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राज्य कृषि समाचार (State News)

गौ संवर्धन योजना बनी सहारा! किसान ने 5 भैंसों से शुरू किया डेयरी व्यवसाय, अब हर महीने हो रही हजारों की कमाई

10 जून 2026, भोपाल: गौ संवर्धन योजना बनी सहारा! किसान ने 5 भैंसों से शुरू किया डेयरी व्यवसाय, अब हर महीने हो रही हजारों की कमाई – आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना ने जिला सागर के ग्राम सागोनी उमरिया निवासी सीमांत कृषक महेश यादव के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। सीमित संसाधनों के कारण उन्नत नस्ल के दुधारू पशु नहीं होने से उन्हें पशुपालन से अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा था, लेकिन योजना के तहत मिले बैंक ऋण और 25 प्रतिशत अनुदान की मदद से उन्होंने डेयरी व्यवसाय शुरू कर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है।

महेश यादव ने बताया कि एक वर्ष पहले उन्हें अखबार के माध्यम से आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने पशु चिकित्सालय राहतगढ़ पहुंचकर योजना की पूरी जानकारी प्राप्त की। योजना के तहत बैंक ऋण के साथ शासन द्वारा 25 प्रतिशत अनुदान मिलने की जानकारी के बाद उन्होंने आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन किया।

आवेदन स्वीकृत होने के बाद बैंक ने दिसंबर 2025 में ऋण स्वीकृत किया तथा पशुपालन विभाग द्वारा 1 लाख 6 हजार 250 रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई।

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5 मुर्रा भैंसों से शुरू किया डेयरी व्यवसाय

अनुदान और ऋण की सहायता से महेश यादव ने हरियाणा से 5 उन्नत नस्ल की मुर्रा भैंसें खरीदीं और उनका तीन वर्षीय बीमा भी कराया। प्रत्येक भैंस प्रतिदिन लगभग 9 लीटर दूध देती है। गांव और राहतगढ़ क्षेत्र में दूध की अच्छी मांग होने के कारण उन्हें दूध विक्रय से नियमित आय मिलने लगी।

महेश यादव बताते हैं कि डेयरी व्यवसाय शुरू करने के बाद उन्हें हर महीने करीब 12 हजार रुपये की शुद्ध आय होने लगी। इससे उन्होंने बैंक ऋण की किश्तें समय पर चुकाईं और बचत से आगे चलकर 10 और मुर्रा भैंसें खरीद लीं।

गोबर गैस और जैविक खाद से भी मिला फायदा

महेश यादव ने पशुपालन को खेती से जोड़ते हुए गोबर गैस संयंत्र भी स्थापित किया है। भैंसों से प्राप्त गोबर का उपयोग गोबर गैस बनाने में किया जाता है, जिसका इस्तेमाल घर में खाना बनाने के लिए किया जा रहा है।

इसके अलावा गोबर गैस संयंत्र से निकलने वाली जैविक खाद को खेतों में उपयोग करने से फसल उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। इससे रासायनिक खाद पर होने वाला खर्च कम हुआ और खेती की लागत में बचत हुई।

सालाना आय पहुंची ढाई लाख रुपये से अधिक

महेश यादव के अनुसार डेयरी व्यवसाय, जैविक खाद और खेती में बढ़े उत्पादन के कारण उनकी वार्षिक आय ढाई लाख रुपये से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि पशुपालन विभाग की योजना से उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद मिली है और आज उनकी आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में काफी मजबूत हो चुकी है।

अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा

महेश यादव अब क्षेत्र के अन्य किसानों को भी आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना की जानकारी दे रहे हैं। उनका मानना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर किसान पशुपालन और खेती को एक-दूसरे का पूरक बनाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। उनकी सफलता आज आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा का उदाहरण बन गई है।

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