राज्य कृषि समाचार (State News)

10 साल बाद बदला MP की मंडियों का वर्गीकरण, 54 मंडियां पहुंचीं बेहतर ग्रेड में; D ग्रेड की संख्या 122 से घटकर 68 हुई  

20 अगस्त 2026, भोपाल: 10 साल बाद बदला MP की मंडियों का वर्गीकरण, 54 मंडियां पहुंचीं बेहतर ग्रेड में; D ग्रेड की संख्या 122 से घटकर 68 हुई – मध्यप्रदेश में किसानों के लिए मंडी व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव किया गया है। 10 साल बाद प्रदेश की कृषि उपज मंडी समितियों का नया वर्गीकरण किया गया है। तीन वित्तीय वर्षों की औसत आय और कृषि उपज की आवक के आधार पर किए गए इस वर्गीकरण में 54 मंडियां बेहतर ग्रेड में पहुंची हैं। वहीं, D ग्रेड की मंडियों की संख्या 122 से घटकर 68 रह गई है।

वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाए जाने के क्रम में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा किसानों एवं कृषि क्षेत्र के हित में निरंतर महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन तथा किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंसाना के निर्देशन में मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड द्वारा प्रदेश की कृषि उपज मंडी समितियों का दस वर्ष के अंतराल के बाद नवीन वर्गीकरण किया गया है।

3 साल की आवक और आय के आधार पर तय हुआ नया वर्ग

मंडी समितियों का यह नवीन वर्गीकरण वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 एवं 2025-26 की औसत कृषि उपज आवक तथा औसत आय के आधार पर किया गया है। औसत आय में मंडी शुल्क एवं अनुज्ञप्ति (लायसेंस) शुल्क से प्राप्त वास्तविक आय को आधार बनाया गया है। वर्तमान में मध्यप्रदेश में 259 कृषि उपज मंडी समितियां और 298 उपमंडियां किसानों की सेवा में कार्यरत हैं। वर्ष 2016 में किए गए पिछले वर्गीकरण के बाद इन दस वर्षों में मंडियों की आय, कृषि उपज की आवक और विपणन गतिविधियों में हुए बदलाव को देखते हुए नए वर्गीकरण की जरूरत महसूस की गई थी। इससे प्रदेश की मंडी व्यवस्था को मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

259 मंडियां चार वर्गों में बांटी गईं

नए वर्गीकरण के तहत प्रदेश की 259 मंडी समितियों को चार वर्गों में रखा गया है। इनमें 47 मंडी समितियां ‘A’ वर्ग, 63 ‘B’ वर्ग, 81 ‘C’ वर्ग और 68 ‘D’ वर्ग में हैं। इस नए वर्गीकरण से मंडी समितियों की प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था मजबूत होगी। मंडी की श्रेणी के अनुसार अधिकारी-कर्मचारियों के सेटअप में जरूरी बदलाव, वित्तीय अधिकारों में वृद्धि और मंडी समितियों की कार्यक्षमता बढ़ाने का काम किया जा सकेगा। इससे मंडियां स्थानीय जरूरतों के अनुसार किसानों को बेहतर सुविधाएं दे सकेंगी।

मंडियों में व्यापार और सुविधाएं बढ़ेंगी

नए वर्गीकरण का असर मंडियों की विपणन व्यवस्था पर भी पड़ेगा। मंडी प्रांगणों में हम्माल, तुलावटी और अन्य जरूरी लाइसेंस की व्यवस्था को बेहतर तरीके से बढ़ाया जा सकेगा। साथ ही व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और कृषि उपज के विपणन की प्रक्रिया आसान होगी। इसका लाभ किसानों के साथ व्यापारियों, हम्मालों, तुलावटियों और मंडी से जुड़े अन्य लोगों को भी मिलेगा। नवीन वर्गीकरण आदेश 19 अगस्त 2026 से लागू कर दिया गया है। किसानों और मंडी समितियों के हित में यह भी तय किया गया है कि पूर्व में वर्गीकृत किसी भी मंडी समिति को चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 यानी 31 मार्च 2027 तक नए वर्गीकरण के कारण निचले वर्ग में नहीं रखा जाएगा।

मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के आयुक्त-सह-प्रबंध संचालक कुमार पुरुषोत्तम ने 19 अगस्त 2026 को नए वर्गीकरण का आदेश जारी किया है। इससे मंडी समितियों की प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने, वित्तीय अधिकारों का बेहतर उपयोग करने और किसानों को मंडी में बेहतर सुविधाएं देने में मदद मिलेगी।

मंडियों के नए वर्ग के लिए आय और आवक की सीमा

मंडी का वर्गनवीन वर्गीकरण अनुसार आयनवीन वर्गीकरण अनुसार आवक
A6 करोड़ से अधिक2.50 लाख मेट्रिक टन से अधिक
B3 से 6 करोड़1.25 से 2.5 लाख मेट्रिक टन
C1.50 से 3 करोड़0.50 से 1.25 लाख मेट्रिक टन
D1.50 करोड़ से कम0.50 लाख मेट्रिक टन से कम

54 मंडियों का ग्रेड हुआ बेहतर

पूर्व और नवीन वर्गीकरण के आंकड़ों के अनुसार 54 मंडियों ने बेहतर प्रदर्शन कर उच्च ग्रेड में क्रमोन्नति पाई है। पूर्व में 122 ‘D’ ग्रेड की मंडियां थीं, जबकि अब सिर्फ 68 मंडियां ‘D’ ग्रेड की रह गई हैं।

मंडी का वर्गपूर्व वर्गीकरण अनुसार मंडियों की संख्यानवीन वर्गीकरण अनुसार मंडियों की संख्या
A3947
B4263
C5681
D12268
कुल259259

 इस नवीन वर्गीकरण से प्रदेश की मंडी समितियों की प्रशासनिक एवं वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ किसानों को मंडी प्रांगण में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

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