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राज्य कृषि समाचार (State News)

विश्व दलहन दिवस का आयोजन

10 फरवरी 2022, पोकरण ।  विश्व दलहन दिवस का आयोजन – स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर से संबद्ध कृषि विज्ञान केंद्र पोकरण द्वारा गुरुवार को दुधिया ग्राम मे “विश्व दलहन दिवस” के अवसर पर आज़ादी का अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में आत्मनिर्भर भारत-आयात प्रतिस्थापन के लिए संभावित दालों का दोहन विषयक किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य दलहन फसलों के क्षेत्रफल के साथ-साथ उत्पादन में भी वृद्धि करना है । गोष्ठी में कुल 46 दलहन उत्पादकों ने भाग लिया।

इस अवसर पर केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि दालों की पैदावार के लिए बहुत उपजाऊ जमीन और अधिक पानी की आवश्यकता नहीं पड़ती। साथ ही यह मिट्टी में नाइट्रोजन का स्तर भी बढ़ाती हैं। दालों की खेती को बढ़ावा देने से देश टिकाऊ खेती की दिशा में बढ़ेगा और किसान भी गरीबी के चक्रव्यूह से निकल पाएंगे। सस्य वैज्ञानिक डॉ. कृष्ण गोपाल व्यास ने बताया कि दलहनी फसलों में उन्नत तकनीकों का समावेश करके उपज में प्रति हेक्टेयर 2 से 4 क्विंटल  की बढ़त की जा सकती है जिससे राष्ट्रीय उपज व प्रति व्यक्ति उपलब्धता में बढ़ोत्तरी हो सकती है। साथ ही  दलहनी फसलें भूमि को आच्छादन प्रदान करती है जिससे भूमि का कटाव  भी कम होता है। इनकी जड़ प्रणाली मूसला होने के कारण कम वर्षा वाले शुष्क क्षेत्रों में भी इनकी खेती सफलतापूर्वक की जाती है।

प्रसार शिक्षा विशेषज्ञ सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि इन फसलों के दानों के छिलकों में प्रोटीन के अलावा फास्फोरस एवं अन्य खनिज लवण काफी मात्रा में पाये जाते है जिससे पशुओं और मुर्गियों के महत्वपूर्ण रातब के रूप में इनका प्रयोग किया जाता है। दलहनी फसलें हरी खाद के रूप में प्रयोग की जाती है जिससे भूमि में जीवांश पदार्थ तथा नत्रजन की मात्रा में बढ़ोत्तरी होती है। दालो के अलावा इनका प्रयोग मिठाइयाँ नमकीन आदि व्यंजन बनाने मे किया जाता है। कम अवधि की फसलें होने के कारण बहुफसली प्रणाली  मे इनका महत्वपूर्ण योगदान है।

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