से ले जाने में मदद मिल रही है। इस गलियारे में 1 रेलवे ओवर ब्रिज, 7 बड़े पुल, 20 छोटे पुल, 98 पुलिया, 3 हल्के वाहनों के लिए अंडरपास, 5 छोटे वाहनों के लिए अंडरपास और 6 वाहनों के लिए अंडरपास शामिल हैं। इनमें से कई संरचनाओं को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि स्थानीय संपर्क बाधित न हो और गांवों, खेतों एवं आसपास के इलाकों के बीच आवागमन सुचारू व निर्बाध बना रहे।

परियोजना का संक्षिप्त विवरण

एनएच-753एल का बोरगांव-शाहपुर खंड परियोजना की लागत: 944 करोड़ रुपये

1. कुल लंबाई: लगभग 47 किलोमीटर

2. निर्माण में प्रगति: लगभग 85 प्रतिशत पूर्ण

3. जुड़ने वाले प्रमुख राज्य: मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र

4. प्रमुख संपर्क मार्ग: इंदौर – खंडवा – बुरहानपुर – जलगांव – छत्रपति संभाजीनगर

5. प्रमुख अवसंरचना: 1 आरओबी, 7 बड़े पुल, 20 छोटे पुल, 98 पुलिया, 14 अंडरपास

6. कस्बों और शहरी क्षेत्रों में भीड़ कम करने के लिए लगभग 26 किलोमीटर का बाईपास

7. सुरक्षित स्थानीय आवागमन हेतु 19 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड तेज और सुरक्षित आवागमन हेतु डिजाइन किया गया

इस परियोजना की प्रमुख विशेषताओं में से एक इसका सुनियोजित भविष्योन्मुखी अवसंरचना विकास है। इसमें लगभग 26 किलोमीटर लंबी एक व्यापक बाईपास प्रणाली का विकास शामिल है, जो कुल मार्ग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य भारी एवं द्रुत यातायात को शहरों और आबादी वाले क्षेत्रों से दूर मोड़ना है। इससे शहरी क्षेत्रों में भीड़भाड़, प्रदूषण और यात्रा में होने वाली देरी में कमी आएगी। साथ ही, स्थानीय यातायात की सुरक्षित और सुगम आवाजाही के लिए 19 किलोमीटर लंबी सर्विस रोडों का निर्माण किया जा रहा है। ये सड़कें ग्रामीण क्षेत्रों, कृषि क्षेत्रों और छोटी बस्तियों को जोड़ेगी। इससे स्थानीय यात्री मुख्य राजमार्ग पर आए बिना सुरक्षित रूप से यात्रा कर सकेंगे।

अंतर-राज्यीय संपर्क को मिलेगा बढ़ावा

यह मार्ग महाराष्ट्र के मुक्तईनगर क्षेत्र की ओर आगे बढ़ता है, जिससे एक मजबूत अंतर-राज्यीय संपर्क स्थापित होता है। यह गलियारा स्थानीय संपर्क से कहीं आगे बढ़कर इंदौर, खंडवा, बुरहानपुर, जलगांव और छत्रपति संभाजीनगर को जोड़ने वाले एक सुव्यवस्थित परिवहन नेटवर्क के निर्माण में योगदान देता है। इस परियोजना का एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच एक सशक्त वैकल्पिक आर्थिक गलियारे के रूप में इसकी भूमिका है।

वर्तमान में, इंदौर और छत्रपति संभाजीनगर के बीच यातायात काफी हद तक पारंपरिक मार्गों पर निर्भर करता है, जहां अक्सर जाम, संकरी सड़कें और लंबी यात्रा अवधि जैसी समस्याएं होती हैं। इससे यात्री और माल ढुलाई, दोनों प्रभावित होती हैं। बोरगांव बुजुर्ग से मुक्तईनगर तक के पूरे मार्ग को आधुनिक चार-लेन वाले गलियारे के रूप में विकसित करने से एक तेज, सुरक्षित और अधिक कुशल वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा, विशेष रूप से भारी वाहनों और माल परिवहन के लिए।

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